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Enmeshment : कहीं किसी रिश्ते में इन्मेशमेंट के शिकार तो नहीं आप? लक्षण, कारण और बचाव के बारे में जानिए

Enmeshment In Relationship : इन्मेशमेंट जैसी मनोवैज्ञानिक स्थिति को समझना जरूरी है। क्योंकि, ये किसी भी रिश्ते के लिए नुकसानदेह है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर (Credit- elliementalhealth)

Enmeshment In Relationship : इन्मेशमेंट जैसी जटिल मनोवैज्ञानिक स्थिति पर खुलकर बात करने में हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और सिंगर जेनेट मैक्कर्डी (Jennette McCurdy) का नाम सबसे ऊपर आता है।

उन्होंने अपनी बेस्ट-सेलर किताब "I'm Glad My Mom Died" में अपनी मां के साथ अपने इन्मेश्ड रिश्ते और उसके भयानक मानसिक प्रभावों को बेहद बेबाकी से साझा किया है।

वो किताब में लिखती हैं, "मेरी पूरी जिंदगी का एकमात्र उद्देश्य - मम्मी को जीवित और खुश रखना - बिल्कुल व्यर्थ साबित हुआ। वे सभी वर्ष जो मैंने उन पर ध्यान केंद्रित करने में बिताए, वह सारा समय जो मैंने अपने हर विचार और कार्य को यह सोचकर तय करने में लगाया कि इससे उन्हें सबसे अधिक खुशी मिलेगी, पूरी तरह निरर्थक थे। मैंने अपनी मां को समझने और जानने की पूरी कोशिश की, उन्हें क्या दुखी करता था, क्या खुश करता था, और भी बहुत कुछ, लेकिन इसकी कीमत मुझे खुद को कभी न जान पाने के रूप में चुकानी पड़ी। उनके बिना, अब मुझे नहीं पता कि मुझे क्या चाहिए, मेरी जरूरत क्या है और वास्तव में मैं कौन हूं।"

आज हम इन्मेशमेंट (Enmeshment) के लक्षण, कारण आदि बारे में जानेंगे:

इन्मेशमेंट क्या है? (What Is Enmeshment?)

अपने परिवार के साथ एक बेहद करीब और मजबूत रिश्ता कौन नहीं चाहता, अधिकतर लोग ऐसा ही चाहते हैं। हम चाहते हैं कि हमें प्यार मिले, परिवार के लोग हमें समझें और हम आपस में हमेशा जुड़े रहें। लेकिन जब यह जुड़ाव हद से ज्यादा बढ़ जाता है और दो लोगों के बीच की सीमाएं खत्म हो जाती हैं, तो उसे ही मनोविज्ञान की भाषा में इन्मेशमेंट (Enmeshment) कहते हैं।

यह सिर्फ पारिवारिक संबंधों में ही नहीं, बल्कि ऐसी स्थिति आपको किसी भी अन्य रिश्ते में देखने को मिल सकती है।

अगर वैवाहिक जीवन (पति-पत्नी के रिश्ते) पर इन्मेशमेंट का असर देखा जाए, तो कई शोध बताते हैं कि इसका प्रभाव बहुत गहरा और रिश्ते को खत्म करने वाला हो सकता है। जब पति या पत्नी में से कोई एक अपने माता-पिता के परिवार के साथ बहुत ज्यादा उलझा (Enmeshed) होता है, तो वह अपनी शादी को पहली प्राथमिकता नहीं दे पाता।

मनोविज्ञान में इसे "शादी में तीन लोगों का होना" भी कहा जाता है, जहां माता-पिता अनजाने में पति-पत्नी के बीच एक अदृश्य दीवार बन जाते हैं।

लक्षण और कारण (Input : elliementalhealth)

स्वस्थ रिश्ते और इन्मेशमेंट वाले रिश्ते के बीच अंतर

स्वस्थ रिश्ता (Healthy Relationship): यहां जुड़ाव भी होता है और आजादी भी। इसका मतलब यह है कि आप किसी अनचाही जिम्मेदारी का बोझ नहीं उठाते और न ही आप पर कुछ थोपा जाता है। परिवार के सदस्य या पार्टनर एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन वे एक-दूसरे की सोच और निजी जिंदगी का ख्याल भी रखते हैं।

