World Milk Day 2026: छत्तीसगढ़ में डेयरी व्यवसाय ग्रामीणों की जिंदगी बदल रहा है। मेहनत, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के सहारे कई किसान और महिलाएं दूध उत्पादन से आत्मनिर्भर बनकर आर्थिक समृद्धि की नई कहानी लिख रहे हैं।
World Milk Day 2026: विश्व दुग्ध दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ से ऐसी कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं, जहां डेयरी व्यवसाय ने लोगों की जिंदगी बदल दी है। कभी मजदूरी या सीमित संसाधनों के सहारे जीवन यापन करने वाले किसान आज दूध उत्पादन के जरिए अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। आधुनिक पशुपालन तकनीकों, सरकारी योजनाओं और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने डेयरी को लाभकारी व्यवसाय बना लिया है। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं और ग्रामीण विकास को नई गति मिली है।
दंतेवाड़ा जिले के ललित की कहानी संघर्ष और सफलता का अनोखा उदाहरण है। कभी रोजी-रोटी के लिए मजदूरी करने वाले ललित ने पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया और धीरे-धीरे एक सफल मल्टी-फार्मिंग मॉडल विकसित किया।
आज उनके फार्म में प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जो बाजार में 70 से 80 रुपए प्रति लीटर की दर से बिकता है। चारे की समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने नेपियर घास की खेती शुरू की, जिससे लागत कम हुई और पशुओं को पर्याप्त पोषण मिलने लगा। आधुनिक तकनीकों के उपयोग ने उनके डेयरी व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
मुंगेली जिले के बदरा गांव निवासी विश्वनाथ यादव की कहानी भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। कभी केवल एक-दो गायों के सहारे जीवनयापन करने वाले विश्वनाथ प्रतिदिन तीन-चार लीटर दूध बेचकर गुजर-बसर करते थे। राज्य पोषित डेयरी उद्यमिता योजना के तहत 12 लाख रुपए का ऋण मिलने के बाद उन्होंने बड़े स्तर पर डेयरी व्यवसाय शुरू किया। आज उनके पास लगभग 50 भैंसें हैं और वे नियमित रूप से दूध उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।
डेयरी व्यवसाय से हुई कमाई के दम पर उन्होंने अपना मकान बनाया और अतिरिक्त जमीन भी खरीदी। पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और वैज्ञानिक चारा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देकर उन्होंने अपने व्यवसाय को लगातार आगे बढ़ाया है।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में सालाना दूध उत्पादन लगभग 21.6 लाख टन (2.16 मिलियन टन) के आसपास पहुंच गया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल दूध उत्पादन 21.62 लाख टन दर्ज किया गया। अगर इसे दैनिक उत्पादन में देखें तो छत्तीसगढ़ में औसतन करीब 59 से 60 लाख लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है (1 टन ≈ 1000 लीटर के आधार पर)।
देसी गायों से: लगभग 13.76 लाख टन
क्रॉसब्रीड गायों से: लगभग 2.81 लाख टन
भैंसों से: लगभग 4.18 लाख टन
बकरियों से: लगभग 0.86 लाख टन
विश्व दुग्ध दिवस या डेयरी से जुड़ी खबर के लिए आप यह लाइन इस्तेमाल कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ में डेयरी क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। राज्य में वर्तमान में सालाना करीब 21.6 लाख टन दूध का उत्पादन हो रहा है, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों को रोजगार और अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है।