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नारायणपुर, May 15, 2026

हौसले का पुल! 15 दिन में जवानों ने बना दिया 60 मीटर लंबा रास्ता, अबूझमाड़ के गांव को मिली बड़ी राहत

Narayanpur Special Story: अबूझमाड़ के कुड़मेल गांव में हर बरसात में नाला उफान पर आने से संपर्क कट जाता था, लेकिन अब हालात बदलने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

Narayanpur news

Narayanpur news(photo-patrika)

Narayanpur Special Story: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित कुड़मेल गांव के लोगों के लिए हर बरसात बड़ी परेशानी लेकर आती थी। तेज बारिश में पास का नाला उफान पर आ जाता था, जिससे गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता था। ऐसे में स्कूल जाना, अस्पताल पहुंचना और राशन जैसी जरूरी चीजें लाना मुश्किल हो जाता था। कई बार हालात इतने खराब हो जाते थे कि बीमार लोगों को खाट पर उठाकर जोखिम भरे तरीके से नाला पार कराया जाता था, जिससे ग्रामीणों को भारी कठिनाई होती थी।

Narayanpur Special Story: इस बार बदली तस्वीर, बना 60 मीटर लंबा पुल

लेकिन इस बार गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। सुरक्षा बलों ने केवल अपनी जिम्मेदारी तक सीमित न रहते हुए ग्रामीणों की बड़ी समस्या का समाधान भी किया। 38वीं वाहिनी आईटीबीपी के जवानों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर कुड़मेल गांव के पास लगभग 60 मीटर लंबा मजबूत लकड़ी और बांस का पुल तैयार कर दिया।

यह काम बेहद कठिन परिस्थितियों में, घने जंगल और लगातार बारिश के बीच पूरा किया गया। पुल बनने से अब बरसात के दिनों में भी गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से बना रहेगा। इससे बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों की आपूर्ति में बड़ी राहत मिलेगी।

15 दिन की मेहनत और टीम वर्क की मिसाल

इस कार्य का नेतृत्व 38वीं वाहिनी के कमांडेंट रोशन सिंह असवाल के मार्गदर्शन में और असिस्टेंट कमांडेंट राम कुमार मौर्य की देखरेख में किया गया। 15 जवानों की एक टीम ने दिन-रात मेहनत करते हुए यह पुल मात्र 15 दिनों में तैयार कर दिया। निर्माण के लिए जंगलों से लकड़ी और बांस इकट्ठा किए गए और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लगातार काम जारी रखा गया।

लगातार बारिश, दुर्गम रास्तों और संसाधनों की कमी के बावजूद जवानों ने हिम्मत नहीं हारी और पुल का निर्माण पूरा किया। इस पूरे कार्य में स्थानीय ग्रामीणों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और जवानों का भरपूर सहयोग किया, जिससे यह कार्य और भी तेजी से पूरा हो सका।

ग्रामीणों के जीवन में आई बड़ी राहत

पुल बनने के बाद अब ग्रामीणों को बरसात के दिनों में नाले के उफान से होने वाली गंभीर परेशानी से बड़ी राहत मिल गई है। पहले जहां गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था, अब उसी रास्ते से सुरक्षित आवागमन संभव हो गया है। बच्चे अब बिना जोखिम के स्कूल जा सकेंगे, मरीज समय पर अस्पताल पहुंच सकेंगे और दैनिक जरूरतों का सामान भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। उन्होंने इस पहल के लिए आईटीबीपी जवानों का आभार जताया है और इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी राहत में से एक बताया है।

सुरक्षा से आगे बढ़कर सेवा का संदेश

यह पुल केवल एक भौतिक ढांचा नहीं है, बल्कि सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच भरोसे, सहयोग और आपसी समझ का एक मजबूत प्रतीक बन गया है। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अगर मिलकर काम किया जाए तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।

अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और संवेदनशील इलाके में यह “हौसले का पुल” ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद, सुविधा और आत्मविश्वास लेकर आया है। इससे न केवल आवागमन आसान हुआ है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार की एक नई शुरुआत भी हुई है।

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