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न्यायपालिका में भ्रष्टाचार: 77 फीसदी जनता ने माना था, कई जज भी मानते हैं, दस साल में 8630 शिकायतें

NCERT Book Controversy: क्या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है? इस सवाल पर सीनियर वकील और पूर्व जजों का क्या कहना है, क्यों इस पर कम बात होती है। पढे़ं पूरी खबर...

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भारत

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Vijay Kumar Jha

Feb 27, 2026

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर सीनियर वकीलों व पूर्व जजों की राय (फोटो-IANS)

Corruption in judiciary: क्या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है? राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training - NCERT) की किताब पर विवाद के बाद से यह सवाल गरम है। एनसीईआरटी ने माफी मांग कर किताब वापस ले ली है, सुप्रीम कोर्ट ने किताब बैन कर दी है, शिक्षा मंत्री ने खेद जताते हुए ज़िम्मेदारी तय करने और कार्रवाई करने की बात कही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नाराज बताए जाते हैं। फिर भी न विवाद ठंडा हुआ है और न ही सवाल खत्म हुआ है। सवाल का कोई सीधा जवाब भी नहीं है, लेकिन न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के सवाल पर इससे जुड़े लोगों की राय क्या है? हम कुछ लोगों की राय यहां दे रहे हैं।

प्रशांत भूषण (वरिष्ठ वकील): नौ जजों ने मानी थी भ्रष्टाचार की बात

प्रशांत भूषण की राय में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय पर चर्चा करने की जरूरत है। उन्होंने इसी शीर्षक (We need to talk about judicial corruption) से ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में लेख लिखा। बक़ौल प्रशांत, ‘…इन सबके मद्देनजर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार भी गंभीर और जड़ जमा चुकी समस्या है। जनता बड़े पैमाने पर ऐसा मानती है।’

भूषण ने 2007 की ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की ग्लोबल करप्शन रिपोर्ट का हवाला दिया और लिखा की भारत में जिन लोगों ने सर्वे में हिस्सा लिया, उनमें से 77 फीसदी ने न्यायिक व्यवस्था को भ्रष्ट माना था। उन्होंने यह भी लिखा कि अदालत की अवमानना (contempt of court) के डर से न्यायिक व्यवस्था के भ्रष्टाचार को उजागर करना मुश्किल है। भ्रष्ट जजों को कठघरे में खड़ा करने की कोई ठोस व्यवस्था भी नहीं है। उच्च अदालतों के जजों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए किसी स्वतंत्र व्यवस्था का भी अभाव है। महाभियोग एक मात्र संवैधानिक प्रावधान है, जिसकी प्रक्रिया शुरू करने के लिए ही लोकसभा के सौ और राज्यसभा के 50 सांसदों की सहमति चाहिए होती है।

भूषण ने लोकसभा में 13 फरवरी को दिए गए एक और आंकड़े का हवाला देकर अपनी बात रखी। इसके मुताबिक दस साल में सीजेआई के पास मौजूदा जजों के खिलाफ 8630 शिकायतें आईं। इस आंकड़े के साथ उन्होंने लिखा, ‘हमें पता है कि बहुत काम मामलों की जांच के लिए इन-हाउस कमिटी बनती है। यहां तक कि गंभीर मामलों में भी कई बार ऐसा संभव है।’

भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कई जज/चीफ जस्टिस उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार की बात मानते रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया, ‘अवमानना के मामले में मेरे खिलाफ सुनवाई के दौरान तत्कालीन एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनके पास सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों के नाम हैं जिन्होंने हायर जुडीशियरी में भ्रष्टाचार की बात मानी है। सात ने रिटायरमेंट के तत्काल बाद यह बात कही थी। मेरे पास इन सब के बयान हैं।’

दुष्यंत दवे (वरिष्ठ वकील): ध्वस्त हो चुकी है न्यायिक व्यवस्था

वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे की नजर में भारत का न्यायिक तंत्र ध्वस्त हो चुका है और लोगों को न्याय देने में नाकाम साबित हो रहा है।


48 साल की वकालत के बाद जुलाई 2025 में अचानक रिटायरमेंट की घोषणा करने वाले दुष्यंत दवे ने रेडिफ.कॉम को दिए इंटरव्यू में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात पर कहा था, 'जज भी इसी समाज से आते हैं, मंगल ग्रह या चांद से नहीं।'

जस्टिस (रि.) संजीव बनर्जी: हां, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है

पूर्व जज संजीव बनर्जी ने साफ कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, लेकिन अकेले न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात क्यों हो? न्यायपालिका में भ्रष्टाचार बाकी की तुलना में बहुत कम है और सिस्टम के अंदर ऐसे मामलों से निपटने की ठोस व्यवस्था है।