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AI Job Impact: एआइ युग में नौकरियां आने-जाने का हिसाब-किताब

विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार एआइ 2030 तक 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म कर 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा कर सकती है, लेकिन एंट्री-लेवल जॉब्स पर बड़ा खतरा है। असमानता और बेरोजगारी की आशंकाओं के बीच भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि हम एआइ-साक्षरता और कौशल विकास में कितनी तेजी दिखाते हैं।

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AI Job Impact

बालेन्दु शर्मा दाधीच - लेखक और वरिष्ठ सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ,

नौकरियों और कारोबारों पर एआइ के संभावित असर पर विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने एक अहम रिपोर्ट जारी की है। 'फोर फ्यूचर्स फॉर द न्यू इकोनॉमी' नाम की इस रिपोर्ट ने उन आशंकाओं की पुष्टि की है, जो धीरे-धीरे हर नौकरीपेशा शख्स के मन में पैदा होती जा रही हैं। यही कि अगर एआइ सब कुछ करने लगी तो मेरी नौकरी का क्या होगा और मेरे बच्चों का भविष्य कितना सुरक्षित होगा। रिपोर्ट में एक डरावना तथ्य बयान किया गया है कि वर्ष 2030 तक बहुत बड़े पैमाने पर शुरुआती नौकरियां (एंट्री-लेवल जॉब्स) खत्म हो सकती हैं। नए दौर में अफसर और कामगार दोनों को एक-सी अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि एआइ और रोबोटिक्स दोनों साथ आ रहे हैं।

डब्ल्यूईएफ एआइ की गति और हमारी धीमी तैयारी के आधार पर चार संभावनाओं की तरफ संकेत करता है। पहली संभावना है- सुपरचाज्र्ड प्रोग्रेस (तेज एआइ, कुशल कामगार)। इस स्थिति में इंसान एआइ टीमों को निर्देशित करेंगे, जिसके नतीजे में उत्पादकता बढ़ेगी लेकिन एआइ-सक्षम और एआइ-असक्षम के बीच असमानता बढ़ सकती है। दूसरी संभावना है द एज ऑफ डिस्प्लेसमेंट (तेज एआइ, कामगार तैयार नहीं)। इस स्थिति में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी आ सकती है, जिसके नतीजे में सामाजिक विभाजन और आर्थिक अराजकता के दरवाजे खुल सकते हैं। तीसरी संभावना है को-पायलट इकोनॉमी (धीमी एआइ, कुशल कामगार)। इस स्थिति में मानव और एआइ सहयोगात्मक ढंग से काम करेंगे। शुरू में लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए भारी निवेश किया जाएगा, लेकिन अंतत: वह लाभदायक सिद्ध होगा। चौथी संभावना है- स्टॉल्ड प्रोग्रेस (धीमी एआइ, अकुशल कामगार) जहां लाभ उद्यमों तथा कुलीन लोगों को मिलेगा, जबकि बाकी समुदाय पीछे रह जाएंगे।

बुनियादी रूप से डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट एआइ के प्रति नकारात्मक नहीं है। वह एक अच्छी खबर जैसी लगती है, लेकिन डेटा को देखने के दोनों तरीके हो सकते हैं और होने चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआइ वर्ष 2030 तक जितनी नौकरियों को खत्म करेगी उनकी तुलना में 7.8 करोड़ अधिक नौकरियां पैदा करेगी यानी हिसाब-किताब के लिहाज से नेट पॉजिटिव। रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2030 तक जहां 9.2 करोड़ नौकरियां एआइ की वजह से चली जाएंगी, वहीं कुल 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी। ये नौकरियां खासकर दो क्षेत्रों में हो सकती हैं - डिजिटल और ग्रीन इकोनॉमी में।

