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रातों की उड़ी नींद… एसडीएम ने सरकारी आवास छोड़ा

– गिरने के कगार पर जर्जर आवास, नगर पालिका के अतिथि गृह में ली शरण – पीडब्ल्यूडी को लिखा पत्र, मरम्मत नहीं होने से सरकारी आवासों की हालत खस्ता dholpur, राजाखेड़ा. घटिया निर्माण… देखरेख के साथ मरम्मत बजट के अभाव में उपखंड के शीर्ष अधिकारी का आवास ढहने के कगार पर है। ऐसे में किसी […]

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रातों की उड़ी नींद... एसडीएम ने सरकारी आवास छोड़ा Sleepless nights... SDM leaves government residence

- गिरने के कगार पर जर्जर आवास, नगर पालिका के अतिथि गृह में ली शरण

- पीडब्ल्यूडी को लिखा पत्र, मरम्मत नहीं होने से सरकारी आवासों की हालत खस्ता

dholpur, राजाखेड़ा. घटिया निर्माण... देखरेख के साथ मरम्मत बजट के अभाव में उपखंड के शीर्ष अधिकारी का आवास ढहने के कगार पर है। ऐसे में किसी भी आकस्मिक दुर्घटना से जीवन को बचाने राजाखेड़ा उपखंड अधिकारी (एसडीएम) ने सरकारी आवास को छोडऩा ही मुनासिब समझा, आवास छोडऩे के बाद अब उन्होंने नगर पालिका के अतिथि गृह में शरण ली है। खास बात ये है कि तहसीलदार आवास भी खस्ता है। वहां अभी अधिकारी रहने से बच रहे हैं।

उपखण्डाधिकारी निवास के जर्जर हालात में यहां डर की वजह से नींद तक उड़ जाती है। आवास तहसील परिसर में ही स्थित है, जहां बंदरों का भारी आतंक है। दिन भर बंदरों के टोले परिसर में जमकर उत्पात मचाते रहते हैं। जर्जर भवन में इनका उत्पात डरावना लगता है। जो कभी भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। चिंताजनक यह है कि परिसर काफी बड़ा है और महिला अधिकारी का अकेले निवास खतरों भरा भी रहता है।

एक फीट तक धसा फर्श

आवास निर्माण में मानकों का कहीं भी ध्यान नहीं रखा गया है। जिसमें कहीं पानी ने रास्ता बना लिया है तो फर्श एक फीट तक धस गया है और उससे दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें डर पैदा कर रही हैं। रसोई घर की दीवार तो धराशायी होने को आतुर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। फर्श की टाइल्स को दखेकर ऐसा लगता है कि बिना सीमेंट के ही रख दी गई हैं, जिनपर चलने में भी डर लगता है। बेड रूम्स में से खुदा हुआ प्लास्टर कब गिर जाए पता नहीं चलता। ऐसे में ये भवन कभी भी जानलेवा हो सकता है।

आम आदमी को घर के लिए पट्टा...

चम्बल की बाढ़ से खराब हुए आवास धारकों को उपखंड में बड़ी संख्या में घर के पट्टे उपखंड प्रशासन ने बांटे हैं, लेकिन उपखण्डाधिकारी स्वयं अपने लिए सुरक्षित चहारदीवारी वाले घर से महरूम हैं जो सरकारी नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। बजट के अभाव में जब अधिकारियों के आवास तक कि मरम्मत नहीं हो पा रही तो आम जर्जर भवनों के क्या हालात होंगे। यह स्वयं ही समझा जा सकता है। उपखंड मुख्यालय पर सार्वजनिक निर्माण विभाग का खंड कार्यलय स्थित है जहां अभियंताओं की बड़ी टीम कार्यरत है। जिसका करोड़ों रुपए वेतन बिल उठता है। उसके बाद भी भवनों का देखरेख के अभाव में जर्जर होना इस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर रहा है। लोगों मे इसकी कार्यप्रणाली को लेकर भी भारी नाराजगी है।

आवास का भवन बेहद खतरनाक हालात में है जो कभी भी धराशायी हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक निर्माण विभाग इसकी मरम्मत नहीं करवा पा रहा है। मैंने जिला कलक्टर को इस संबंध अवगत करवाया है और जान पर खतरे को देखते हुए हाल फिलहाल नगर पालिका के अतिथिगृह में अस्थाई रूप से निवास कर रही हूं।

-सुशीला मीना, उपखण्डाधिकारी राजाखेड़ा