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समुद्र में अटका हुआ है 12,000 करोड़ का भारतीय माल, 5 गुना बढ़ गई शिपिंग लागत, जल्द खराब हो सकता है 939 टन प्रोडक्ट

US Iran War: भारत के करीब 45 हजार कंटेनर समुद्री रास्तों और बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इससे शिपिंग लागत काफी ज्यादा बढ़ गई है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Mar 10, 2026

US Iran war impact

भारत के 45 हजार कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। (PC: AI)

US Iran War: पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध का असर अब भारतीय निर्यात पर दिखने लगा है। समुद्री मार्ग बाधित होने से भारत के 45 हजार कंटेनर दुनिया भर के बंदरगाहों और समुद्री रास्तों में फंस गए हैं। इन कंटेनरों में भरा करीब 12,000 करोड़ मूल्य का निर्यात माल अनिश्चितता में घिर गया. है। हालात ऐसे हैं कि कई जहाजों को रास्ता बदलना पड़ रहा है, जबकि कुछ माल को वापस भारत लाने की नौबत आ सकती है, जिससे निर्यातकों की लागत और बढ़ने का खतरा है। लॉजिस्टिक्स कंपनियों के अनुसार युद्ध के चलते शिपिंग कंपनियों ने कई आकस्मिक शुल्क (सरचार्ज) लगा दिए हैं, जिससे प्रति कंटेनर शिपिंग लागत तीन से पांच गुना तक बढ़ गई है।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो कंटेनरों की भारी कमी और आपूर्ति श्रृंखला में संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सबसे ज्यादा असर जल्दी खराब होने वाले खाद्य उत्पादों के निर्यातकों पर पड़ेगा। इधर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें ऐसे जहाज जो वापस लौट रहे हैं उनको सामान्य परिस्थितियों में उसी भारतीय बंदरगाह पर वापस आने की अनुमति दी जाएगी, जहां से वे रवाना हुए थे । यदि जहाज भारतीय समुद्री सीमा के भीतर है, तो उसे सी अराइवल मैनिफेस्ट' दाखिल किए बिना भी बंदरगाह पर लगने की अनुमति दी जा सकती है।

निर्यातकों पर आर्थिक दबाव

युद्ध जोखिम, अधिभार, आपात-कालीन लागत वसूली शुल्क और पीक सीजन शुल्क जैसे कई नए चार्ज लगाए जा रहे हैं। इन अतिरिक्त शुल्कों से निर्यातकों का मुनाफा बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई निर्यातक बैक टू टाउन विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत निर्यात के लिए भेजा गया माल बंदरगाह से वापस लेकर घरेलू बाजार में बेचा जा सकता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क अलग-अलग लाइनों पर अलग-अलग है। ये परिचालन लागत का हिस्सा है। पिछले पांच वर्षों में माल ढुलाई दरें पहले ही 70-80 प्रतिशत तक कम हो चुकी हैं।

जल्द खराब होने वाला 939 टन माल फंसा

प्रमुख बंदरगाहों पर लगभग 7 लाख टन तरल माल निकासी की प्रतीक्षा में है और जल्द खराब होने वाला 939 टन माल फंसा हुआ है। संकट लंबा चलता है तो माल ढुलाई की दरों में और इजाफा हो सकता है।

चना एक्सपोर्ट पर संकट

भारत का काबुली चना खाड़ी देशों में सबसे अधिक एक्सपोर्ट होता है। पिछले दो साल में इसका एक्सपोर्ट दोगुना हुआ है, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ईरान, अरब और तुर्किए की है। भारत के इस एक्सपोर्ट पर अभी ग्रहण लग गया है, क्योंकि सभी बड़े खरीदार जंग के मैदान में हैं। इसके अलावा फंसे हुए कंटेनर्स में करीब 4 लाख टन बासमती चावल भी शामिल है।