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भारत, May 30, 2026

तेजी से कम हो रहा बच्चों का वजन, केंद्र सरकार ने जारी की रिपोर्ट, सामने आई बड़ी वजह

केंद्र सरकार की नई हेल्थ रिपोर्ट में कई अच्छी खबरें सामने आई हैं। बच्चों का टीकाकरण और संस्थागत प्रसव बढ़ा है, लेकिन मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां तेजी से बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं।

Child Malnutrition

फैमिली हेल्थ सर्वे-6- कई मानकों पर सकारात्मक सुधार, 6.79 लाख परिवारों के डाटा से बनी रिपोर्ट (जनरेटेड इमेज)

National Family Health Survey: केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की रिपोर्ट जारी कर दी है। इसमें महिला एवं बाल स्वास्थ्य के साथ ही महिलाओं से संबंधित सामाजिक इंडिकेटर्स को लेकर भी आंकड़े सामने आए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार संस्थागत प्रसव से लेकर महिलाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को लेकर कई सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य विशेषकर उनके टीकाकरण का दायरा भी बढ़ा है। वहीं मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन भी बड़ी समस्या के तौर पर उभरे हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश में परिवार नियोजन का उत्तरदायित्व मुख्य रूप से महिलाएं ही निभा रही हैं। यह सर्वेक्षण मई 2023 से अगस्त 2024 के बीच किया गया। जिसमें सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 713 जिलों में 6.79 लाख परिवारों डाटा एकत्र किया गया।

गंभीर दस्त के मामलों में कमी

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देश में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में गंभीर दस्त के मामलों में कमी आई है। इसकी वजह साफ पेजयल की उपलब्धता और टीकाकरण है। देश में अभी पांच वर्ष से कम बच्चों की मृत्यु दर में भी कमी आई है।

केरल का प्रदर्शन बेहतर, बिहार पिछड़ा

फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में केरल ने महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के मानकों पर बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं बिहार इन मानकों में बेहद पिछड़ा है। केरल में 99.7 प्रतिशत प्रसव संस्थागत होते हैं। 88.6 प्रतिशत माताओं की प्रसव पूर्व चार बार जांच कराई जाती है। बिहार में सिर्फ 37.6 प्रतिशत माताओं की ही चार बार जांच होती है। केरल में 12 प्रतिशत महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स से कम वजन जबकि बिहार में 26.3 प्रतिशत महिलाओं का वजन कम पाया गया।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के मुख्य इंडिकेटर्स-

90.6 % - संस्थागत प्रसव।
95.9 % - गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले देखभाल प्राप्त हुई।
69.1 % - गर्भनिरोधक के उपयोग की दर।
87.1 % - बच्चों के टीकाकरण की दर।
89 % - महिलाओं के पास अब बैंक खाता।
63.6% - महिलाओं के पास मोबाइल फोन।
79.2 % - मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ तरीकों का उपयोग बढ़ा।

प्राइवेट अस्पताल में हर दूसरी गर्भवती की ऑपरेशन से डिलीवरी

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रसव के लिए सिजेरियन डिलीवरी की दर अब बढ़कर 27.2 % हो रही है। खासकर निजी अस्पतालों में यह दर 54.1 % है। जबकि सरकारी अस्पतालों में यह दर काफी कम 16.9 % ही है।

हेल्थ इंश्योरेंस या किसी अन्य वित्तीय योजना का कवर- 60.2%, पहले 41 %
कुल फर्टिलिटी रेट- 2.0 %

डायबिटीज की समस्या-

ज्यादा से बहुत ज्यादा(140 से ऊपर और दवा लेने वाले लोग)-
महिलाएं- 17.8 %, पहले- 13.5 %
पुरुष- 20.9% , पहले- 15.6 %

हाइपरटेंशन(15 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को)-

महिला-19.4 %, पहले 21.3 %
पुरुष- 22.1 %, पहले 24 %
ब्लड शुगर- (140 से ज्यादा और दवा लेने वाले लोग)
पुरुष- 20.9 %
महिला- 17.8 %

तंबाकू और शराब का उपभोग (15 साल से ज्यादा उम्र में) तंबाकू-

पुरुष- 36.3 %, पहले 38 %
महिला-8.4 %, पहले 8.9%

शराब-

पुरुष- 18.9 %, पहले 18.7 %
महिला- 1.1 %, पहले 1.3 %

महिलाएं जिनका वजन बीएमआई से कम- 19.7 %
महिलाएं जो ओवरवेट हैं- 30.7 %

राजस्थान-

कितनी आबादी को पीने की पानी की उपलब्धता- 95.2 %, पहले- 96.5%

परिवार नियोजन उपाय-

महिलाओं की नसबंदी- 37.2 %, पहले 42.4 %
पुरुषों की नसबंदी- 0.4 %, पहले 0.2%

बाल स्वास्थ्य-

5 साल से कम उम्र के बच्चे जिनका वजन कम- 33.3 %, पहले 27.6%

मोटापे की शिकार

महिलाएं- 20.3 %, पहले 12.9 %
पुरुष- 19.3 %, पहले 15 %

महिला सशक्तिकरण

महिलाओं के पास मोबाइल फोन- 61.1 %, पहले 50.2 %
निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी- 84.5 %, पहले 87.7%
विवाहित महिलाएं जो पति की हिंसा का शिकार बनीं- 20.8%, पहले 24.1%

मध्य प्रदेश-

कतनी आबादी को पीने की पानी की उपलब्धता- 89 %, पहले 89%

परिवार नियोजन उपाय-

महिलाओं की नसबंदी- 47.8 %, पहले 51.9 %
पुरुषों की नसबंदी- 0.9 %, पहले 0.7 %

बाल स्वास्थ्य-

5 साल से कम उम्र के बच्चे जिनका वजन कम- 39.7 %, पहले 33 %

मोटापे की शिकार

महिलाएं- 20.3 %, पहले 16.6 %
पुरुष- 17.6 %, पहले 15.6%

महिला सशक्तिकरण

महिलाओं के पास मोबाइल फोन- 48.5%, पहले 38.5

निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी- 90.4%, पहले 86 %

विवाहित महिलाएं जो पति की हिंसा का शिकार बनीं- 21.4 %, पहले 28 %

छत्तीसगढ़-

कतनी आबादी को पीने की पानी की उपलब्धता- 98.9 %, पहले 98.8 %

परिवार नियोजन उपाय-

महिलाओं की नसबंदी- 42.4 %, पहले 47.5 %
पुरुषों की नसबंदी- 1.4 %, पहले 0.8 %

बाल स्वास्थ्य-

5 साल से कम उम्र के बच्चे जिनका वजन कम- 34.7 %, पहले 31.3%

मोटापे की शिकार

महिलाएं- 20.3 %, पहले 14.1 %
पुरुष- 16.1%, पहले 15 %

महिला सशक्तिकरण

महिलाओं के पास मोबाइल फोन- 47.8 %, पहले 40.7 %
निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी- 94.4%, पहले 92.7 %
विवाहित महिलाएं जो पति की हिंसा का शिकार बनीं- 16.1 %, पहले 20.1 %

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