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भारत, May 30, 2026

Varicose Veins : बन रहा दर्द का कारण, पैरों की खूबसूरती भी छीन रहा नसों का ये जाल; सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन से जानिए क्या है ये

Varicose Veins: क्या आपके पैरों में नीली-बैंगनी और उभरी नसों का जाल दिखने लगा है? इसे मामूली थकान समझकर नजरअंदाज न करें। जानें पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में क्यों दोगुने होते हैं वेरिकोज वेन्स के मामले? इन बातों को आर्थोपेडिक सर्जन से समझेंगे।

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क्या आपकी सिटिंग जॉब बढ़ा रही है पैरों में नीली नसों का जाल?( Photo: AI Generated)

Varicose Vein : अक्सर ऑफिस से घर लौटने के बाद जब आप पैरों में तेज दर्द, भारीपन या पिंडलियों में ऐंठन (Muscle Cramps) महसूस करते हैं, तो ज्यादातर लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन, अगर कुछ दिनों बाद आपके पैरों या टखनों (Ankles) के पास नीली, बैंगनी या उभरी हुई मुड़ी-तुड़ी नसों का जाल दिखने लगे, तो सचेत हो जाइए।

मेडिकल साइंस में इस स्थिति को वेरिकोज वेन्स कहा जाता है। बदलती जीवनशैली, घंटों एक ही जगह बैठे रहने या लगातार खड़े रहने के कारण भारत सहित पूरी दुनिया में यह समस्या एक गंभीर साइलेंट हेल्थ क्राइसिस बनती जा रही है। आइए, डॉ. मिहिर थानणी, ऑर्थोपेडिक सर्जन से जानते हैं कि आखिर यह समस्या क्यों होती है, इसके लक्षण क्या हैं और इसका क्या इलाज मौजूद है।

What is Varicose Vein: क्या होती हैं वेरिकोज वेन्स?

डॉ. थानवी ने कहा, हमारे शरीर में नसें (Veins) एक वन-वे ट्रैफिक की तरह काम करती हैं, जो अशुद्ध खून को पैरों से ऊपर की तरफ, यानी दिल (Heart) तक पहुंचाती हैं। गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के खिलाफ खून को ऊपर भेजने के लिए इन नसों के अंदर छोटे-छोटे 'वन-वे वॉल्व' (Valves) होते हैं। यह वॉल्व खून को ऊपर तो जाने देते हैं, लेकिन वापस नीचे गिरने से रोकते हैं। जब किसी कारणवश ये वॉल्व कमजोर या खराब हो जाते हैं, तो खून ऊपर चढ़ने के बजाय पैरों की नसों में ही वापस लौटने और जमा होने लगता है। लंबे समय तक खून जमा रहने से नसें फैल जाती हैं, सूज जाती हैं और त्वचा के ऊपर नीली या बैंगनी रंग की मुड़ी हुई रस्सियों जैसी दिखाई देने लगती हैं। इसी स्थिति को वेरिकोज वेन्स कहते हैं।

Risk Factors: वेरिकोज वेन्स होने के मुख्य कारण

  • लंबे समय तक खड़े रहना या बैठना : जो लोग अपने प्रोफेशन के कारण लगातार कई घंटों तक खड़े रहते हैं जैसे टीचर्स, ट्रैफिक पुलिस, सिक्योरिटी गार्ड्स, या शेफ उनके पैरों की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है। वहीं, आईटी प्रोफेशनल्स या डेस्क जॉब करने वाले लोग जो 8-9 घंटे पैर लटकाकर बैठते हैं, उनमें भी ब्लड सर्कुलेशन धीमा होने से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
  • जेंडर और हार्मोनल बदलाव : आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस बीमारी का शिकार ज्यादा होती हैं। लगभग 33% महिलाओं को जीवन में कभी न कभी यह समस्या होती है। गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो नसों की दीवारों को ढीला कर देता है। इसके अलावा, गर्भाशय का आकार बढ़ने से भी पैरों की नसों पर दबाव बढ़ जाता है।
  • मोटापा और गतिहीन जीवनशैली : शरीर का अतिरिक्त वजन सीधा पैरों की नसों पर प्रेशर डालता है जो लोग फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज नहीं करते। उनकी पिंडलियों की मांसपेशियां (Calf Muscles) कमजोर हो जाती हैं। पिंडलियों को शरीर का 'दूसरा दिल' कहा जाता है, क्योंकि ये खून को ऊपर पंप करने में मदद करती हैं।
  • बढ़ती उम्र और आनुवंशिकी: उम्र बढ़ने के साथ नसों की इलास्टिसिटी (लचीलापन) कम होने लगती है, जिससे वॉल्व स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा, यदि आपके माता-पिता में से किसी को यह समस्या रही है, तो आनुवंशिक कारणों से आपके अंदर इसका जोखिम 50 से 90 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

