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वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए आर्थिक सुधारों पर रहेगा फोकस

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने बजट से अपनी प्रमुख उम्मीदें रखी हैं, जिसमें तेजी से कर अपील, सरल टीडीएस नियम, सीमा पार आपूर्ति शृंखलाओं के लिए स्पष्टता और देरी और विवादों को कम करने के लिए लक्षित सीमा शुल्क सुविधा की मांग की गई है।

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 19, 2026

-मधुरेन्द्र सिन्हा वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार

पिछला बजट भारत के करदाताओं के लिए एक सुनहरा बजट था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपए तक कर दी थी और यह देश की 40 करोड़ मिडिल क्लास जनता के लिए बड़ा सरप्राइज था। अब सामने है 2026 का बजट, जिसके लिए प्रधानमंत्री ने हाल ही उद्योगपतियों, अर्थशास्त्रियों तथा अन्य संबद्ध लोगों से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने 2047 की ओर भारत की विकास यात्रा के मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया। विकसित भारत को समग्र राष्ट्र की आकांक्षा बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य सरकार की नीतियों में परिलक्षित होता है। उन्होंने वैश्विक क्षमता निर्माण का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मिशन मोड में सुधारों पर बल दिया। दूसरी ओर अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं के क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने पर अपने विचार साझा किए।

स्पष्ट है कि आगामी बजट में दो बड़ी बातें होंगी। एक तो अन्य टैक्सों में बदलाव तथा दूसरा आर्थिक सुधार। यह अनुमान लगाना कठिन है कि कौन से अन्य टैक्स घटेंगे या उन्हें फिर से क्या स्वरूप दिया जाएगा। लेकिन वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए तथा अमरीकी-यूरोपीय दबाव के मद्देनजर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई जा सकती है। एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए कुछ बड़े कदम उठाए जा सकते हैं। एक्सपोर्टर्स को कुछ नए इंसेटिव भी दिए जा सकते हैं। टैक्स इंसेटिव के जरिये देश में बचत बढ़ाने की भी बात की गई है। अर्थशास्त्रियों ने बजट घाटा कम करने के लिए बजट में व्यवस्था करने पर भी जोर दिया है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर पर संतुलित पूंजीगत खर्च और ग्रोथ को बनाए रखने की सलाह दी है। इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमरीकी टैरिफ है जो इस समय 50 फीसदी है। इसके अभी और बढऩे की भी आशंका है। राष्ट्रपति ट्रंप इस समय दुनिया के लगभग सभी देशों पर तरह-तरह के दबाव डाल रहे हैं। भारत को अभी से ही आने वाले वक्त के लिए तैयार रहना होगा और इसलिए इस बजट की बहुत अहमियत है।

हमारे एक्सपोर्टर जिनमें टेक्सटाइल उद्योग और जेम उद्योग हैं, बहुत कठिनाई में हैं। सरकार इनके लिए बजट में कुछ बड़े कदम उठा सकती है। भारत अपने कस्टम ड्यूटी ढांचे को सरल बनाना चाहता है। इस सिलसिले में आगामी बजट में सरकार ड्यूटी स्लैब को पांच या छह तक सीमित करना चाहेगी। इससे ड्यूटी संबंधी कई तरह के विवाद खत्म हो जाएंगे। देश की जरूरतों के हिसाब से इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव किए जा सकते हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने बजट से अपनी प्रमुख उम्मीदें रखी हैं, जिसमें तेजी से कर अपील, सरल टीडीएस नियम, सीमा पार आपूर्ति शृंखलाओं के लिए स्पष्टता और देरी और विवादों को कम करने के लिए लक्षित सीमा शुल्क सुविधा की मांग की गई है। फिक्की ने आयकर आयुक्तों (अपील) के समक्ष अपीलों के एक बड़े बैकलॉग को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि लंबित मामले और अवरुद्ध रिफंड करदाताओं और सिस्टम पर दबाव डालते हैं। इसी तरह सीआइआइ ने कहा है कि देश की आर्थिक सेहत के लिए कर्ज पर लगाम लगाना जरूरी है।

संगठन ने सुझाव दिया है कि साल 2031 तक सरकारी कर्ज को जीडीपी के 50 फीसदी के दायरे में रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027 तक राजकोषीय घाटे यानी कमाई और खर्च के अंतर को घटाकर 4.2 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखने की बात कही गई है। उसने यह भी प्रस्ताव दिया है कि सरकार को 3 से 5 साल की एक ठोस वित्तीय योजना तैयार करनी चाहिए। इस योजना में कमाई, खर्च और कर्ज का पूरा ब्यौरा होना चाहिए। इससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आएगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। संगठन ने कहा है कि भारत में टैक्स-जीडीपी अनुपात फिलहाल 17.5 फीसदी है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। उसने टैक्स चोरी से निबटने के लिए आधुनिक तकनीक जैसे एआइ और डिजिटल टूल्स का सहारा लेने का भी सुझाव दिया है। ऐसा करने से टैक्स भरने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी और सरकारी खजाने में ज्यादा राजस्व जमा हो पाएगा।