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बजट से ‘बूस्टर डोज’ की आस: यूनिकॉर्न की उड़ान और गांव के नवाचार को चाहिए नई पहचान

वैश्विक मंदी की आहट और ‘फंडिंग विंटर’ के साए के बीच देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम आगामी केंद्रीय बजट की ओर टकटकी लगाए देख रहा है। इनोवेशन के रथ पर सवार होकर दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुके भारत के लिए यह बजट ‘मेक ओर ब्रेक’ वाला साबित हो सकता है। मांग साफ है […]

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Hopes for a 'booster dose' from the budget: Unicorns' growth and rural innovation need new recognition.

Hopes for a 'booster dose' from the budget: Unicorns' growth and rural innovation need new recognition.

वैश्विक मंदी की आहट और 'फंडिंग विंटर' के साए के बीच देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम आगामी केंद्रीय बजट की ओर टकटकी लगाए देख रहा है। इनोवेशन के रथ पर सवार होकर दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुके भारत के लिए यह बजट 'मेक ओर ब्रेक' वाला साबित हो सकता है। मांग साफ है फंडिंग का सूखा खत्म हो, टैक्स का जंजाल सुलझे और स्टार्टअप्स केवल शहरों तक सीमित न रहकर गांवों की पगडंडियों तक पहुंचें।

सरकारी खजाने से मिले मदद

बीता साल भारतीय स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा। निवेशकों ने हाथ खींच लिए। ऐसे में इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार 'फंड ऑफ फंड्स' का दायरा बढ़ाए। सीड फंडिंग (शुरुआती पूंजी) के लिए नियमों को आसान बनाया जाए ताकि नए आइडियाज को पैसे की कमी के कारण दम न तोड़ना पड़े।

एंजेल टैक्स पर नजर

स्टार्टअप्स संस्थापकों का कहना है कि अनलिस्टेड शेयरों पर लगने वाले टैक्स (एंजेल टैक्स) के प्रावधानों में और स्पष्टता आनी चाहिए। साथ ही, टैलेंट को रोके रखने के लिए दिए जाने वाले 'ईसॉप्स' पर टैक्स तभी लगना चाहिए जब कर्मचारी उन्हें बेचें, न कि तब जब वे उन्हें मिलें। इसके अलावा, टैक्स हॉलिडे (कर छूट) की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 5 से 7 साल करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। अब तक स्टार्टअप्स की चकाचौंध महानगरों तक सीमित रही है। बजट में उम्मीद की जा रही है कि सरकार 'रूरल स्टार्टअप्स' (ग्रामीण उद्यमों) के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करे।

बजट से ये हैं 5 बड़ी मांगें

  • सिंगल विंडो क्लीयरेंस: कंपनी शुरू करने से लेकर बंद करने तक की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और तेज हो।
  • आरएंडडी पर छूट: इनोवेशन और रिसर्च पर खर्च की गई राशि पर टैक्स में अतिरिक्त छूट मिले।
  • घरेलू पूंजी को बढ़ावा: विदेशी निवेशकों पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू निवेशकों को स्टार्टअप्स में पैसा लगाने पर टैक्स इंसेंटिव मिले।
  • क्रेडिट गारंटी: छोटे स्टार्टअप्स को बिना गारंटी के लोन मिलने की सीमा बढ़ाई जाए।
  • मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट: 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को बढ़ावा देने वाले स्टार्टअप्स के लिए आयात शुल्क में रियायत।

लोकल से ग्लोबल का सपना

देश में टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन एक छोटे शहर के युवा के पास आइडिया होते हुए भी संसाधनों का अभाव होता है। अगर बजट में 'जिला स्तर पर इनक्यूबेशन सेंटर' और सीड फंडिंग की व्यवस्था हो जाए, तो हम देखेंगे कि असली यूनिकॉर्न मेट्रो शहरों से नहीं, बल्कि भारत के छोटे कस्बों से निकलेंगे।

- महेश हुरकूट, प्रदेश सदस्य लघु उद्योग भारती भीलवाड़ा