
Rare Diseases (photo- gemini ai)
Rare Diseases: भारत में जब बीमारियों की बात होती है, तो ज्यादातर चर्चा कैंसर, डायबिटीज या हार्ट डिजीज पर होती है। लेकिन देश में ऐसी कई Rare Diseases (दुर्लभ बीमारियां) हैं, जिनसे जूझ रहे मरीज और उनके परिवार अक्सर चुपचाप संघर्ष करते रहते हैं। इलाज महंगा, दवाएं विदेश से मंगानी पड़ती हैं और जानकारी की भी कमी होती है।
Budget 2026 में सरकार ने ऐसे मरीजों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि 7 और Rare Diseases को कस्टम ड्यूटी छूट के दायरे में लाया जाएगा। अब इन बीमारियों के लिए जरूरी दवाएं, मेडिकल फूड और थैरेपी बिना बेसिक कस्टम ड्यूटी के व्यक्तिगत रूप से इम्पोर्ट की जा सकेंगी।
Rare Diseases वे बीमारियां होती हैं जो बहुत कम लोगों में पाई जाती हैं, लेकिन इनका असर बेहद गंभीर होता है। इनका इलाज लंबा, जटिल और बेहद महंगा होता है। कई मामलों में इलाज पूरी तरह विदेश से आने वाली दवाओं पर निर्भर करता है।
National Policy for Rare Diseases (NPRD) के तहत जिन बीमारियों को चिन्हित किया गया है, उनमें शामिल हैं:
इन बीमारियों से जूझ रहे परिवारों को सबसे बड़ी परेशानी इलाज का खर्च होता है। कई दवाएं सालाना करोड़ों रुपये तक की होती हैं। भारत में इन दवाओं का निर्माण सीमित है, इसलिए मरीज Imported Drugs पर निर्भर रहते हैं। कस्टम ड्यूटी, टैक्स और सप्लाई की दिक्कतें इलाज को और मुश्किल बना देती हैं।
भारत में कुछ बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में Rare Diseases का इलाज शुरू हो चुका है। AIIMS, PGI, और कुछ मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स में Genetic Testing, Enzyme Replacement Therapy, Supportive Care और Symptom Management उपलब्ध है। सरकार National Policy for Rare Diseases के तहत आर्थिक सहायता और इलाज के विकल्प बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
कस्टम ड्यूटी हटने से दवाएं सस्ती होंगी, इलाज तक पहुंच आसान होगी और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम पड़ेगा। यह कदम दिखाता है कि सरकार अब सिर्फ आम बीमारियों पर नहीं, बल्कि कम दिखने वाली लेकिन गंभीर बीमारियों पर भी ध्यान दे रही है।
Updated on:
02 Feb 2026 02:30 pm
Published on:
02 Feb 2026 02:26 pm

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