
नियमों को ठेंगा दिखाते हुए ग्वालियर व्यापार मेला में झूले पर झुलते सैलानी।
ग्वालियर व्यापार मेले में मनोरंजन के नाम पर सुरक्षा से किया जा रहा खुला खिलवाड़
ग्वालियर व्यापार मेले में मनोरंजन के नाम पर सुरक्षा से खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर आप मेला घूमने जा रहे हैं तो अपनी सुरक्षा का इंतजाम खुद रखें, क्योंकि झूला सेक्टर में फायर सेफ्टी से लेकर फस्र्टएड तक का नामोनिशान नहीं है। हरियाणा के सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में शनिवार को हुए भयानक झूला हादसे (जहां झूला टूटने से एक पुलिस अधिकारी की मौत हुई और 13 घायल) के बाद जब रविवार को पत्रिका की टीम ने ग्वालियर मेले के झूला सेक्टर की पड़ताल की, तो सामने चौंकाने वाला सच आया। मेले में लगे करीब 50 झूले में से किसी भी झूले वाले के पास में सुरक्षा इंतजाम के नाम पर कुछ भी नहीं था। यहां फायर सेफ्टी के छोटे सिलेंडर तक मौजूद नहीं थे। यही नहीं यदि कोई झूलते वक्त चोटिल होता है तो तत्काल राहत देने के लिए फस्र्टएड तक का इंतजाम नहीं था। बीमा व सेफ्टी सर्टिफिकेट भी केवल दिखावे के हैं।
सुरक्षा इंतजाम शून्य
किसी भी झूला संचालक के पास फायर सेफ्टी सिलेंडर तक मौजूद नहीं थे। झूलते वक्त अगर कोई घायल हो जाए, तो तत्काल राहत देने के लिए फस्र्टएड तक का इंतजाम नहीं। बीमा और सेफ्टी सर्टिफिकेट भी सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं, क्योंकि इनमें झूलों में उपयोग होने वाली मशीनों का स्पष्ट और तकनीकी विवरण ही दर्ज नहीं है।
सेफ्टी सर्टिफिकेट पर भी सवाल
पीडब्ल्यूडी की ओर से जारी सेफ्टी सर्टिफिकेट में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि झूला संचालन में कौन-सी मशीन, कितनी क्षमता और कितनी बिजली खपत के साथ उपयोग की जा रही है। इसका फायदा उठाते हुए किसी झूले पर 1, 2, 3 तो कहीं 5 किलोवाट तक का कनेक्शन ले लिया गया है। बिजली खपत का भुगतान भी फिक्स दर पर किया जा रहा है, जिससे नियमों की खुली अनदेखी सामने आती है।
झूला सेक्टर में ये है प्रमुख सुरक्षा खामियां
दूरी का अभाव: नियमानुसार दो झूलों के बीच 10 से 15 फीट की जगह छोड़ी जानी चाहिए, लेकिन वे एक-दूसरे से सटाकर लगाए गए हैं।
अतिक्रमण: झूला क्षेत्र की सडक़ों पर स्टॉल और टिकट काउंटर का अवैध कब्जा है, जिससे एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का प्रवेश मुश्किल है।
क्षमता से अधिक भीड : प्रतिदिन हजारों सैलानियों के आने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
सुरक्षा गियर की कमी: कुछ झूलों पर सुरक्षा सीट बेल्ट या ग्रिप की कमी के कारण पूर्व में भी दुर्घटनाएं भी हुई हैं।
विद्युत सुरक्षा: बिजली के तारों की व्यवस्था भी ठोस नहीं है, जो किसी बड़े खतरे का संकेत है।
संभाग आयुक्त के निर्देश हवा में
20 नवंबर 2025 को संभाग आयुक्त मनोज खत्री ने मेला अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, कार्यपालन यंत्री ईएंडएम, मेला सचिव को झूला संचालकों के साथ बैठक कर सख्त निर्देश दिए और झूलों के बीच गैप, सुरक्षित बिजली, ऑडिट, जांच टीम गठित की और समन्वय अल्ताफ रजा को सौंपा गया। इस दौरान कहा गया था कि सुरक्षा में कोई समझौता नहीं, कमी पर एफआईआर और कठोर कार्रवाई होगी, लेकिन अफसर जांच करने भी नहीं गए। अफसर दावा कर रहे हैं कि दो-तीन जांच बार जांच हुई और मेले में टीम तैनात है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है।
नट-बोल्ट ढीले, तार खुले
जांच में सामने आया कि कई झूलों की वेल्डिंग कमजोर है, कई जगह नट-बोल्ट ढीले हैं और झूला सेक्टर में बिजली के तार खुले पड़े हैं। इसके बावजूद संचालक बिना किसी डर के झूलों को फुल स्पीड में चला रहे हैं और सवारियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
झूले में ये भी है कामियां
कई झूलों की बेल्डिग निकली हुई है तो कई जगहों पर कमजोर है, कुछ झूले की बॉडी तो बिल्कुल कमजोर होने के साथ उसके नट-बोल्ट भी लूज है। झूले सेक्टर व झूले के आसपास बिजली के तार भी जगह-जगह खुले पड़े हुए है। इन सबके बाद भी झूला संचालक इनमें धड़ल्ले से लोगों को बैठा रहे है और नियमों को ठेंगे पर रखकर धड़ल्ले से फूल स्पीड से इन्हें चला रहे है।
मैं अभी खुद मेले में घूम रहा हूं। हम दो से तीन बार मेले का निरीक्षण भी कर चुके हैं और विद्युत,झूले सहित टीमें भी मेले में तैनात है। यदि कोई कमी है तो उसे तत्काल दूर किया जा रहा है।
सुनील कुमार जाटव,कार्यपालन यंत्री ईएंडएम
झूला संचालन में सुरक्षा सर्वोपरि है। झूले को कभी भी उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक ओवरलोड नहीं करना चाहिए, केवल उतनी ही सवारियां बैठाई जाएं, जितनी डिजाइन के अनुसार अनुमति हो। संचालक को झूले के निर्माता द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा नियमों, गति सीमा और संचालन प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना चाहिए। पर्यटकों/सैलानियों को भी केवल पूर्णतः सुरक्षित, नियमों का पालन करने वाले झूलों में ही सवारी करनी चाहिए तथा सेफ्टी बेल्ट, हैंडल और अन्य सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य उपयोग करना चाहिए। झूला रखरखाव टीम को नियमित अंतराल पर मैकेनिकल, स्ट्रक्चरल, वेल्डिंग, केबल, बेयरिंग और ब्रेकिंग सिस्टम की गुणवत्ता जांच करनी चाहिए। किसी भी दोष या घिसावट पर तत्काल मरम्मत करनी अनिवार्य है। इन सावधानियों का पालन करके दुर्घटनाओं और जनहानि को रोका जा सकता है।
प्रो. मनीष सागर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, एमआईटीएस
Published on:
09 Feb 2026 12:28 pm
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