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रायपुर, Jun 01, 2026

Chhattisgarh Farmers: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नई उम्मीद, जैविक उत्पादों के लिए मांगा अलग एमएसपी, केंद्र सरकार के सामने रखा प्रस्ताव

Chhattisgarh Farmers: छत्तीसगढ़ में जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए नई उम्मीद जगी है। जैविक उत्पादों को पारंपरिक फसलों से अलग पहचान और उचित मूल्य दिलाने के लिए अलग एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) तय करने की मांग जोर पकड़ रही है।

Chhattisgarh Farmers

किसानों के लिए नई उम्मीद (photo AI0

Chhattisgarh Farmers: प्रदेश के किसानों के लिए आने वाले समय में जैविक खेती एक लाभकारी विकल्प बन सकती है। राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने 29 मई को दिल्ली में हुए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान 2026 के दौरान केंद्र सरकार के समक्ष जैविक खेती से तैयार होने वाले कृषि उत्पादों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने की मांग रखी है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीति बनाने का प्रस्ताव भी केंद्र के सामने रखा है।

Chhattisgarh Farmers: रासायनिक खेती से जैविक खेती की और आकर्षित

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि जैविक उत्पादों के लिए अलग समर्थन मूल्य तय किया जाता है तो किसानों को रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर आकर्षित करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में जैविक खेती करने वाले किसानों को उत्पादन लागत अधिक होने और बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अलग एमएसपी मिलने से उन्हें अपनी उपज का सुनिश्चित और बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

हर जिले के एक विकासखंड को जैविक विकासखंड बनाने का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जैविक खेती का रकबा लगातार बढ़ा है। विशेष रूप से बस्तर, सरगुजा और वनांचल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक और प्राकृतिक खेती पद्धतियों को अपना रहे हैं। राज्य सरकार भी प्राकृतिक खेती, जैविक उर्वरकों के उपयोग और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने की दिशा में कई योजनाएं संचालित कर रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2013-14 में राज्य पोषित जैविक खेती मिशन प्रारंभ किया गया।

प्रदेश के 5 जिले रायपुर, रायगढ़, बालोद, कोरिया तथा दंतेवाड़ा के 1010 एकड़ क्षेत्र का चयन किया जाकर योजना प्रारंभ की गई। योजनान्तर्गत क्लस्टर एप्रोच के माध्यम से कृषकों के खेतो में जैविक फसल प्रदर्शन का आयोजन, जैविक कृषक एवं विस्तार अमलों का प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक भ्रमण, जैविक प्रमाणीकरण हेतु सहायता, नाडेप व वर्मी टांका निर्माण आदि गतिविधियों के माध्यम से राज्य के किसानों को रूपांतरण अवधि (3 वर्ष) तक लाभान्वित किया जाता है।

वर्ष 2016-17 में राज्य के 5 जिलों दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर एवं गरियाबंद को पूर्ण जैविक जिला तथा शेष 22 जिलों के एक-एक विकासखंड को पूर्ण जैविक विकासखंड में परिवर्तित करने का लक्ष्य निर्धारित किय गया है। वर्ष 2023-24 में 6000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रमाणीकरण पूर्ण किया गया है एवं वर्ष 2024-25 में नवीन 6200 हेक्टेयर क्षेत्र में काम किया गया है।

ऐसे होता है जैविक प्रमाणीकरण

जैविक प्रमाणीकरण के लिए राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था काम कर रही है। यह संस्था नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन के मानकों के तहत कार्य करती है। प्रमाणीकरण के लिए किसानों को व्यक्तिगत रूप से या किसानों के समूह के माध्यम से संस्था के पास आवेदन करना होता है। इसके लिए खेत का विवरण और उपयोग होने वाले जैविक तरीकों का दस्तावेजीकरण जरूरी है। रासायनिक खेती से जैविक खेती में परिवर्तन के लिए 3 वर्ष का समय निर्धारित है। इस दौरान खेत में कोई भी रासायनिक खाद या कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। निरीक्षण और पूरी पड़ताल करने के बाद संस्था द्वारा जैविक उत्पाद का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, जिसके बाद उत्पाद को 'ऑर्गेनिक' के रूप में बेचा जा सकता है।

फैक्ट फाइल

4865- हजार हेक्टेयर खरीफ का क्षेत्र

1862- हजार हेक्टयर रबी का क्षेत्र
6727- हजार संपूर्ण फसल का कुल क्षेत्र

40.11- लाख कुल कृषक परिवार
6000- हेक्टेयर में जैविक खेती प्रमाणित

65395- किसान कर रहे जैविक खेती

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