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नई दिल्ली, May 12, 2026

दिल्ली के घरों की किचन है सबसे ज्यादा प्रदूषित, स्टडी में सामने आई वजह

Indoor Air Pollution: DTU और IIT-दिल्ली की स्टडी में खुलासा हुआ है कि दिल्ली के कई घरों में किचन सबसे ज्यादा प्रदूषित जगह बन चुका है। रिसर्च में इसके पीछे की बड़ी वजहें भी सामने आई हैं।

Delhi Pollution Study

किचन बन रही पॉल्यूय़न का अड्डा (Photo-AI)

Delhi Pollution Study: दिल्ली में एयर पॉल्यूशन की बात होती है तो लोगों का ध्यान ज्यादातर सड़कों, गाड़ियों और फैक्ट्रियों के धुएं पर जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने घर के अंदर छिपे खतरे को सामने लाया है। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT-Delhi) की रिसर्च में पता चला है कि दिल्ली के कई घरों में किचन सबसे ज्यादा प्रदूषित जगह बन गया है। रिसर्च में अलग-अलग आय वर्ग के घरों की हवा की जांच की गई। इसमें पता चला कि किचन के अंदर PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक प्रदूषण वाले कण तय मानकों से कई गुना ज्यादा मौजूद थे।

खाना बनाते समय सबसे ज्यादा प्रदूषण

स्टडी में पाया गया कि खाना बनाते समय प्रदूषण अचानक बहुत बढ़ जाता है। खास तौर पर सुबह और रात में कुकिंग के समय हवा में खतरनाक महीन कण तेजी से फैलते हैं। कई घरों में रसोई का वेंटिलेशन बहुत खराब मिला। लंबे समय तक खाना पकाने और एग्जॉस्ट सिस्टम की कमी ने इस परेशानी को और ज्यादा बढ़ा दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि छोटे और बंद किचन वाले घरों में यह दिक्कत सबसे ज्यादा देखने को मिली।

इनडोर पॉल्यूशन बढ़ने के कारण

स्टडी में यह भी पता चला कि खाना बनाने के साथ साथ घर के रोज के काम भी घर के अंदर प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। घर में अगरबत्ती जलाना, सफाई के वक्त उड़ने वाली धूल और सर्दियों में खिड़कियां बंद रखना हवा को और खराब बना रहा है। हैरानी की बात यह है कि बड़े और अच्छी सुविधाओं वाले घरों में भी प्रदूषण कम नहीं मिला। रिसर्च में पता चला कि कई घरों में हवा में मौजूद बहुत छोटे प्रदूषण वाले कण 70 से 80 % तक थे। ये इतने छोटे होते हैं कि आसानी से सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच जाते हैं।

महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

शोधकर्ताओं के अनुसार महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, क्योंकि ये लोग घर के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं। रिसर्च में पता चला कि PM2.5 जैसे छोटे प्रदूषण वाले कण सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच जाते हैं, जिससे आगे चलकर सांस और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों के मामले में इसे ज्यादा खतरनाक माना गया क्योंकि बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं।

वेंटिलेशन सुधारने की जरूरत

रिसर्च टीम का कहना है कि दिल्ली में लोग अपना ज्यादातर समय घर के अंदर ही बिताते हैं। ऐसे में घर के भीतर की हवा साफ रखना भी बहुत जरूरी है। शोधकर्ताओं ने सरकार से घरों में बेहतर वेंटिलेशन की व्यवस्था करने और कम आय वाले परिवारों के लिए सस्ते समाधान उपलब्ध कराने की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार एग्जॉस्ट सिस्टम और खिड़कियां खुली रखने से घर के अंदर का प्रदूषण काफी कम किया जा सकता है।

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