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कानपुर, May 30, 2026

इंजेक्शन से बिगड़ी हालत या संक्रमण की पहेली? ITBP जवान की मां के कटे हाथ की GSVM में होगी जांच

GSVM Medical College:कानपुर में ITBP जवान की मां के कटे हाथ की जांच GSVM मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में होगी। जांच से संक्रमण के कारणों का पता लगाया जाएगा। मामला इलाज के दौरान संक्रमण बढ़ने और हाथ काटने से जुड़ा है, जांच जारी है।

ITBP, Kanpur News

ITBP जवान अपनी मां के कटे हुए हाथ के साथ - फोटो सोशल मीडिया

Kanpur Hospital Case:कानपुर में ITBP जवान की मां के कटे हुए हाथ की जांच अब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी विभाग द्वारा की जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की ओर से पत्र मिलने के बाद पहले इस अंग को फोरेंसिक विभाग में सुरक्षित रखा गया था, लेकिन विशेषज्ञ उपलब्ध न होने के कारण अब इसे पैथोलॉजी जांच के लिए भेजा गया है। कॉलेज प्रशासन ने वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की है, जो इस टिश्यू का सूक्ष्म परीक्षण करेगी। जांच का उद्देश्य संक्रमण के कारणों और ऊतक क्षति की वास्तविक वजह का पता लगाना है, ताकि पूरे मामले की वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की जा सके।

टिश्यू की जांच से सामने आएंगे संक्रमण के कारण

पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. लुबना खान के अनुसार, कटा हुआ हाथ कई दिन पुराना है, इसलिए टिश्यू की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होगी। हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में ऊतकों का सूक्ष्म अध्ययन किया जाएगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि संक्रमण किस कारण से फैला और क्या इसमें किसी बीमारी या अन्य चिकित्सकीय स्थिति की भूमिका थी। विभाग का मानना है कि समय बीत जाने के कारण ऊतक बदल चुके हो सकते हैं, इसलिए अनुभवी डॉक्टरों की निगरानी में जांच की जाएगी। कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. रिचा गिरि ने बताया कि फोरेंसिक सुविधा उपलब्ध न होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।

ITBP जवान की मां से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा मामला ITBP की 32वीं बटालियन में तैनात जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी से जुड़ा है। 13 मई को सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उनके बाएं हाथ में सूजन और संक्रमण तेजी से बढ़ता गया। स्थिति बिगड़ने पर 14 मई को उन्हें बिठूर स्थित पारस हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने गंभीर संक्रमण देखते हुए लगातार उपचार किया। हालांकि हालत में सुधार न होने पर 17 मई को डॉक्टरों ने उनका हाथ काटने का निर्णय लिया। इस घटना के बाद पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं कि संक्रमण इतनी तेजी से कैसे फैला। फिलहाल मामले की जांच जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी विभाग द्वारा की जा रही है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मामले में परिजनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की।

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