सवाल-आम तौर पर लोग पैरों के दर्द या नीली नसों को सामान्य थकान या बुढ़ापे का लक्षण मानकर छोड़ देते हैं। एक मरीज को कब समझ जाना चाहिए उसे अब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

डॉक्टर का जवाब-

  • पैरों और पिंडलियों में लगातार भारीपन या सुस्ती महसूस होना।
  • पैरों में विशेषकर शाम के समय या रात को सोते समय तेज ऐंठन (Cramps) और दर्द होना।
  • टखनों और पंजों के पास हल्की सूजन (Swelling) आना।
  • नसों के आसपास की त्वचा में खुजली, सूखापन या रंग का गहरा (काला या भूरा) होना।
  • लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने पर दर्द का असहनीय हो जाना।

सवाल-क्या यह सिर्फ पैरों की खूबसूरती खराब होने की समस्या है या यह अंदर ही अंदर शरीर को कोई बड़ा नुकसान पहुंचा रही होती है?

डॉक्टर का जवाब- यह सोचना बिल्कुल गलत है कि वेरिकोज वेन्स सिर्फ पैरों की खूबसूरती खराब करने वाली (कॉस्मेटिक) समस्या है। असल में, यह एक प्रोग्रेसिव मेडिकल कंडीशन है, जो समय के साथ अंदर ही अंदर गंभीर रूप ले सकती है। जब नसों में अशुद्ध खून लंबे समय तक जमा रहता है, तो वहां का ब्लड सर्कुलेशन पूरी तरह बिगड़ जाता है। इसके कारण पैरों की त्वचा काली या भूरी पड़ने लगती है, उसमें गंभीर खुजली होती है और आगे चलकर 'वेनस अल्सर' यानी ऐसे गहरे घाव बन जाते हैं जिन्हें ठीक होने में महीनों लग जाते हैं।

इससे भी खतरनाक स्थिति तब होती है जब खून जमने के कारण गहरी नसों में क्लॉट बन जाता है, जिसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep Vein Thrombosis) कहते हैं। यदि यह क्लॉट बहकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए इसे केवल बाहरी कमी न मानकर समय पर इलाज कराना जरूरी है।

सवाल -आजकल कॉर्पोरेट जगत में, विशेषकर 'वर्क फ्रॉम होम' या लगातार 9-10 घंटे डेस्क जॉब करने वालों में यह समस्या बहुत देखी जा रही है। ऐसे में क्या करना चाहिए वेरिकोज वेन्स की समस्या नहीं हो?

डॉक्टर का जवाब- कॉरपोरेट डेस्क जॉब या 'वर्क फ्रॉम होम' में वेरिकोज वेन्स से बचने के लिए सबसे जरूरी है पैरों को गतिमान (Active) रखना। लगातार 9-10 घंटे बैठने के बजाय हर 45 मिनट में अपनी सीट से उठें और 2 मिनट के लिए वॉक या काफ-स्ट्रेचिंग (एड़ियों को ऊपर-नीचे करना) करें। इससे पिंडलियों की मांसपेशियां एक्टिव होती हैं और खून ऊपर दिल की तरफ पंप होता है।

काम के दौरान पैरों को आपस में क्रॉस करके (Cross-legged) न बैठें। डेस्क के नीचे पैरों को सीधा रखने के लिए फुटरेस्ट का इस्तेमाल करें। साथ ही, वजन नियंत्रित रखें, रोजाना 30 मिनट की सैर करें और पैरों में भारीपन लगने पर आराम करते समय उनके नीचे तकिया लगाकर उन्हें ऊंचाई पर रखें।

सवाल-पिंडलियों (Calf Muscles) को मेडिकल साइंस में "दूसरा दिल" (Second Heart) क्यों कहा जाता है? वेरिकोज वेन्स से इसका क्या कनेक्शन है?

