
बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बरेली की मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी अब और तेजी से रफ्तार मिलेगी। महिला सामर्थ्य योजना के तहत बनी यह कंपनी अब जिले के डेयरी सेक्टर की दिशा और दशा बदलने की तैयारी में है। अब दूध का पैसा सीधे पशुपालक के हाथ में पहुंचेगा।
इस बजट में बरेली को डेयरी से लेकर स्वास्थ्य और हाई-स्पीड रेल तक कई मोर्चों पर बड़ी सौगात मिली है। महिला सामर्थ्य योजना के तहत बनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी को अब नया बल मिलेगा, वहीं छुट्टा गोवंश की समस्या से निपटने को हजारों करोड़ का प्रावधान कर सरकार ने बड़ा दांव खेला है। जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर और दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी की रफ्तार भी तय मानी जा रही है।
प्रदेश में पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां बनाने की योजना है। गोरखपुर, बरेली और रायबरेली में काम शुरू हो चुका है, जबकि प्रयागराज और लखनऊ में गठन प्रस्तावित है। बरेली को खास प्राथमिकता इसलिए मिली क्योंकि यहां हजारों परिवार डेयरी से जुड़े हैं। अब तक गांवों के पशुपालक निजी डेयरी और बिचौलियों के भरोसे थे। दाम तय कोई और करता था, मेहनत कोई और। नई कंपनी के जरिए दूध संग्रहण, फैट जांच और भुगतान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। दूध जितना शुद्ध और उच्च गुणवत्ता का होगा, उतना अधिक दाम मिलेगा। भुगतान सीधे खातों में पहुंचेगा। दूध को गांवों से सीधे चिलिंग सेंटर तक पहुंचाया जाएगा। पाश्चुरीकरण के बाद दही, पनीर, मक्खन जैसे उत्पाद तैयार कर बाजार में बरेली ब्रांड के नाम से उतारने की तैयारी है।
महिला सामर्थ्य योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, अकाउंटिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जा रहा है। यह सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक नेतृत्व देने की पहल है। पशु चिकित्सा सेवा, टीकाकरण, बेहतर चारा और प्रशिक्षण की व्यवस्था से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ाने का लक्ष्य है। यदि क्रियान्वयन ईमानदारी से हुआ तो यह पहल रोहिलखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा इंजन साबित हो सकती है।
वर्षों से खेत बर्बाद कर रहे छुट्टा गोवंश पर सरकार ने 2,000 करोड़ रुपये रख-रखाव के लिए और 100 करोड़ रुपये वृहद गो-संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए प्रस्तावित किए हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के तहत 1,13,631 पशुपालकों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। पहले 30 रुपये प्रतिदिन मिलते थे, 1 अक्टूबर 2023 से यह राशि बढ़ाकर 50 रुपये प्रति गोवंश कर दी गई है। यह भुगतान डीबीटी के जरिए सीधे खातों में जाएगा। हालांकि सवाल बना हुआ है—क्या 50 रुपये प्रतिदिन वास्तविक भरण-पोषण के लिए पर्याप्त हैं। सरकार ने पशु रोग नियंत्रण के लिए 253 करोड़ और पशु चिकित्सालयों व संघ केंद्रों के सुदृढ़ीकरण हेतु 155 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। दावा है कि टीकाकरण तेज होगा और बीमारियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
बरेली के जिला अस्पताल में अत्याधुनिक इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर बनेगा। इससे सड़क हादसों और गंभीर मामलों में मरीजों को बड़े शहर रेफर करने की जरूरत कम पड़ेगी। इसके अलावा ग्रामीण और दूरदराज की छात्राओं के लिए नए छात्रावास बनाए जाएंगे, ताकि वे सुरक्षित माहौल में उच्च शिक्षा हासिल कर सकें। वहीं दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का लाभ बरेली को भी मिलेगा। यह परियोजना लागू होने पर व्यापार, उद्योग और पर्यटन को नई ऊर्जा मिलेगी और राजधानी से दूरी सिमट जाएगी। वहीं नगर निगम क्षेत्र में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और सेफ सिटी परियोजना के तहत सीसीटीवी नेटवर्क के विस्तार की योजना है। एंटी रोमियो स्क्वाड की सक्रियता बढ़ाई जाएगी।
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Published on:
11 Feb 2026 06:43 pm
