
NEET Student Rape-Death Case: पटना के मुन्ना चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET एग्जाम की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने एक बार फिर बिहार की पॉलिटिक्स को गरमा दिया है। जांच की स्पीड, एजेंसियों के रोल और सच सामने लाने में हो रही देरी पर सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर किए एक पोस्ट में राज्य सरकार और पुलिस की कड़ी आलोचना की है।
रोहिणी आचार्य ने सवाल उठाया कि इतने दिन बाद भी जब न तो दोषियों की साफ पहचान हुई है और न ही सेंट्रल एजेंसी ने फॉर्मली जांच अपने हाथ में ली है, तो किस तरह की जांच चल रही है। उनके मुताबिक, यह मामला बहुत सेंसिटिव है और ट्रांसपेरेंसी के बजाय इसमें कन्फ्यूजन दिख रहा है।
रोहिणी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कैसा अनुसंधान , कैसी जांच कर रही SIT और बिहार पुलिस? बिहार को शर्मसार करने वाले इस बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में बिहार पुलिस के काम पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और इस बार भी जांच और पूछताछ का पूरा प्रोसेस ही सवालों के घेरे में है।"
रोहिणी आगे लिखती हैं, "सरकार, सत्ताधारी पार्टी और पुलिस के पास जांच पर कहने के लिए कुछ खास नहीं है। CBI जांच की सिफारिश के ग्यारह दिन बाद भी CBI का जांच अपने हाथ में न लेना बताता है कि सरकार के इशारे पर बड़े लोगों को बचाने और मामले को दबाने की कोशिशें चल रही हैं। पूरा बिहार, जो सच सामने आने और दोषियों को सज़ा मिलने की उम्मीद कर रहा है, उसे निराशा के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।"
उधर SIT अपनी जांच जारी रखने का दावा कर रही है। अब तक दर्जनों लोगों के सैंपल लिए जा चुके हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार 25 रिपोर्ट आ चुकी हैं, लेकिन वे घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से मेल नहीं खाईं। हाल ही में जहानाबाद के तीन और संदिग्धों का नमूना लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अब टीम को नई रिपोर्ट का इंतजार है। जांच अधिकारी मान रहे हैं कि डीएनए मैच होना इस केस की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकता है। लेकिन लगातार नेगेटिव रिपोर्ट आने से उलझन और बढ़ गई है।
इसी बीच SIT की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। टीम देर रात गांव पहुंची और परिजनों को नोटिस देने की कोशिश की। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। परिवार का आरोप है कि जब सरकार सार्वजनिक रूप से CBI जांच की बात कह चुकी है, तब भी पुलिस दबाव बना रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जब तक CBI औपचारिक रूप से जिम्मेदारी नहीं लेती, तब तक राज्य पुलिस को प्रक्रिया आगे बढ़ानी ही होगी।
जहां घटना हुई थी, उस गर्ल्स हॉस्टल को पहले ही सील किया जा चुका है। कोर्ट के निर्देश के बाद छात्राओं का सामान पुलिस की मौजूदगी में वापस कराया गया। सामान देने के बाद इमारत को फिर से बंद कर दिया गया। यह कार्रवाई भी जांच का हिस्सा बताई जा रही है ताकि साक्ष्य सुरक्षित रह सकें।
राज्य सरकार ने जनवरी के आखिर में ही केंद्रीय जांच की अनुशंसा कर दी थी। SIT ने अपनी केस डायरी, बयान, डिजिटल रिकॉर्ड और तमाम दस्तावेज तैयार रखे हैं। कहा जा रहा है कि जैसे ही CBI औपचारिक आदेश जारी करेगी, पूरा रिकॉर्ड सौंप दिया जाएगा। मगर देरी ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को हवा दे दी है।
Updated on:
11 Feb 2026 02:35 pm
Published on:
11 Feb 2026 02:34 pm