इन्मेशमेंट वाला रिश्ता (Enmeshed Relationship): इस तरह के रिश्ते में व्यक्ति की अपनी पर्सनल लाइफ साइड कर दी जाती है। यहां दूसरे के प्रति 'वफादारी' और 'हर वक्त साथ रहने' को ही एकमात्र प्राथमिकता दी जाती है। उदाहरण के लिए, यहां माता-पिता और बच्चों की भावनाएं इस कदर उलझ जाती हैं कि बच्चा अपनी खुद की पहचान नहीं बना पाता। पति-पत्नी के बीच भी कई बार ऐसा होता है कि पत्नी की पहचान और कर्तव्य सिर्फ पति तक ही सीमित रह जाते हैं। यह परिस्थिति इसके विपरीत (पति के संदर्भ में भी) हो सकती है।

एकदम सटीक और आसान भाषा में कहें तो एक व्यक्ति का मूड, सोच और फैसला पूरी तरह दूसरे व्यक्ति पर निर्भर करने लगता है। इस तरह से तथाकथित प्यार, वफादारी और बॉन्डिंग एक "बोझ" का रूप ले लेती है।

अब आप समझ गए होंगे कि हेल्दी रिलेशनशिप और इन्मेशमेंट वाले रिश्ते में से सही कौन सा है।

यह समझना क्यों जरूरी है?

इसे समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इन्मेशमेंट से व्यक्ति को अनजाने में (साइलेंटली) नुकसान पहुंचता है, जिसे अधिकतर लोग समय पर पहचान नहीं पाते।

उदाहरण के लिए, जब माता-पिता अपने बच्चों को उनके अपने तरीके से जीने नहीं देते- जैसे दिन में कई-कई बार फोन करना, तुरंत जवाब की उम्मीद रखना, लगातार अपनी मांगें पूरी करवाना, या अपनी बात मनवाने के लिए 'इमोशनल ब्लैकमेल' (Guilt) करना; तो यह प्यार नहीं, बल्कि नियंत्रण है।

इसी तरह यदि एक पार्टनर प्यार और वफा के नाम पर दूसरे पार्टनर से सिर्फ अपने मन की बात मनवाने के लिए कहता है, तो वह भी इसी श्रेणी में आता है।

वैवाहिक जीवन में इन्मेशमेंट के मुख्य नुकसान

जीवनसाथी का उपेक्षित या साइडलाइंड महसूस करना

इन्मेश्ड व्यक्ति हर छोटे-बड़े फैसले (जैसे- कब और कहां घूमना है, पैसे कहां खर्च करने हैं, या बच्चा किस स्कूल में जाएगा) में अपने पार्टनर से पहले अपने माता-पिता की राय लेता है। इससे जीवनसाथी को लगता है कि इस रिश्ते में उसकी कोई अहमियत नहीं है। इस कारण से वह खुद को एक 'बाहरी व्यक्ति' (Outsider) मानने लगता है। अपनी अहमियत शून्य महसूस होने के कारण वह पार्टनर के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस नहीं कर पाता या पाती है।

लॉयल्टी कॉन्फ्लिक्ट (वफादारी का टकराव)

जब भी पति-पत्नी में से किसी का भी अपने माता-पिता के साथ कोई मतभेद या वाद-विवाद होता है, तो इन्मेश्ड पार्टनर हमेशा अपने माता-पिता का ही पक्ष लेता है, चाहे वे गलत ही क्यों न हों। उसे लगता है कि उसके माता-पिता पूरी तरह सही हैं, या अगर उनकी बात न मानी तो यह उनके साथ 'विश्वासघात' होगा या उन्हें दुख पहुंचेगा। इस स्थिति में उसका पार्टनर किस दौर से गुजरेगा, वह इस बारे में सोच ही नहीं पाता। इससे पार्टनर्स के बीच लॉयल्टी कॉन्फ्लिक्ट पैदा होता है।

प्राइवेसी का खत्म होना

इन्मेश्ड परिवारों में प्राइवेसी को सबसे अधिक खतरा रहता है। पति-पत्नी के बीच की निजी बातें, उनके आपसी झगड़े या उनकी आर्थिक स्थिति की पूरी जानकारी माता-पिता को होती है। यहां तक कि इससे जुड़े फैसले भी वही लोग करते हैं। यह भी वैवाहिक रिश्ते को कमजोर करने का एक मुख्य कारण बनता है।

मनोवैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती हैं?

नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ पर उपलब्ध रिसर्च के अनुसार, जब एक पार्टनर अपने माता-पिता के साथ हद से ज्यादा उलझा होता है, तो वह अपनी मैरिड लाइफ में हेल्दी बाउंड्री (स्वस्थ सीमाएं) नहीं बना पाता। यह स्थिति शादी में एंग्जायटी और लगातार चलने वाले आपसी झगड़ों का कारण बनती है।

'बोवेन फैमिली सिस्टम्स थ्योरी' (Bowen Family Systems Theory) पर आधारित शोध बताते हैं कि इन्मेश्ड लोग अपने माता-पिता के मूड से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। अगर मां या पिता दुखी या नाराज हैं, तो उसका सीधा गुस्सा वे अपने पति या पत्नी पर निकालते हैं, जिससे धीरे-धीरे पार्टनर के साथ रिश्ता कमजोर होकर खत्म होने लगता है।

इस तरह वैज्ञानिक शोध भी स्पष्ट करते हैं कि इन्मेशमेंट किस प्रकार से हँसते-खेलते रिश्तों को खत्म कर देता है। इसलिए हमें समय रहते इससे बचने के उपायों पर विचार करना चाहिए।

इन्मेशमेंट से वैवाहिक जीवन को बचाने के उपाय

यदि आपकी शादी में इन्मेशमेंट के कारण दूरियां आ रही हैं, तो इन तरीकों को अपनाकर रिश्ते को सुधारा जा सकता है:

एक टीम बनकर रहें

पति-पत्नी को हमेशा एक टीम की तरह मिलकर किसी भी बात का निर्णय लेना चाहिए। कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले आपस में चर्चा करें, न कि सीधे माता-पिता से। एक-दूसरे के विचारों को स्वीकार करें, उन्हें समझें और फिर जो आप दोनों के भविष्य के लिए बेहतर हो, उसी के साथ आगे बढ़ें।

ससुराल वालों के लिए सीमाएं तय करें

जब तक आप एक सीमा (बाउंड्री) तय नहीं करते, तब तक माता-पिता आपकी पर्सनल लाइफ में जरूरत से ज्यादा दखल दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, यह स्पष्ट होना चाहिए कि "हम अपने बेडरूम के झगड़े, हमें कहां और कब जाना है, क्या खाना-पीना व पहनना है, या हमारे फाइनेंशियल फैसले हम खुद संभालेंगे।" इन बातों को अपने माता-पिता को शांति और सम्मान के साथ समझाएं और इस तरह के फैसले स्वयं ही लें।

पार्टनर की बातों को सुनें और समझें

यदि आपका जीवनसाथी यह शिकायत कर रहा है कि उसे आपके माता-पिता के व्यवहार के कारण घुटन या उपेक्षा महसूस हो रही है, तो उसकी बात को 'ओवर-रिएक्शन' कहकर खारिज न करें। न ही पार्टनर को पूरी तरह गलत ठहराकर जबरन चुप कराने की कोशिश करें।

गिल्ट-फ्री स्पेस बनाएं

इन्मेश्ड पार्टनर के लिए मन से अपराधबोध (गिल्ट) को हटाना बेहद जरूरी है। जब तक वह अंदरूनी रूप से गिल्ट-फ्री नहीं होगा, तब तक स्वतंत्र होकर सही फैसला नहीं ले पाएगा। यह समझना जरूरी है कि माता-पिता से अलग अपनी पत्नी या पति के साथ समय बिताना या कोई स्वतंत्र फैसला लेना किसी भी तरह का अपराध नहीं है।

इस प्रकार से आप खुद को और अपने रिश्ते को इन्मेशमेंट जैसी गंभीर परिस्थिति से बचा सकते हैं। यह आपके सुखद वैवाहिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। अगर इस मामले में आपको और अधिक मार्गदर्शन या मदद चाहिए, तो मनोचिकित्सक से संपर्क करें।