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India AI Impact Summit 2026: खेती-बाड़ी में भी अब चलेगा AI का जादू, मशीन लर्निंग किसानों के लिए साबित हो सकती है गेम चेंजर

India AI Impact Summit 2026: नई दिल्ली में इंडिया एआई समिट 2026 जारी है। इसमें एआई की मदद से किसान और खेती बाड़ी में बदलाव को लेकर मंथन हुआ। पढ़ें पत्रिका के रिपोर्ट विकास सिंह की रिपोर्ट...

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भारत

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Pushpankar Piyush

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Vikas Singh

Feb 17, 2026

AI समिट (फोटो-पत्रिका)

India AI Impact Summit 2026: भारत के खेतों में अब सिर्फ ट्रैक्टर और हल की आवाज नहीं, बल्कि डेटा और एल्गोरिदम का जादू भी चलेगा। यूके सरकार एफसीडीओ के सहयोग से एथेना इन्फोनॉमिक्स द्वारा जारी दो ताजा रिपोर्टों-'स्टेट ऑफ आर्ट' और 'रैपिड रिव्यू'- ने भारतीय कृषि के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट दावा करती है कि 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' एआई भारत के छोटे और सीमांत किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में चर्चा के दौरान पेश की गई रिपोर्ट में एक खास तकनीकी बिंदु यह भी है कि कृषि में एआई का उपयोग अभी मुख्य रूप से 'मशीन लर्निंग' के रूप में हो रहा है, जो सीधे तौर पर फसल की सुरक्षा, उपज और बाजार भाव तय करने में मदद कर रहा है।

सफलता की कहानी: जब तकनीक ने बदली तकदीर

रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा तेलंगाना का 'सागू बागू' प्रोजेक्ट है, जिसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और राज्य सरकार ने मिलकर चलाया। इसे एक 'ग्लोबल केस स्टडी' के रूप में पेश किया गया।

केस स्टडी: खम्मम जिले में मिर्च की खेती करने वाले 7,000 से अधिक किसानों को एआई तकनीक से जोड़ा गया।

रिजल्ट: एआई की मदद से कीट प्रबंधन और बाजार संपर्क बेहतर हुआ। नतीजा यह रहा कि किसानों को प्रति 100 किलो उपज पर औसतन 1,870 रुपये (लगभग $23) की अतिरिक्त आय हुई। यह साबित करता है कि सही तकनीक से छोटा किसान भी बड़ा मुनाफा कमा सकता है।

किन सेक्टर्स में आएगा बदलाव?

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई का दखल इन तीन प्रमुख क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा:

कीट और रोग नियंत्रण :

किसानों की सबसे बड़ी समस्या फसल में कीड़ा लगना है। एआई-आधारित ऐप्स अब पौधे की फोटो देखकर बीमारी बता देते हैं। इससे कीटनाशकों का अंधाधुंध छिड़काव रुकेगा और लागत घटेगी।

क्रेडिट और फाइनेंस:

बैंकों के पास छोटे किसानों का डेटा नहीं होता, इसलिए उन्हें लोन नहीं मिलता। एआई अब सैटेलाइट डेटा और फसल की सेहत देखकर किसानों का 'क्रेडिट स्कोर' तैयार कर रहा है, जिससे लोन मिलना आसान होगा।

गुणवत्ता जांच:

मंडी में अक्सर फसल को खराब बताकर दाम कम किए जाते हैं। 'एगनेक्स्ट' जैसी कंपनियों की एआई मशीनें तुरंत बता देती हैं कि मिर्च या हल्दी की क्वालिटी कैसी है, जिससे किसान ठगी का शिकार नहीं होंगे।

कौन हैं असली लाभार्थी?

छोटे किसान: रिपोर्ट साफ करती है कि एआई का असली फायदा उन किसानों को होगा जिनके पास 2 एकड़ से कम जमीन है। सामूहिक डेटा के जरिए उन्हें बड़ी कंपनियों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।

महिला किसान: यह रिपोर्ट का एक अहम पहलू है। गांवों में महिलाएं अक्सर तकनीक से दूर रहती हैं। लेकिन 'डिजिटल ग्रीन' के फार्मर डॉट चैट जैसे एआई चैटबॉट्स ने इसे बदल दिया है। अब महिलाएं अपनी स्थानीय भाषा में बोलकर खेती की सलाह ले रही हैं, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

रिपोर्ट के आर्किटेक्ट: इन विशेषज्ञों ने तैयार किया रोडमैप

इस विस्तृत दस्तावेज को तैयार करने में डॉ. मोनीषा लक्ष्मीनारायणन (सीनियर कंसल्टेंट) के नेतृत्व में फ्रांसिस जेवियर रथिनम, जेबा सिद्दीकी, संहिता नारायण, सिरी मारीगंती और मैरिएट कैंपबेल ने मुख्य भूमिका निभाई है। इनका निष्कर्ष है कि भारत 'एआई इनोवेशन' का ग्लोबल हब बन सकता है।

इन विशेषज्ञों ने महीनों के शोध और डेटा विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि भारत एआई इनोवेशन का ग्लोबल हब बन सकता है।

चुनौतियां और भविष्य

विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है। रिपोर्ट कहती है कि "डिजिटल डिवाइड" एक खतरा है। अगर इंटरनेट और स्मार्टफोन हर गांव तक नहीं पहुंचे, तो अमीर किसान और अमीर हो जाएंगे, जबकि गरीब किसान पीछे रह जाएंगे। इसलिए, सरकार को बुनियादी डिजिटल ढांचे पर निवेश करना होगा।

एक्सपर्ट टीम व्यू:

"एआई केवल एक तकनीक नहीं है, यह एक अवसर है जिससे हम भारत की कृषि को 'घाटे के सौदे' से निकालकर 'मुनाफे के व्यवसाय' में बदल सकते हैं।" - चर्चा के दौरान निष्कर्ष के आधार पर।

बॉक्स: भारतीय स्टार्टअप्स का जलवा

रिपोर्ट में इन भारतीय एग्री-टेक स्टार्टअप्स की सराहना की गई है:
क्रॉपिन और फसल: सटीक खेती के लिए।
एगनेक्स्ट: उपज की गुणवत्ता जांचने के लिए।
कृषि तंत्र: मिट्टी की जांच के लिए।
कालगुड़ी: बाजार लिंकेज के लिए।