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33 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ नवीन धौलपुर सेशन कोर्ट

-पीएचइडी चंबल से नवीन भवन तक डालेगा पाइप लाइन -80 प्रतिशत भवन तैयार, लेकिन पानी, अधिवक्ता चैम्बर सबसे बड़ी समस्या -पहला ऐसा कोर्ट जहां एडवांस फायर सिस्टम के साथ होगा वातानुकूलित धौलपुर. 33 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ राज्य का पहला हाइटेक सेशन कोर्ट में अभी तक पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई […]

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33 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ नवीन धौलपुर सेशन कोर्ट The new Dholpur Sessions Court was completed at a cost of Rs 33 crore

-पीएचइडी चंबल से नवीन भवन तक डालेगा पाइप लाइन

-80 प्रतिशत भवन तैयार, लेकिन पानी, अधिवक्ता चैम्बर सबसे बड़ी समस्या

-पहला ऐसा कोर्ट जहां एडवांस फायर सिस्टम के साथ होगा वातानुकूलित

धौलपुर. 33 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ राज्य का पहला हाइटेक सेशन कोर्ट में अभी तक पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। दो बार कराए बोर फेल होने के बाद अब जिम्मा पीएचडी को सौंपा गया है। पीएचइडी अब सीधे चम्बल से नवीन कोर्ट तक पेयजल पानी लिफ्ट कर पाइपलाइन बिछाएगा और अधिवक्ताओं की प्यास चम्बल के पानी से बुझाएगा, जिसके लिए ७० लाख की डिमांड भेजी गई है।

13 बीघा में फैला वातानकूलित, एडवांस फायर सेफ्टी सिस्टम से सुसज्जित राज्य का पहला धौलपुर सेशन कोर्ट का निर्माण 80 फीसदी हो चुका है। जिसका निर्माण 2018 से चल रहा था, लेकिन अभी तक कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के चैम्बरों का निर्माण नहीं हो पाया है, हालांकि 3 करोड़ की लागत से बार भवन और टीन शेडों का निर्माण कराया गया है, हालांकि अभी सबसे बड़ी समस्या पानी को लेकर आ रही है। जिसको लेकर परिषर में दो बार बोर खनन किया गया, लेकिन इलाका पथरीला होने के कारण दोनों बार ही बोर फेल हो गए। जिसके बाद अब पीएचइडी को नवीन कोर्ट तक पानी पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया है। जिसका इस्टीमेंट बनाकर विभाग को सौंप दिया गया है, अब पीएचइडी चंबल से कोर्ट तक लगभग पांच से छह किलोमीटर की पाइप लाइन बिछाएगा। पानी को संग्रह करने के लिए कोर्ट में एक लाख लीटर का टैंक भी बना हुआ है। हालांकि अभी डिमांड राशि स्वीकृत नहीं होने के कारण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।

कृत्रिम बारिश बुझाएगी आग

धौलपुर सेशन कोर्ट राज्य का पहला ऐसा कोर्ट होगा जो पूर्ण रूप से वातानुकूलित होगा। यानी आप कोर्ट के जिस हिस्से में जाएंगे अपने आप को तरो जाता पाएंगे। इसके अलावा कोर्ट परिषर में एडवांस फायर सेफ्टी सिस्टम भी लगाया गया है। आगजनी होने जैसी स्थिति में जैसे ही धुआं सिस्टम के संपर्क में आएगा...कृत्रिम बारिश आग को शांत कर देगी जिससे बड़ा हादसा होने से बचा जाएगा। जानकारी के अनुसार राज्य के किसी भी सेशन कोर्ट में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा कोर्ट भवन में ऑनलाइन पेशी और गवाही के लिए की अलग सुविधा रखी गई है, जिसके लिए एक रूम भी तैयार किया गया है।

‘चौमुखी’ नवीन सेशन कोर्ट भवन

नवीन कोर्ट भवन की खासियत की बात की जाए तो यह भवन ‘चौमुखी’ है। जिसके एक तरफ न्यायाधीशों सहित अधिकारियों का आवागमन होगा तो दूसरी तरफ अधिवक्ताओं का प्रवेश द्वार, तो तीसरी ओर से आम जनता की एंट्री होगी वहीं चौथी तरफ से पेशी पर आए मुल्जिमों को लाया-लेजाया जाएगा। कोर्ट परिसर अलग-अलग सुनवाई हॉल, दो बड़े हॉल, कैन्टीन, लाइब्रेरी, मनोरंजन हॉल जहां अधिकारी सहित अधिवक्ता टीवी का लुत्फ लेकर अपने आप को फे्रस कर सकेंगे। तो आमजन से लेकर खास तक के लिए खान-पान और बैठने के लिए हॉल, इसके अलावा महिला अधिकारियों और अधिवक्ताओं के लिए शिशु गृह का भी निर्माण कराया गया है जहां वह अपने छोटे बच्चों के साथ समय व्यतीत कर सकेंगी। नवीन भवन में अधिवक्ता संघ का भी ख्याल रखा गया है, जहां संघ के अध्यक्ष, महासचिव, और कोषाध्यक्ष के लिए अलग से चैम्बर बनाए गए हैं बार भवन।

अधिवक्ता चैम्बरों का निर्माण कार्य अधर में

नवीन सेशन कोर्ट का कार्य 80 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है, लेकिन अभी तक भवन में अधिवक्ताओं के लिए चैम्बरों का निर्माण नहीं हो पाया है। गत दिनों अधिवक्ताओं के हस्तक्षेप के बाद हाइकोर्ट ने 6 माह में चैम्बर निर्माण करने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक कोर्ट के आदेशों की अनुपालना होती नहीं दिख रही। इसमें सबसे बड़ी बाधा बजट की है। चैम्बर निर्माण को लेकर पीडब्ल्यूडी ने राज्य सरकार को 7 करोड़ की डिमांड भेजी गई है, लेकिन अभी तक डिमांड स्वीकृत और बजट जारी नहीं होने के अभाव में चैम्बरों के निर्माण का काम लेट होता जा रहा है।

नवीन भवन को प्रारंभ होने में लगेगा समय

नवीन कोर्ट भवन का निर्माण लगभग पूर्ण होने के कगार पर है, लेकिन अभी भी दो सबसे बड़े मामलों का भी पूर्ण होना जरूरी है। जिसमें एक अधिवक्ताओं सहित लोगों की प्यास बुझाने के लिए पानी तो दूसरा अधिवक्ताओं के लिए चैम्बर। जिनका निर्माण अभी तक नहीं हो सका है, हालांकि दोनों ही मामलों में क्रिया कलाप जारी हंै, लेकिन दोनों को ही पूर्ण होने में समय लगता दिख रहा है। जिस कारण कचहरी को पुराने कोर्ट से नवीन कोर्ट भवन में शिफ्ट करना अभी कुछ माह तक मुमकिन होता नहीं दिख रहा।

चंबल से नवीन कोर्ट भवन तक पेयजल पाइप लाइन डाली जानी है, लेकिन बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।

-प्रताप सिंह, एइएन पीएचइडी

कोर्ट परिसर में पानी की व्यवस्था के साथ अधिवक्ताओं के लिए चैम्बरों का निर्माण जरूरी है। अभी तक हाइकोर्ट के आदेशों की पालना में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

-हरिमोहन शर्मा, अध्यक्ष अभिभाषक संघ