
जयपुर. इस रविवार छुट्टी के साथ महाशिवरात्रि का त्योहार है। परिवार को और शहर को महसूस करने का दिन होता है। शहर के 50 किलोमीटर के दायरे में ऐसे शिव मंदिर है, जहां आप परिवार के साथ जा सकते हैं। इन ऐतिहासिक मंदिरों का एक लंबा इतिहास भी रहा है, जहां देश-प्रदेश से लोग आते हैं। शिवरात्रि पर इन मंदिरों में मेला भी भरता है।
प्राकृतिक वादियों के बीच जगतपुरा खोह नागोरियान स्थित पहाड़ी पर भगवान केदारनाथ मंदिर लोगों के लिए आस्था का केन्द्र बना हुआ है। करीब 1000 साल से भी अधिक प्राचीन इस मंदिर को लोग 'मिनी केदारनाथ मंदिर' के नाम से जानने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि शिवजी की स्थापना 1102 ईस्वी में चांदा मीनाओं की ओर से करवाई गई। यहां शिवलिंग, माता पार्वती और नंदी की प्रतिमाएं स्थापित है। मंदिर में अब बड़ी संख्या में भगवान केदारनाथ के दर्शनों के लिए अलसुबह से पहुंच जाते हैं। पहाड़ी के उबड़—खाबड़ रास्ते से होकर लोग मंदिर पहुंचते हैं। यहां अब पानी की लाइन और बिजली की व्यवस्था भी हो चुकी है। शिवरात्रि पर यहां रात को सत्संग और भजन होता है।
जयपुर के बांसखोह स्थित नईनाथ धाम महादेव मंदिर में श्रद्धा, परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है। 400 वर्ष पुराने इस धाम में वर्ष में दो बार लक्खी मेले का आयोजन होता है, जिसमें महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। मंदिर में शिवजी का विशेष श्रृंगार होता है, लोग नई फसल के रूप में गाजर, गेहूं की बाली और बैर अर्पित करते हैं। जयपुर से यह धाम करीब 42 किलोमीटर दूर है। यह कानोता से 26 किलोमीटर, बस्सी चक से 15 किलोमीटर, बांसखोह फाटक से 7 किलोमीटर की दूरी पर है। जयपुर-आगरा रोड से बांसखोह फाटक होते हुए बांसखोह कस्बे के मार्ग से यहां पहुंचा जा सकता है। शिवरात्रि पर गणेश मोड़ पर करीब 2 किलोमीटर पहले ही वाहनों को रोक दिया है। सुरक्षा को लेकर यहां 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाते हैं। यहां 24 से अधिक धर्मशालाएं है, जहां लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। अन्य दिनों में यहां सामूहिक आयोजन होते हैं।
अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित प्राचीन महारकलां का मालेश्वरनाथ लोगों के लिए आस्था के केन्द्र बना हुआ है। महाशिवरात्रि पर मंदिर में हजारों भक्त पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी महेश व्यास के अनुसार मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग सूर्य की गति के अनुरूप घूमता है। सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने के साथ शिवलिंग की दिशा में परिवर्तन देखा जा सकता है, जिसे श्रद्धालु सहज रूप से अनुभव करते हैं। यही विशेषता इस प्राचीन मंदिर को क्षेत्र में आस्था का अनूठा केंद्र बनाती है। यह मंदिर चौमूं के पास स्थित है। महाशिवरात्रि पर्व पर सुबह 4:15 बजे मंगला आरती के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।
Published on:
15 Feb 2026 12:09 pm
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