
अजित पवार (बाएं) और शरद पवार। (फाइल फोटो- ANI)
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम व NCP नेता अजित पवार के प्लेन क्रैश में मौत के बाद सियासी संकट भी खड़ा हो गया है। अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद बारामती में सीनियर NCP नेता ने एक मीटिंग की। इस बैठक में राज्य के बदलते सियासी हालात पर चर्चा हुई।
दरअसल, बीते कुछ समय से मुंबई के सियासी गलियारों में चर्चा थी कि NCP के दोनों धड़े फिर से एक साथ हो सकते हैं। 8 फरवरी को संभवत: दोनों पार्टियों का विलय होने वाला था। दिवंगत अजित पवार दोनों NCP गुटों के बीच एक अहम कड़ी थे। उन्होंने शरद पवार वाली NCP के नेताओं के साथ फिर से बातचीत का रास्ता खोलने के लिए अहम भूमिका निभाई थी।
इंडियन एक्सप्रेस ने सीनियर एनसीपी विधायक जयंत पाटिल और एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे के हवाले लिखा है कि विलय की बातचीत अंतिम चरण में थी। मीडिया में चर्चा थी कि महाराष्ट्र में संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को शामिल करने पर अनौपचारिक रूप से विचार किया जा रहा था।
जयंत पाटिल ने कहा कि NCP के दोनों धड़े हाल के दिनों में कई बार मिल चुके थे। जयंत ने कहा कि 16 जनवरी को हम चुनाव लड़ने की बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए मेरे आवास पर मिले थे। 17 जनवरी को शरद पवार के घर पर एक मीटिंग हुई थी। शशिकांत शिंदे ने कहा कि दोनों गुटों के बीच पहले बनी सहमति के अनुरूप थी।
शिंदे ने दावा किया कि अजित पवार ने कहा था कि हम नगर निगम चुनावों के बाद एक साथ आएंगे। इस संबंध में मीटिंग भी हुई थी। अजित दादा ने यह बात शरद पवार की ओर मार्गदर्शन के लिए देखते हुए कही थी। हमारी प्रगति अब उसी दिशा में होगी। शिंदे ने कहा कि हालिया घटनाक्रम के बाद प्रक्रिया में देरी हो सकती है, लेकिन हमारी कोशिश जारी रहेगी।
दोनों NCP गुटों द्वारा पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के अहम नगर निगम चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ने के बाद फिर से एक होने की बात जोर पकड़ रही थी। इस दौरान मीडिया में कई ऐसे खबरें भी सामने आईं, जिसमें दोनों खेमों के बीच सुलह की ओर इशारा किया था। नेताओं ने भी सार्वजनिक तौर पर अपने रुख में नरमी दिखाई थी, जिससे पता चलता है कि अंदरूनी मतभेद सुलझाए जा रहे थे।
आपस में विश्वास बढ़ाने के लिए आने वाले जिला परिषद चुनाव साथ मिलकर लड़ने पर भी बातचीत चल रही थी। NCP(SP) के एक नेता ने कहा कि यह माहौल का जायजा लेने और जिला परिषद के नतीजों के बाद विलय की घोषणा करने की रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने यह भी बताया कि घोषणा के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की गई थी। अजित पवार ने भी सार्वजनिक रैलियों में विलय पर सवाल उठाने वालों पर हमला करते हुए संभावित मिलन का संकेत दिया था। एक रैली में उन्होंने कहा था, "अगर हम साथ आते हैं तो कुछ लोगों को इससे क्या परेशानी है?"
Updated on:
30 Jan 2026 10:22 am
Published on:
30 Jan 2026 10:05 am
