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Autoimmune Disease: दवा खाकर भी नहीं मिल रहा आराम? कहीं आप भी तो नहीं जूझ रहे ऑटोइम्यून डिजीज से? जानिए लक्षण, कारण और इलाज

Autoimmune Disease: ऑटोइम्यून डिजीज क्या होती हैं? जानिए इनके लक्षण, कारण, शरीर पर असर और इलाज के तरीके। हेल्थ के नजरिए से पूरी जानकारी।

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भारत

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Dimple Yadav

Feb 02, 2026

Autoimmune Disease

Autoimmune Disease (photo- gemini ai)

Autoimmune Disease: इम्यून सिस्टम हमारे शरीर का सुरक्षा तंत्र होता है। जब कोई वायरस, बैक्टीरिया या हानिकारक कीटाणु शरीर में प्रवेश करते हैं, तो यही सिस्टम उन्हें पहचानकर नष्ट करता है। व्हाइट ब्लड सेल्स, एंटीबॉडी और दूसरे इम्यून सेल्स मिलकर हमें संक्रमण और बीमारियों से बचाते हैं। सामान्य हालात में इम्यून सिस्टम सिर्फ बाहरी दुश्मनों पर ही हमला करता है।

जब इम्यून सिस्टम खुद शरीर के खिलाफ हो जाए

कभी-कभी इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी हो जाती है। ऐसी स्थिति में यह बाहरी कीटाणुओं और शरीर की हेल्दी कोशिकाओं में फर्क नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि इम्यून सिस्टम अपने ही अंगों, टिश्यूज और सेल्स पर हमला करने लगता है। इसी स्थिति को ऑटोइम्यून डिजीज कहा जाता है। यह एक गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम है, जो लंबे समय तक शरीर को प्रभावित करती है।

ऑटोइम्यून डिजीज कितनी खतरनाक होती हैं?

क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार ऑटोइम्यून डिजीज क्रॉनिक यानी लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां होती हैं। इनमें शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन, दर्द और धीरे-धीरे कार्यक्षमता में कमी आने लगती है। चूंकि इम्यून सिस्टम लगातार एक्टिव रहता है, इसलिए मरीज को बार-बार हेल्थ फ्लेयर-अप्स का सामना करना पड़ता है।

शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित करती हैं ऑटोइम्यून बीमारियां

ऑटोइम्यून डिजीज शरीर के लगभग हर सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

जोड़ और मांसपेशियां: रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ल्यूपस

त्वचा और ब्लड वेसल्स: सोरायसिस, विटिलिगो, स्क्लेरोडर्मा

पाचन तंत्र: क्रोन्स डिजीज, सीलिएक डिजीज, अल्सरेटिव कोलाइटिस

हार्मोन सिस्टम: टाइप-1 डायबिटीज, थायरॉयड डिसऑर्डर

नर्वस सिस्टम: मल्टीपल स्क्लेरोसिस

हर बीमारी शरीर के अलग हिस्से को प्रभावित करती है, लेकिन जड़ समस्या इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी ही होती है।

ऑटोइम्यून डिजीज के आम लक्षण

ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस तरह हैं:

लंबे समय तक थकान रहना

जोड़ों में दर्द और सूजन

त्वचा पर लाल चकत्ते या रैश

मांसपेशियों में कमजोरी

पेट से जुड़ी समस्याएं

बार-बार बीमार पड़ना

इन बीमारियों में लक्षण कभी तेज हो जाते हैं और कभी अपने आप कम हो जाते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में फ्लेयर और रेमिशन कहा जाता है।

ऑटोइम्यून डिजीज क्यों होती हैं?

इन बीमारियों का कोई एक निश्चित कारण अभी तक सामने नहीं आया है। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे जेनेटिक फैक्टर, वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन, हार्मोनल बदलाव, पर्यावरण और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण हो सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक महिलाओं में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा पुरुषों से ज्यादा होता है। जिन परिवारों में पहले से ऐसी बीमारी रही हो, वहां अगली पीढ़ी में रिस्क बढ़ जाता है।

क्या ऑटोइम्यून डिजीज से बचाव संभव है?

चूंकि इन बीमारियों का कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए इनसे पूरी तरह बचाव करना मुश्किल है। हालांकि हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, स्मोकिंग से दूरी, स्ट्रेस कंट्रोल और नियमित हेल्थ चेकअप मददगार साबित हो सकते हैं। एक ऑटोइम्यून बीमारी होने पर दूसरी बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है, जिसे मल्टीपल ऑटोइम्यून सिंड्रोम कहा जाता है।

इलाज और मैनेजमेंट कैसे किया जाता है?

ऑटोइम्यून डिजीज का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही इलाज से लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। डॉक्टर दर्द और सूजन कम करने की दवाएं, इम्यून सिस्टम को कंट्रोल करने वाली मेडिसिन और जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। कुछ बीमारियों में खास इलाज जरूरी होता है, जैसे टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन और सीलिएक डिजीज में ग्लूटेन-फ्री डाइट।

सही मैनेजमेंट से बेहतर जीवन संभव

ऑटोइम्यून डिजीज जीवनभर रहने वाली बीमारियां हो सकती हैं, लेकिन समय पर पहचान, नियमित इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से मरीज लंबे समय तक नॉर्मल और एक्टिव जीवन जी सकता है। जागरूकता, डॉक्टर से लगातार संपर्क और खुद की सेहत पर ध्यान देना ही सबसे बड़ा इलाज है।

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