रायपुर, Jun 01, 2026

बिजली का बिल बढ़ सकता है। (PC: AI)
Chhattisgarh Electricity Rate Hike: छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब बिजली उपभोक्ताओं को भी बड़ा झटका लग सकता है। इस माह यानी जून में बिजली दरों में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि नए सत्र के लिए बिजली टैरिफ तय करने की प्रक्रिया बिजली नियामक आयोग में अंतिम चरण में है।
गर्मी के मौसम में पहले ही बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे में यदि बिजली दरों में बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल लोगों की नजरें बिजली नियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
राज्य बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) ने नियामक आयोग के समक्ष वर्ष 2026-27 के लिए करीब 6308.24 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान पेश किया है। कंपनी का कहना है कि इस घाटे की भरपाई के लिए सभी श्रेणियों घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक के टैरिफ में समान रूप से वृद्धि जरूरी है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष जुलाई में घोषित टैरिफ में प्रति यूनिट लगभग 20 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। अब एक बार फिर दरों में संशोधन की संभावना से उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है।
पावर कंपनी की याचिका के अनुसार वर्ष 2026-27 में कुल 25,460.30 करोड़ रुपये के राजस्व की आवश्यकता होगी। इसमें सबसे बड़ा खर्च बिजली खरीद पर 21,150.81 करोड़ रुपये का है। इसके अलावा 3,250.34 करोड़ रुपये संचारण एवं रखरखाव, 429.50 करोड़ रुपये ब्याज और 1,116.15 करोड़ रुपये अन्य खर्चों में शामिल हैं।
आने वाले वर्षों में यह खर्च और बढ़ने का अनुमान है। 2027-28 में कुल खर्च लगभग 27,306.02 करोड़ रुपये, 2028-29 में 30,307.93 करोड़ रुपये और 2029-30 में भी इसमें और वृद्धि देखने को मिल सकती है।
फिलहाल बिजली नियामक आयोग पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है। जून में नए टैरिफ को लेकर अंतिम निर्णय आने की संभावना है। आयोग के सामने एक ओर बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति को संतुलित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को राहत देने का दबाव भी बना हुआ है।
इस प्रस्ताव पर फरवरी में जनसुनवाई पूरी की जा चुकी है। इसके बाद आयोग ने अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे थे। अब सरकार और आयोग के बीच अंतिम स्तर पर चर्चा जारी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।
Updated on: 01 Jun 2026 01:53 pm

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