
Favorable weather: This time, the land of Mewar will yield 'gold', with prospects of a bumper harvest of wheat and chickpeas.
मरुधरा में इस बार मौसम की मेहरबानी ने धरतीपुत्रों की उम्मीदों को नए पंख लगाए हैं। हाड़कंपाने वाली सर्दी और मावठ की बूंदें रबी की फसलों के लिए अमृत साबित हो रही हैं। जिले में मौसम की अनुकूलता, पर्याप्त ओस और जलाशयों में लबालब पानी के चलते इस बार गेहूं, चना और सरसों की बंपर पैदावार होने की प्रबल संभावना है। लहलहाती फसलें इस बात की गवाही हैं कि इस बार अन्नदाता की झोली खुशियों से भरेगी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, वातावरण में नमी और कोहरे का सीधा लाभ रबी की मुख्य फसलों को मिल रहा है।
अच्छी बारिश के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। जिले के नदी-नालों, बांधों और तालाबों में पर्याप्त आवक से भू-जल स्तर सुधरा है। कुएं और ट्यूबवैल रिचार्ज होने से किसानों ने जमकर बुवाई की। जिले में इस बार कुल 3.28 लाख हेक्टेयर में रबी की बुवाई हुई है। इस साल मानसून की विदाई देर से होने के कारण खेतों में लंबे समय तक नमी बरकरार रही। इससे सरसों और चने की बुवाई समय पर और व्यापक स्तर पर हो सकी। अब कड़ाके की सर्दी और ओस की बूंदें गेहूं, जौ और सरसों की फसल की गुणवत्ता को बढ़ा रही हैं।
जिले में इस बार पानी की उपलब्धता और अनुकूल मौसम को देखते हुए रबी फसलों के उत्पादन में पिछले वर्षों की तुलना में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का अनुमान है। यह किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है।
- वीके जैन, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग भीलवाड़ा
कहां कितनी बुवाई उत्पादन
-नोट बुवाई हेक्टेयर में तथा उत्पादन टन में होगा
Published on:
24 Jan 2026 09:13 am
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