डॉक्टर का जवाब- मेडिकल साइंस में पिंडलियों (Calf Muscles) को "दूसरा दिल" (Peripheral Heart) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये पैर के निचले हिस्से से अशुद्ध खून को गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के खिलाफ ऊपर दिल की तरफ पंप करने का काम करती हैं। जब हम चलते हैं, तो पिंडलियों की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और गहरी नसों को दबाकर खून को ऊपर की ओर धकेलती हैं।

वेरिकोज वेन्स से कनेक्शन: यदि हमारी लाइफस्टाइल गतिहीन (Sedentary lifestyle ) है और हम लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठते या खड़े रहते हैं, तो यह "दूसरा दिल" काम करना बंद कर देता है। पिंडलियों के सक्रिय न होने से नसों पर दबाव बढ़ता है, उनके वॉल्व खराब हो जाते हैं और खून पैरों में ही जमा होने लगता है, जो बाद में वेरिकोज वेन्स का कारण बनता है।

सवाल- महिलाओं में, खासकर गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान या बाद में, इसके मामले पुरुषों से दोगुने क्यों होते हैं? क्या पीरियड्स या मेनोपॉज का भी इससे कोई संबंध है?

डॉक्टर का जवाब- महिलाओं में वेरिकोज वेन्स के मामले पुरुषों से दोगुने होने का मुख्य कारण हार्मोनल बदलाव और गर्भावस्था है। प्रेगनेंसी में शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर अधिक बढ़ जाता है, जो नसों की दीवारों को ढीला (रिलैक्स) कर देता है। साथ ही, गर्भाशय (Uterus) का आकार बढ़ने से पेट की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे पैरों से खून ऊपर चढ़ नहीं पाता और वहीं जमा होने लगता है।

पीरियड्स और मेनोपॉज से संबंध: इनका संबंध सीधा है। हर महीने पीरियड्स से ठीक पहले और मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स में भारी उतार-चढ़ाव होता है। यह हार्मोनल बदलाव नसों के वॉल्व को कमजोर करता है, जिससे महिलाओं में इस बीमारी का रिस्क पुरुषों के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ जाता है।

सवाल- बाजार में मिलने वाले 'कंप्रेशन स्टॉकिंग्स' कितने प्रभावी हैं? क्या इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के खुद खरीदा और पहना जा सकता है?

डॉक्टर का जवाब- कंप्रेशन स्टॉकिंग्स वेरिकोज वेन्स के शुरुआती स्टेज, दर्द और सूजन को कम करने में बेहद प्रभावी हैं। ये पैरों पर बाहर से एक खास दबाव बनाती हैं, जिससे नसों का खून नीचे जमा होने के बजाय ऊपर दिल की तरफ आसानी से चढ़ता है। इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के खुद कभी नहीं खरीदना चाहिए। बाजार में ये अलग-अलग प्रेशर लेवल्स और साइज में आती हैं। गलत साइज या बहुत ज्यादा प्रेशर वाले मोजे पहनने से पैरों का ब्लड सर्कुलेशन सुधरने के बजाय पूरी तरह बिगड़ सकता है, जिससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए डॉक्टर की लिखित सलाह और सही नाप के बाद ही इन्हें पहनें।

कुछ 'गोल्डन टिप' बताए कैसे नसों को स्वस्थ रखें?

  • पोजीशन बदलते रहें: हर 30-40 मिनट में अपनी जगह से उठें, थोड़ा टहलें या पैरों को स्ट्रेच करें।
  • नियमित वॉक करें: रोजाना 30 मिनट की वॉक पिंडलियों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
  • वजन नियंत्रित रखें: संतुलित डाइट लें और नमक का सेवन कम करें, क्योंकि ज्यादा नमक शरीर में पानी रोकता है (Water Retention), जिससे पैरों पर दबाव बढ़ता है।
  • हाई हील्स से बचें: बहुत ज्यादा ऊंची हील्स पहनने से काफ मसल्स पूरी तरह काम नहीं कर पातीं, इसलिए फ्लैट या आरामदायक जूते पहनें।
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