
Life principle: You won't chase after wealth; now wealth will chase after you. That power lies in the seed syllable mantras.
क्या आप धन के पीछे भाग रहे हैं? अगर हाँ, तो अब रुक जाइए। साधना और मंत्रों में वह शक्ति है कि आपको नहीं, बल्कि धन और वैभव को आपके पीछे आना होगा। यह बात मुनि आदित्य सागर ने शुक्रवार को आरसी व्यास कॉलोनी स्थित धांधोलाई स्कूल मैदान में कही। वे तीन दिवसीय विशेष 'मंत्राक्ष' ध्यान शिविर के समापन सत्र के दौरान साधकों से कहीं।
मुनि ने शिविर के अंतिम दिन श्रावकों को बीजाक्षर आधारित मंत्रों की दीक्षा दी और व्यवसाय में सकारात्मकता लाने के अचूक सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि बीजाक्षर मंत्रों का नियमित जाप और ध्यान जीवन को उन्नति की दिशा में ले जाता है। प्रत्येक जीव में कोई न कोई गुण अवश्य होता है। हमें अपने अहंकार को छोड़कर जीवन में सभी से कुछ न कुछ सीखने का प्रयास करना चाहिए।
शिविर में मुनि ने अनूठा प्रयोग करवाया। उन्होंने सभी श्रावकों को मानसिक रूप से 'सोने की शिला' पर बैठाकर गहरा ध्यान करवाया। ध्यान की गहराइयों में ले जाकर यह अहसास करवाया कि साधक के चारों तरफ सोने की बरसात हो रही, लेकिन उसका मन निर्लिप्त है। धन के साथ शांति के महत्व को समझाते हुए मुनि ने कहा कि अगर धन आते ही शांति चली जाए, तो वह धन किसी काम का नहीं। जब योगी इन मंत्रों का ध्यान करते हैं, तो उन्हें 'केवल ज्ञान' रूपी लक्ष्मी मिलती है। वहीं, जब श्रावक (गृहस्थ) इसका ध्यान करते हैं, तो उनकी संपत्ति और वैभव में वृद्धि होती है, वह भी शांति के साथ। आयोजन को सफल बनाने वाले प्रमुख श्रावकों का सम्मान किया गया। शिविर में शामिल प्रत्येक प्रतिभागी को सिद्ध 'मंत्राक्ष यंत्र' प्रदान किया। तीन दिन की साधना के बाद नीलम जैन, डॉ. पूजा जैन व अनमोल जैन, नरेश गोधा ने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे उनके भीतर तनाव कम हुआ और सकारात्मकता बढ़ी। मुनि ने घोषणा की कि अगला मंत्राक्ष शिविर 'बांसवाड़ा' में होगा।
Published on:
24 Jan 2026 09:04 am
