
ऐरण महोत्सव में प्रस्तुति देते हुए कलाकार
बीना. मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय ऐरण महोत्सव का समापन शुक्रवार को हुआ। समापन कार्यक्रम में संस्कृति, पर्यटन मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, सांसद लता वानखेड़े शामिल हुईं और प्राचीन प्रतिमाओं को देखकर उनका इतिहास जाना। इसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि ऐरण बुंदेलखंड का एक बहुत ही पुरातत्विक रूप से समृद्ध स्थान है, यहां चौथी शताब्दी की प्रतिमाएं मिली हैं। भगवान विष्णु, बराह प्रतिमा, नरसिंह भगवान की विशाल प्रतिमाएं हैं। भगवान कृष्ण की जन्म से लेकर कंस वध तक की लीला पत्थर पर उकेरी गई है। ऐरण को जो वैभव मिलना था वह अब मिलेगा, क्योंकि इसे कैलेंडर में शामिल किया गया है, जिससे हर वर्ष यहां महोत्सव होगा। विधायक निर्मला सप्रे ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Sites) में ऐरण को शामिल कराने, विश्राम गृह बनाने, प्रकाश की व्यवस्था कराने, बीना व मंडीबामोरा स्टेशन पर ऐरण संबंधी जानकारी के साइन बोर्ड लगाने की मांग रखी थी, जिसपर मंत्री ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजने की बात कही। उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधीक्षण डॉ. शिवकांत वाजपेयी ने बताया है कि ऐरण को पहले यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में शामिल कराया जाएगा। मंत्री ने कहा कि जल्द पर्यटन विभाग से टीम भेजकर विश्रामगृह, सौंदर्यीकरण कराने सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई जाएगी, जिससे एक अच्छा पर्यटक स्थल ऐरण बन सके। सांसद ने कहा कि पूर्व विधायक सुशीला सिरोठिया, डॉ. विनोद पंथी के समय महोत्सव शुरू हुआ था और अब संस्कृति विभाग ने इसकी फिर से शुरुआत की है। भाजपा सरकार ने आज ऐरण का वैभव लौटाया है, जो भी प्रयास होंगे वह किए जाएंगे, जिससे अच्छा पर्यटक स्थल बन सकें। पूर्व जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत, नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार, पूर्व विधायक डॉ. विनोद पंथी, मंडल अध्यक्ष राजेन्द्र उपाध्याय, एसडीएम विजय डेहरिया, तहसीलदार अंबर पंथी, एसडीओपी अजय कुमार सनकत आदि उपस्थित थे।
ऐरण को खजुराहो जैसा विकसित करने का होगा प्रयास
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधीक्षण डॉ. शिवकांत वाजपेयी ने बताया कि ऐरण का इतिहास 2000 वर्ष पुराना है। यहां ताम्र से लोह युग तक के अवशेष मिले हैं। भारत के सबसे पहले जारी होने वाले सिक्के भी ऐरण में मिलते हैं। ऐरण पहले नगर था, जो गांव बन गया है और इसे फिर सहेजने का कार्य किया जाएगा, जिससे खजुराहो जैसा विकसित किया जा सके। ऐरण के पास बीना नदी से चंद्राकार में है, जो बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही पहला सति अभिलेख भी यहीं है। ऐरण को विश्व धरोहर बनाने भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
मालवी, चकरी नृत्य ने बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत उज्जैन से आईं विनती जैन और उनके साथियों ने मालवी लोकनृत्य के माध्यम से की। कलाकरों ने भजनों पर प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। इसके बाद राजस्थान से आईं ममता देवी व साथियों ने चकरी नृत्य किया, जिसपर दर्शक झूम उठे। इसके भजन गायिका संजो बघेल ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिसपर दर्शकों ने जमकर नृत्य किया।
Published on:
17 Jan 2026 11:51 am
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