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युवाओं को खतरा: देश में हर 7 में 1 स्ट्रोक का मरीज 45 से कम उम्र का

दुनियाभर में युवाओं को खतरा बढ़ता जा रहा है। देश में हर 7 में 1 स्ट्रोक का मरीज 45 से कम उम्र का है।

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भारत

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Tanay Mishra

Feb 28, 2026

Stroke patient

Stroke patient (Representational Photo)

स्ट्रोक अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रहा। राष्ट्रीय स्ट्रोक रजिस्ट्री की रिपोर्ट बताती है कि भारत में इसका हर 7 में से 1 मरीज 45 साल से कम उम्र का है। हाई बीपी, डायबिटीज़ और तंबाकू सेवन बड़े कारण हैं जिनकी वजह से यह बीमारी युवाओं को अपना निशाना बना रही है। 30 अस्पतालों में 34,792 मामलों पर यह रिसर्च की गई। इसमें मरीजों की औसत आयु 59.4 साल रही, जबकि 13.8% मरीज 45 साल से कम थे। कुल 63.4% मरीज पुरुष और 72.1% ग्रामीण क्षेत्रों से थे।

हाई बीपी बड़ा खतरा

हाई बीपी अब एक बड़ा खतरा बन गया है। रिसर्च के अनुसार 74.5% स्ट्रोक के मरीज हाई बीपी से पीड़ित थे। वहीं 27.3% डायबिटीज से पीड़ित थे। 28.5% तंबाकू सेवन करते थे। 22.6% धूम्रपान करते थे। वहीं 20.2% शराब के आदी थे।

समय पर इलाज न मिलना मौत की बड़ी वजह

ब्रेन अटैक में समय पर इलाज न मिलना मौत की बड़ी वजह बन रहा है। केवल 20.1% मरीज ही 4.5 घंटे की अवधि में अस्पताल पहुंच सके, जबकि 37.8% मरीज 24 घंटे बाद पहुंचे। देर से पहुंचने के कारण मरीजों को इमरजेंसी इलाज नहीं मिल पाया। रिसर्च के अनुसार 60% मामलों में नस में खून का थक्का जमने वाला स्ट्रोक था। वहीं 34.2% मामलों में दिमाग की नस फटने से खून बहना पाया गया। ब्रेन अटैक के कारण अस्पताल में मृत्यु दर 13.9% रही, जो तीन महीने में बढ़कर 27.8% हो गई। वहीं 29.7% मरीज गंभीर रूप से अपंग हो गए। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि समय पर इलाज ही जान बचा सकता है। इसके अलावा हाई बीपी, डायबिटीज, तंबाकू सेवन पर लगाम लगाने से भी फायदे मिल सकते हैं।