
6,961 मीटर पीक पर चढ़ाई करने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय के साथ सबसे कम समय में इस शिखर को छूने वाले पहले भारतीय भी बने
माउंट अकोंकागुआ 6,961 मीटर (22,838 फीट) की ऊंचाई के साथ दक्षिण अमेरिका की एंडीज पर्वतमाला में स्थित, हिमालय के बाहर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है। यह अर्जेंटीना में स्थित है, जो पश्चिमी और दक्षिणी गोलार्ध का सर्वोच्च बिंदु भी है। इसे 'सेवन समिट्स' में से एक माना जाता है। आम आदमी के लिए वहां तक पहुंच पाना सहज कार्य नहीं है, हालांकि पर्वतारोहियों के लिए ये एक खास जगह है। ग्वालियर के 59 वर्षीय उद्यमी अतुल लड्ढ़ा ने न सिर्फ 7 दिन में ये तकनीकी और कठिन चढ़ाई पूरी की बल्कि इस चोटी के पीक पर पहुंचकर तिरंगा भी लहरा दिया। अतुल अकोंकागुआ पर चढऩे वाले सबसे उम्रदराज भारतीय बने हैं और साथ ही सबसे कम समय (सात दिन) में यह अभियान पूरा करने वाले पहले भारतीय भी हैं। इस जटिल चढ़ाई को अतुल ने अपनी दिवंगत माताजी मनोरमा लड्ढा को समर्पित किया है।
ऐसे की शुरुआत
अतुल बताते हैं कि इसके लिए सबसे पहले तीन फ्लाइट बदलकर 40 घंटे में अमेरिका के मेंडोजा शहर पहुंचा। मेंडोजा से हेलीकॉप्टर लेकर 4200 मीटर ऊंचाई पर बेस कैंप में उतरे। यहां से ट्रेकिंग शुरू की और 5000 मीटर पर रूके। यहां से 5500 मीटर ऊंचाई पर पहुंचने के बाद दो रात गुजारी। फिर 6000 मीटर पर पहुंचा और सुबह 4.50 बजे ट्रेकिंग शुरू की। यहां से माउंट अकोंकागुआ पर आने-जाने में 17 घंटे का समय लगा।
माइनस 20 से 30 डिग्री तापमान में लक्ष्य पूरा किया
अतुल लड्ढा का कहना है कि माउंट अकोंकागुआ चोटी का मौसम अप्रत्याशित है। यहां ऑक्सीजन की काफी कमी होती है, यहां पूरे सातों दिन टैंट में सोना पड़ता है। इसके साथ ही यहां तापमान भी माइनस 20 से 30 डिग्री का रहता है। यहां लगातार 40 से 50 किलोमीटर की गति से हवाएं भी चलती हैं। मौसम कभी भी तेजी से बदलता रहता है। इसके लिए दो साल से फिजिकल तैयारी भी करनी पड़ी थी। अपने अगले लक्ष्य के बारे में उनका कहना है कि इसके बाद अब थोड़ा ब्रेक लेकर मैं हिमालय रेंज में ही 8000 मीटर की चोटी पर जाऊंगा।
अभी तक ये भी कर चुके अतुल
2024 में, अतुल लढ्ढा ने पर्वतारोहण की शुरुआत एवरेस्ट बेस कैंप (5364 मीटर) से की, जिसके बाद उन्होंने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो (5895 मीटर) पर चढ़ाई की। तत्पश्चात उन्होंने नेपाल की लांगटांग वैली स्थित अर्ध-तकनीकी चोटी याला पीक (5600 मीटर) को फतह किया, जिससे उन्हें पर्वतारोहण का एक अलग स्तर अनुभव करने का अवसर मिला। इसके साथ वे हिमालय के ह्दय आइलैंड पीक क्लाइम्बिंग (6165) मीटर पर की ऊंचाई पर भी पहुंच चुके हैं।
Published on:
04 Feb 2026 11:26 am
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