
जैसलमेर शहर की गलियों और मुख्य मार्गों पर स्वच्छंद घूमते पशुओं की वजह से आम नागरिक और पर्यटक दोनों परेशान हैं। जिम्मेदारों की निष्क्रियता से समस्या बढ़ती जा रही है। जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो शहर की पर्यटन छवि और स्वर्णनगरी की साख प्रभावित हो सकती है। मुख्य मार्गों से गुजरने के दौरान सैलानी डर और असुविधा के बीच शहर भ्रमण कर रहे हैं। इन दिनों स्वर्णनगरी आने वाले पर्यटकों को सड़क पर चलते पशुओं से बचते हुए निकलते हुए देखा जा सकता हैं। कई बार पर्यटक अपने बच्चों के साथ रास्ता बदलने को मजबूर भी हो जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ‘पशुराज’ की समस्या लंबे समय तक बनी रही, तो जैसलमेर की स्वर्णनगरी की पहचान और पर्यटन पर नकारात्मक असर पड़ेगा। व्यापारिक प्रतिष्ठान भी आर्थिक नुकसान झेल सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियां
मुख्य और आम रास्तों पर पशुओं के स्वच्छंद विचरण से स्कूल जाने वाले बच्चे, ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और दुकानदार सभी असुविधा झेल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वजह से समय की हानि हो रही है, साथ ही हादसे की आशंका के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
-मुख्य सड़क और पैदल मार्गों पर चेतावनी बोर्ड, रोकथाम उपाय या निगरानी की कमी है, जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
-उनके लिए सुरक्षित शेड व स्थान सुनिश्चित किया जाए।
-सैलानी और नागरिक शिकायतों का त्वरित निवारण।
सामाजिक सरोकार के कार्यों से जुड़े पंकज भाटिया का कहना है कि जैसलमेर की पहचान स्वर्णनगरी और व्यवस्थित पर्यटन से जुड़ी है। अगर खुले पशुराज की समस्या पर त्वरित कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल सैलानियों की सुविधा प्रभावित होगी, बल्कि स्थानीय व्यवसाय और शहर की पर्यटन छवि भी कमजोर पड़ेगी। डिज़िटल मॉनिटरिंग, कंट्रोल ज़ोन और जागरूकताअभियान शुरू करना चाहिए। यदि गोपा चौक व सदर बाजार के मध्य और गोपा चौक - शिव रोड मार्ग पर यदि काऊ कैचर लगाए जाएं तो मुख्य मार्गों पर आवागमन आम जन के लिए सुगम हो सकेगा।
Published on:
10 Feb 2026 11:17 pm
