
पकड़े गए आरोपी
Crime देश में चल रहे एक बड़े सिम बॉक्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है। दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ ( IFSO) विंग ने इस नेटवर्क में शामिल सात आरोपी ठगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक ताईवानी नागरिक भी है। प्राथिमक पूछताछ में पता चला है कि इन लोगों के कनेक्श ताइवान, पाकिस्तान, नेपाल और कंबोडिया तक जुड़े हैं। पकड़े गए ये लोग भोले-भाले लोगों को दिल्ली ब्लास्ट, पहलगाम आतंकी हमला, आतंकी फंडिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी गंभीर मामले में उनका नाम आने की बात कहकर डराते थे और इस तरह डिजिटल अरेस्ट करके बड़े पैमाने पर उनसे रकम वसूलते थे। इस गैंग के सदस्य खुद को UP STF का सदस्य बताते थे।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि पकड़े गए आरोपी वृहद स्तर पर एक सिम बॉक्स सेटअप चला रहे थे। ये लोग टेलीकॉम कंपनियों की तनकीकी कमजोरियों का फायदा लेकर देशभर में रहने वाले भोलेभाले लोगों को अपना निशाना बनाते थे। इस तरह देशभर में साइबर फ्रॉड का एक बड़ा नेटवर्क संचालित हो रहा था। पकड़े गए लोगों के पास से एक हजार से भी ज्यादा सिम कार्ड मिले हैं।
सिम बॉक्स एक ऐसी तकनीकी डिवाइस होती है जिसमें एक साथ सैकड़ो सिम इंसर्ट किए जा सकते हैं। इन सिम का इस्तेमाल इंटरनेशनल कॉलिंग के लिए किया जाता है। ये लोग इस बॉक्स का इस्तेमाल इंटरनेशनल कॉल को लोकल कॉल के तौर पर रूट करने का काम कर रहे थे। ऐसा करके ये लोग टेलीकॉम चार्ज और रेगुलेटरी नियमों से बचरकर निकल जाते थे। ये लोग फ्रॉड करने के लिए इन सिम बॉक्स का इस्तेमाल फिशिंग लिंक, फर्जी लोन ऑफर और धोखेबाजी वाली इन्वेस्टमेंट स्कीम वाले बल्क एसएमस मैसेज भेजने के लिए कर रहे थे। ये लोग जो कॉल और मैसेज करते थे उनके सोर्स का पता लगाना मुश्किल होता था। इस तरह ये लोग आसानी से फर्जीवाड़ा और ठगी करने के बाद भी निशाने पर नहीं आते थे और बच जाते थे।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिनों दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने एक अन्य बड़े फर्जी सरकारी भर्ती रैकेट का भंडाफोड़ किया था। इस गैंग ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों का रूप धारण कर एक फर्जी पोर्टल बनाया जिसमें इन्होंने जॉब तलाश रहे सैकड़ों युवाओं को निशाना बनाया था।
इस गैंग ने कथित तौर पर एक जाली और देखने में असली जैसा लगने वाला ASI भर्ती का पोर्टल तैयार कर लिया था। इस पोर्टल पर फर्जी सरकारी नौकरियों का विज्ञापन देकर युवाओं को निशाना बनया जा रहा था। इस संबंध में स्पेशल सेल में FIR दर्ज की गई है। पुलिस के अनिुसार इन लोगों नेक्यूरेटर के सात पदों और जूनियर असिस्टेंट के 84 पदों के लिए फर्जी वैकेंसी निकाली और कॉलेज स्टूडेंट ग्रुप, ऑनलाइन फोरम और मैसेजिंग प्लैटफॉर्म पर एक कथित फर्जी भर्ती वेबसाइट के लिंक वायरल कर दिए। इस तरह इन्होंने बड़े पैमाने पर युवाओं के साथ ठगी की। इन दोनों को गुडवर्क को दिल्ली पुलिस बड़ी कामयाबी मान रही है।
Published on:
10 Jan 2026 04:46 pm
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