30 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारत, Apr 15, 2026

Massive Repatriation: 10 लाख भारतीय वतन लौटे, जानें जंग और बारूद के बीच से अपनों को निकाल लाने की इनसाइड स्टोरी

Repatriation: पश्चिम एशिया में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और संकट के बीच भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस महा-अभियान के तहत अब तक लगभग 10 लाख भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से भारत लौट चुके हैं।

image
भारत

Apr 15, 2026

Massive Repatriation of NRIs

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन। (फोटो: ANI)

Evacuation : मिडिल ईस्ट में लगातार गहराते युद्ध और तनाव के बीच भारत सरकार ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को आयोजित एक विस्तृत अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान पश्चिम एशिया में उभरती सुरक्षा स्थितियों और महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र व्यवधानों के बीच अपने नागरिकों की रक्षा और स्वदेश वापसी के लिए भारत के चल रहे प्रयासों के चौंका देने वाला खुलासा किया। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र) असीम महाजन ने पुष्टि की कि 28 फरवरी से अब तक लगभग 9,84,000 भारतीय यात्री सफलतापूर्वक अपने घर लौट चुके हैं। यह दुनिया के इतिहास में किसी भी देश की ओर से किए गए सबसे बड़े और जटिल निकासी अभियानों में से एक बन गया है।

क्यों पड़ी इतनी बड़ी निकासी की जरूरत ?

पिछले कुछ समय से पश्चिमी एशियाई देशों में भू-राजनीतिक अस्थिरता, संघर्ष और युद्ध के हालात चरम पर पहुंच गए हैं। इसके चलते वहां काम करने वाले और रह रहे लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा था। ऐसे में भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अपने नागरिकों की जान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और बिना कोई देरी किए एक विशाल 'निकासी अभियान' शुरू कर दिया।

कैसे चला यह महा-अभियान?

इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारतीय वायुसेना और नौसेना ने अभूतपूर्व तालमेल के साथ काम किया। सुरक्षित निकासी के लिए सैकड़ों विशेष कमर्शियल उड़ानों के साथ-साथ कई जगहों पर सैन्य विमानों और समुद्री रास्तों का भी इस्तेमाल किया गया। खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय दूतावासों ने दिन-रात काम करते हुए अपने नागरिकों का संपर्क स्थापित किया और उन्हें सुरक्षित रास्तों से एयरपोर्ट और बंदरगाहों तक पहुंचाया। इस पूरे अभियान के दौरान बच्चों, महिलाओं, बीमारों और बुजुर्गों को सबसे पहले निकालने की प्राथमिकता दी गई।

अपनों से मिल कर छलछला आईं आंखें

जैसे ही ये विशेष विमान भारत के विभिन्न हवाई अड्डों (दिल्ली, मुंबई, कोच्चि आदि) पर उतरे, वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। हफ्तों से खौफ के साये में जी रहे लोगों ने अपनी मातृभूमि पर कदम रखते ही राहत की सबसे बड़ी सांस ली। हवाई अड्डों पर अपने परिजनों को देखते ही लोगों की आंखें आंसुओं से छलक पड़ीं। कई प्रवासियों ने बताया कि उन्होंने अपना सालों का जमा-जमाया काम और कारोबार वहीं छोड़ दिया है, लेकिन जिंदा और सुरक्षित अपने देश लौट आने की खुशी के आगे सब कुछ छोटा है।

अर्थव्यवस्था और भविष्य की चुनौतियां

यह वापसी केवल एक बचाव अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक मायने भी हैं। पश्चिम एशिया से आने प्रवासी भारतीयों की ओर से स्वदेश भेजा गया पैसा भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत अहम हिस्सा है। अचानक 10 लाख लोगों के लौटने से न केवल विदेशी मुद्रा के प्रवाह पर असर पड़ेगा, बल्कि देश के भीतर रोजगार के मोर्चे पर भी एक बड़ी चुनौती खड़ी होगी। खासकर केरल, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों पर, जहां से सबसे ज्यादा लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं, इसका सीधा आर्थिक और सामाजिक प्रभाव देखने को मिलेगा।

प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय का शुक्रिया अदा किया

इस ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन पर देश भर से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। प्रवासी भारतीयों के परिवारों ने इस त्वरित और सुरक्षित कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय का आभार जताया है। आम जनता इस कदम की सराहना कर रही है। वहीं, विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस सफल अभियान की तारीफ की है, हालांकि कई अर्थशास्त्रियों और विपक्षी नेताओं ने इतने सारे लौटे हुए लोगों के रोजगार और उनके भविष्य को लेकर चिंता भी जाहिर की है।

भारी संघर्ष वाले इलाकों में फंसे हुए हो सकते हैं कुछ भारतीय

सरकार अब इस ऑपरेशन के अंतिम चरण और पोस्ट-रेस्क्यू तैयारियों में जुट गई है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अभी भी कुछ अंदरूनी और भारी संघर्ष वाले इलाकों में कुछ भारतीय फंसे हुए हो सकते हैं, जिनकी तलाश और निकासी के लिए विशेष राजनयिक चैनल और हेल्पलाइन चालू रखी गई है। इसके साथ ही, लौटे हुए नागरिकों के पुनर्वास और उन्हें भारत में ही उनके कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए श्रम मंत्रालय और राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक केंद्रीय टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है। (इनपुट : ANI )


कमेंट्स

कोई कमेंट नहीं है।

पहले कमेंट करने वाले बनें।

कृपया पक्का करें कि आपका कमेंट हमारे नियमों एवं शर्तों के मुताबिक हो।
ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित खबरें