19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वीबी-जी राम जी, जिसका लक्ष्य वास्तविक डिलीवरी है…

वीबी जी राम जी के तहत कार्यों को चार स्पष्ट श्रेणियों तक सीमित किया गया है- जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना और जलवायु-सहिष्णु परिसंपत्तियां-और ग्राम योजनाओं को पीएम गति-शक्ति से जोड़ा गया है।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Opinion Desk

Jan 17, 2026

-प्रो. गौरव वल्लभ प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य

विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन (वीबी जी राम जी) के तहत भारत की ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था (मनरेगा) का पुनर्गठन, वर्ष 2006 में इसकी शुरुआत के बाद अब तक का सबसे बड़ा और सार्थक बदलाव है। इस सुधार पर बहस अक्सर इसके अतीत और प्रतीकात्मक पक्षों तक सीमित रही है, जबकि इसे उन संरचनात्मक कमजोरियों के संदर्भ में देखना अधिक उचित है, जो लगभग दो दशकों के क्रियान्वयन के दौरान उभरकर सामने आईं- कमजोर योजना प्रोत्साहन, वित्तीय अनिश्चितता और परिसंपत्ति निर्माण में असमानता। इस संदर्भ को कार्यक्रम के विशाल वित्तीय आकार से भी समझा जा सकता है। मनरेगा के तहत अब तक कुल व्यय लगभग 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है, जिसमें से करीब 80 प्रतिशत खर्च केवल वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के बीच हुआ। इसके बावजूद परिणाम सीमित ही रहे।

हाल के वर्षों में प्रति परिवार औसत रोजगार 44-50 दिनों से अधिक नहीं रहा, जबकि कानूनी गारंटी 100 दिनों की है। 2025 के अंत में संसद और स्थायी समितियों के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में केवल 7-8 प्रतिशत परिवार ही पूरे 100 दिन का रोजगार प्राप्त कर सके। यही 'वादा और डिलीवरी' के बीच की खाई इस सुधार की मूल पृष्ठभूमि है। काम की मांग और उपलब्ध कराए गए काम के बीच का अंतर धीरे-धीरे इस योजना की संरचनात्मक समस्या बन गया। यह समस्या संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि वित्तीय अनिश्चितता से उपजी। वीबी जी राम जी इस 'खेल के नियम' बदलता है। 100 से 125 दिन की रोजगार गारंटी महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे भी अधिक अहम बदलाव फंडिंग ढांचे में है। अधिकांश राज्यों के लिए केंद्र-राज्य हिस्सेदारी अब 60:40 होगी, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 90:10 व्यवस्था जारी रहेगी। यह बदलाव केंद्र की जिम्मेदारी से पीछे हटना नहीं, बल्कि विवेकाधीन विस्तार के बजाय पूर्वानुमेयता लाने का प्रयास है। वित्त वर्ष 2026 के लिए 86,000 करोड़ रुपए का आवंटन (अब तक का सबसे अधिक) इस निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वीबी जी राम जी के तहत कार्यों को चार स्पष्ट श्रेणियों तक सीमित किया गया है- जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना और जलवायु-सहिष्णु परिसंपत्तियां-और ग्राम योजनाओं को पीएम गति-शक्ति से जोड़ा गया है।

शासन सुधार इस पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का आधार है। फिर भी कुछ चुनौतियां शेष हैं। कई राज्यों में अधिसूचित मजदूरी दर और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर बना हुआ है, जिससे श्रमिकों की मांग प्रभावित होती है। वीबी-जी राम जी न तो पारंपरिक अर्थों में विस्तार है, न ही कटौती। यह एक पुनर्संतुलन है- पिछले बीस वर्षों के अनुभव से उजागर हुई वित्तीय और प्रशासनिक सीमाओं को स्वीकार करते हुए। रोजगार को योजना, परिसंपत्तियों और जवाबदेही से जोड़कर राज्य यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी टिकाऊ बने, अस्थायी नहीं। यह लक्ष्य कितना सफल होगा, यह कानूनी वादों से अधिक राज्यों और स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा, लेकिन नीति-आशय के रूप में यह सुधार एक स्पष्ट संदेश देता है- जो कल्याण लंबे समय तक टिके, उसे केवल खर्च करने के लिए नहीं, बल्कि डिलीवरी के लिए डिजाइन करना होगा।