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ग्रेटर नोएडा, May 30, 2026

लखनऊ प्रोजेक्ट को मिले दावेदार, कानूनी उलझनें बरकरार, सबसे बड़ा सवाल क्या अब पूरा हो पाएगा प्रोजेक्ट?

लखनऊ के गोमती नगर स्थित रोहतास प्लूमेरिया प्रोजेक्ट के इनसॉल्वेंसी मामले (CIRP) में नया मोड़ आया है। एलजेके कंस्ट्रक्शन और हलवासिया ग्रुप जैसी कई बड़ी कंपनियों ने इस अटके हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दिलचस्पी दिखाई है, जिससे सालों से घर का इंतजार कर रहे होमबायर्स के बीच एक नई उम्मीद जगी है।

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गोमती नगर स्थित रोहतास प्लूमेरिया प्रोजेक्ट के डेवलपर एंडीज टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। कई सालों से अटके इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए अब कई कंपनियां सामने आई हैं। सबसे ज्यादा उम्मीद उन होमबायर्स की है जो लंबे समय से अपने घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

मार्च 2023 में इस कंपनी को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत CIRP में भेजा गया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि मामला तय समय में सुलझ जाएगा, लेकिन कर्जदाताओं से जुड़े मामलों, कानूनी विवादों और प्रशासनिक बदलावों की वजह से प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई।

प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन और रियल एस्टेट मामलों ने भी मुश्किलें बढ़ाई हैं। डेवलपमेंट राइट्स, तीसरे पक्ष की भूमिका और कुछ हिस्सों से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट को लेकर सवाल बने हुए हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जमीन और मालिकाना हक से जुड़े मामले साफ नहीं होते, तो रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होने के बाद भी काम में देरी हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में एलजेके कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और हलवासिया ग्रुप समेत कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। हालांकि बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि फैसला सिर्फ बड़ी बोली पर नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि कौन सी कंपनी प्रोजेक्ट को पूरा करने की क्षमता रखती है, फंड की व्यवस्था कर सकती है, कानूनी चुनौतियों को संभाल सकती है और रुका हुआ निर्माण फिर से शुरू कर सकती है।

मामले को और जटिल बनाने वाली बात यह भी है कि सार्वजनिक रिपोर्ट्स के अनुसार एलजेके कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी कुछ संपत्तियों पर अलग मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई हुई है। वहीं हलवासिया ग्रुप से जुड़े अनंता टॉवर प्रोजेक्ट की कुछ संपत्तियों पर टैक्स अधिकारियों द्वारा अटैचमेंट की कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं। अनंता टॉवर प्रोजेक्ट में डेवलपमेंट एक्टिविटी, कॉन्ट्रैक्ट और पैसों के लेनदेन को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिनका संबंध एंडीज टाउन प्लानर्स से बताया गया है। इन मामलों का मौजूदा इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी कानूनी और नियामकीय फैसलों पर निर्भर करेगा।

ऐसे माहौल में कर्जदाता और दूसरे पक्ष सिर्फ ऊंची बोली नहीं देख रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या एलजेके कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और हलवासिया ग्रुप समेत सभी दावेदारों के पास इतना मजबूत वित्तीय आधार, अनुभव और काम संभालने की क्षमता है कि वे इतने लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट को पूरा कर सकें।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे फंसे हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए सिर्फ पैसा काफी नहीं होता। जरूरी है कि कंपनी के पास पहले बड़े प्रोजेक्ट पूरे करने का अनुभव हो, नियमों का पालन करने का रिकॉर्ड हो और कानूनी व कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी मुश्किलों को संभालने की क्षमता भी हो। उनका मानना है कि रिजॉल्यूशन प्लान का मूल्यांकन करते समय सिर्फ बोली की रकम नहीं, बल्कि कंपनी का पुराना रिकॉर्ड, फंडिंग की स्थिति और जमीन पर काम पूरा करने की असली क्षमता भी देखी जानी चाहिए।

होमबायर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है — क्या चुनी गई कंपनी वास्तव में प्रोजेक्ट पूरा कर पाएगी?

ऐसे फंसे हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होना सिर्फ शुरुआत माना जाता है। असली चुनौती होती है पैसा जुटाना, विवाद सुलझाना, सरकारी मंजूरियां लेना, निर्माण दोबारा शुरू करना और तय समय में लोगों को घर देना। कई सालों से इंतजार कर रहे खरीदारों के लिए कागजों पर समाधान से ज्यादा जरूरी है कि काम जमीन पर दिखाई दे।

अब जब CIRP अपने आखिरी चरण में पहुंच रही है, सभी की नजर इस बात पर है कि क्या इस प्रक्रिया से ऐसा प्लान सामने आएगा जो सच में लागू हो सके, या फिर यह मामला एक बार फिर देरी के चक्र में फंस जाएगा।

आने वाले महीने सिर्फ एंडीज टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड का भविष्य तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि लंबे समय से घर का इंतजार कर रहे खरीदारों को आखिरकार उनका घर मिल पाएगा या नहीं। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल शायद यह नहीं है कि बोली कौन जीतता है, बल्कि यह है कि आखिर जमीन पर काम पूरा कौन कर पाएगा।

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