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Abbas Ansari: सदन में भावुक हुए अब्बास अंसारी, बोले- चार साल बाद मिला बोलने का मौका

Abbas Ansari UP Assembly: उत्तर प्रदेश विधानसभा में मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी ने डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाते हुए भावुक अपील की। समय समाप्त होने पर उन्होंने 30 सेकंड और मांगे और कहा कि चार साल में पहली बार बोलने का अवसर मिला है, आगे मौका मिलेगा या नहीं, पता नहीं।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 13, 2026

यूपी विधानसभा में अब्बास अंसारी की भावुक अपील (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

यूपी विधानसभा में अब्बास अंसारी की भावुक अपील (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Abbas Ansari Mau Sadar MLA Emotional Appeal in UP Assembly: उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही के दौरान एक ऐसा क्षण आया जब सदन का माहौल कुछ देर के लिए भावुक हो गया। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मऊ सदर सीट से विधायक अब्बास अंसारी ने अपने क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि आगे फिर सदन में बोलने का अवसर मिलेगा या नहीं। दरअसल, चर्चा के दौरान जब उनका निर्धारित समय समाप्त हुआ तो अधिष्ठाता मनोज पांडेय ने उन्हें रोक दिया। इस पर अब्बास अंसारी ने निवेदन करते हुए कहा, “मुझे केवल 30 सेकंड और दे दीजिए। मुझे चार साल में पहली बार बोलने का मौका मिला है। मेरी मजबूरी को समझिए। मेरा तो यह भी नहीं ठिकाना है कि कब तक बोलने का मौका मिलेगा, आप जानते हैं।”

डॉक्टरों की कमी पर उठाया सवाल

अब्बास अंसारी अपने विधानसभा क्षेत्र मऊ सदर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके इलाके में डॉक्टरों की भारी कमी है, विशेष रूप से विशेषज्ञ (स्पेशलिस्ट) डॉक्टरों का अभाव है। उन्होंने सदन को बताया कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक नहीं होने के कारण आम लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज महंगा पड़ता है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को इससे सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

“चार साल में पहली बार मौका”

अपने वक्तव्य के दौरान अब्बास अंसारी का यह कहना कि उन्हें चार साल में पहली बार बोलने का अवसर मिला है, चर्चा का विषय बन गया। उनके इस बयान से यह संकेत मिला कि विपक्षी दलों के कुछ विधायकों को सदन में पर्याप्त समय नहीं मिल पाने की शिकायत है। हालांकि अधिष्ठाता मनोज पांडेय ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा, “आप आगे भी बोलेंगे।” इसके बावजूद अब्बास अंसारी का वक्तव्य सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा में रहा।

स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत

मऊ जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से मुद्दा बनी हुई है। कई पद रिक्त हैं और जो डॉक्टर तैनात हैं, उन पर मरीजों का अत्यधिक दबाव रहता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों,जैसे सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ की अनुपलब्धता के कारण गंभीर मरीजों को वाराणसी या गोरखपुर जैसे बड़े शहरों में रेफर किया जाता है। इससे समय और धन दोनों की हानि होती है। अब्बास अंसारी ने इसी समस्या को रेखांकित करते हुए सरकार से मांग की कि रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए।

राजनीतिक महत्वपूर्ण बयान

अब्बास अंसारी का बयान राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक हैं और प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। सदन में उनका यह कहना कि उन्हें नहीं पता कि आगे बोलने का मौका मिलेगा या नहीं, कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी पर आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके शब्दों ने विपक्ष की सीमित भूमिका और समय आवंटन के प्रश्न को फिर से सामने ला दिया है।

सदन की गरिमा और संवाद

विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच होता है, जहां जनता के प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सरकार के सामने रखते हैं। ऐसे में समय प्रबंधन और सभी सदस्यों को अवसर देना सदन की गरिमा का हिस्सा माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों को भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए, ताकि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सकें।

जनता की अपेक्षाएं

मऊ सदर क्षेत्र के लोगों की अपेक्षा है कि उनके विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सरकार गंभीरता से ध्यान दे। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, डॉक्टरों की नियुक्ति और विशेषज्ञ सुविधाओं की उपलब्धता स्थानीय जनता की प्राथमिक मांग है।
यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार संभव है।