लेकिन यह 'नेट पॉजिटिव' एक क्रूर सच छिपा रहा है। माना कि 17 करोड़ नौकरियां डिजिटल और हरित क्षेत्रों में आएंगी, लेकिन जो 9.2 करोड़ नौकरियां गायब होंगी उनका क्या होगा? उनके भविष्य, उनके परिवार, आवास, भोजन, बच्चों की शिक्षा, इलाज आदि का क्या होगा? ये दोनों किस्म की नौकरियां अलग-अलग वर्गों से आती हैं। जिस रिसेप्शनिस्ट की नौकरी गई वह एआइ सिस्टम आर्किटेक्ट नहीं बन सकती। जिस अकाउंटेंट का काम खत्म हुआ वह रिन्यूएबल एनर्जी इंजीनियर नहीं बन सकता।

रिपोर्ट में एक सर्वे का जिक्र है। इसके मुताबिक, आधे से ज्यादा कारोबारी-उद्यमी (54 प्रतिशत) मानते हैं कि एआइ मौजूदा नौकरियों को मिटाएगी, लेकिन सिर्फ 24 प्रतिशत को लगता है कि वह नई नौकरियां सृजित करेगी। इसी तरह, 45 फीसदी उद्यमियों को लगता है कि उनके मुनाफे में बढ़ोतरी होगी, लेकिन सिर्फ 12 प्रतिशत को लगता है कि उनके कर्मचारियों की तनख्वाह भी बढ़ेगी। इससे जो संदेश निकलता है वह यह कि एआइ की बदौलत उद्यमी लाभ की स्थिति में रहेंगे जबकि कामगार नुकसान में होंगे- और वह भी वैश्विक स्तर पर। यह बदलाव इतना घातक क्यों हो सकता है? क्योंकि एआइ सिर्फ अनुभवी कामगारों को नुकसान पहुंचाएगी, ऐसा नहीं है। वह नए युवाओं के सीखने और नौकरियों में ढलने की संभावना को भी आघात पहुंचा सकती है। सोचिए शुरुआती नौकरियों में युवा अक्सर कैसे काम करते हैं? वे अमूमन सरल काम करते हैं- जैसे फाइलें संभालना, संदेश पाना-भेजना, बेसिक डेटा एंट्री करना, थोड़ा बहुत रिसर्च करना, प्रस्ताव तैयार करना, हिसाब-किताब तैयार करना, कस्टमर सर्विस वाले फोन कॉल करना आदि-आदि। नए भर्ती युवा गलतियां करते हैं, सीखते हैं व धीरे-धीरे कुशल बनते हैं।

एआइ पहले से ही इन बुनियादी कार्यों को 80 प्रतिशत ज्यादा कुशलता से करती है। व्यावहारिक तो यही है कि कंपनियां इंसानों को उन कार्यों के लिए नहीं रखेंगी, जिन्हें एआइ तुरंत, बेहतर और लगभग मुफ्त में कर देने वाली है। फर्ज कीजिए कि आपकी बेटी 2028 में कॉलेज से पास होती है और डिग्री थामे हुए कॅरियर की तलाश में निकलती है। लेकिन समस्या यह है कि सीढ़ी का पहला पायदान ही गायब है। जूनियर एनालिस्ट की नौकरी? एआइ इस काम को तो हमारी बनिस्पत ज्यादा तेजी और क्वालिटी के साथ करती है। अब स्वचालित ढंग से चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम आ गए हैं। इन्हीं हालात में आंकड़े और धारणाएं तेजी से बदल रही हैं। एआइ के प्रति शुरुआती उत्साह धीरे-धीरे आशंकाओं में बदल रहा लगता है। आज दुनिया के 57 फीसदी युवा कह रहे हैं कि रोजगार उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गया है।

हमें कौन-सा भविष्य मिलेगा, यह पहले से तय नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम एआइ से खुलने वाले नए अवसरों के लिए अपने आपको और अपनी भावी पीढ़ियों को कैसे और कितनी जल्दी तैयार करते हैं। कैसे हमारी सरकारें, शिक्षा प्रणाली, नागरिक और युवा नई किस्म की इस साक्षरता और कौशल विकास के लिए कमर कस लेते हैं, जब हमें अक्षर-ज्ञान अभियानों, डिजिटल व वित्तीय साक्षरता अभियानों के पारंपरिक रास्ते को छोड़े बिना एआइ-साक्षरता और एआइ-सक्षमता के रास्ते पर और भी बड़े कदम उठाने होंगे।