भारत, May 31, 2026

बाल विवाह की जंजीरों में बचपन (photo,AI)
Child Marriage: एक तरफ देश में बेटियों की शिक्षा, करियर और आत्मनिर्भरता को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर आज भी कई लड़कियों का बचपन कम उम्र में शादी के बंधन में बांध दिया जाता है। कानूनन 18 साल से कम उम्र में शादी करना अपराध है, फिर भी कई इलाकों में बाल विवाह की समस्या बनी हुई है।
एसआरएस स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट (SRS Statistical Report) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में लड़कियों की शादी की औसत उम्र में लगातार बढ़ोतरी हुई है और अब अधिकांश लड़कियां 21 वर्ष या उससे अधिक उम्र में विवाह कर रही हैं। इसके बाद भी आज के समय में बाल विवाह पूरी तरह से खत्म नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी जागरूकता के बाद भी कहां कमी हो रही है?
रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों का औसत 2.1% है। लेकिन पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 6.3 % तक है। देश के औसत से लगभग 3 गुना ज्यादा है। इसके साथ ही ये राज्य पहले स्थान पर है। वहीं झारखंड दूसरे स्थान पर है जहां 4.9% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है। इसके बाद छत्तीसगढ़ 2.9% के साथ तीसरे स्थान पर है।
आकड़े बताते हैं कि कड़े कानून और जागरूकता अभियानों के बावजूद भी इन राज्यों में बाल विवाह की प्रथा को पूरी तरह खत्म करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट में असम में 2.8%, बिहार और ओडिशा दोनों राज्यों में 2.6%-2.6% बाल विवाह पाए गए हैं। एसआरएस स्टेटिस्टिकल रिपोर्ट के मुताबिक देश के कई हिस्सों में लड़कियां सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के आगे बेबस हैं। इस समस्या की जड़ें समाज में बहुत गहरी हैं जहां गरीबी के कारण माता-पिता बेटियों को बोझ समझ लेते हैं, तो वहीं अच्छी शिक्षा और जागरूकता की कमी इस सोच को और बढ़ावा देती है। इसके साथ ही सामाजिक दबाव और पुरानी रूढ़िवादी परंपराएं आज भी परिवारों को छोटी उम्र में ही बेटियों के हाथ पीले करने पर मजबूर कर देती हैं। जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी, तब तक कानून भी बेटियों का बचपन बचाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगा।
राजस्थान को हमेशा से बाल विवाह की बड़ी चुनौती का सामना करने वाले राज्यों में गिना जाता रहा है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों के आंकड़े 2.4% है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से थोड़ा सा ज्यादा है, पर कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी बेहतर है। राजस्थान में लगभग 75.8% लड़कियों की शादी अब 21 साल या उससे अधिक उम्र में हो रही है। 21.8% लड़कियों की शादी 18 से 20 साल के बीच हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में बेटियों की शिक्षा और जागरूकता को लेकर समाज की सोच बदल रही है। लोग बेटियों को पढ़ाने और उन्हें पैरों पर खड़ा करने को अहमियत दे रहे हैं। इस प्रथा को पूरी तरह खत्म करने के लिए मजबूत अस्तर पर प्रयास करना जरूरी है।
देश की राजधानी दिल्ली में इस सर्वे के दौरान 18 साल से कम उम्र में शादी का एक भी मामला सामने नहीं आया, जबकि केरल में भी यह आंकड़ा केवल 0.04% रहा है। लड़कियों को बेहतर शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और समाज में आगे बढ़ने के बराबर मौके मिलते हैं, तो बाल विवाह जैसी प्रथाएं खत्म हो जाती हैं। दिल्ली में शिक्षा का स्तर देश में सबसे बेहतरीन माना जाता है, यहां की साक्षरता दर 86.34% है, और यह शहर अपने शानदार सरकारी स्कूलों व बेहतरीन कॉलेजों की वजह से पढ़ाई का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।
वहीं दूसरी तरफ, केरल पूरे भारत का सबसे पढ़ा-लिखा राज्य है, जहां साक्षरता दर लगभग 96% है और वहां की सरकार हर बच्चे तक अच्छी शिक्षा पहुंचाने को सबसे आगे रखती है। साफ है कि जब समाज शिक्षित होता है, तो बेटियों का बचपन और उनका भविष्य दोनों सुरक्षित हो जाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण और शहरी भारत के बीच का बड़ा अंतर है। ग्रामीण इलाकों में 18 साल से पहले शादी करने वाली लड़कियों का प्रतिशत 2.4% है और शहरों में यह आंकड़ा घटकर 1.1% हो गया। शहरों के मुकाबले गांवों में बाल विवाह होने की संभावना दोगुनी से भी ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में पश्चिम बंगाल 5.9% और झारखंड 5.8 % के साथ इस समस्या से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं।
वहीं बंगाल के शहरी इलाकों में 7.6 % लड़कियों की शादी 18 साल से पहले कर दी गई, जो देश के शहरी औसत 1.1% से कई गुना ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि बाल विवाह सिर्फ गांवों की समस्या नहीं है, बल्कि कुछ राज्यों के शहरों में भी यह प्रथा आज तक पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है और वहां बेटियों का बचपन सुरक्षित करने के लिए अभी बहुत काम करना बाकी है।
| राज्य | प्रतिशत (%) |
|---|---|
| West Bengal | 6.3 |
| Jharkhand | 4.9 |
| Chhattisgarh | 2.9 |
| Assam | 2.8 |
| Bihar | 2.6 |
| Odisha | 2.6 |
| Rajasthan | 2.4 |
| India Average | 2.1 |
| Gujarat | 2.1 |
| Madhya Pradesh | 2.1 |
| Telangana | 1.8 |
| Andhra Pradesh | 1.7 |
| Uttar Pradesh | 1.6 |
| Uttarakhand | 1.5 |
| Jammu & Kashmir | 1.2 |
| Maharashtra | 1.0 |
| Punjab | 0.9 |
| Karnataka | 0.8 |
| Tamil Nadu | 0.8 |
| Haryana | 0.7 |
| Himachal Pradesh | 0.4 |
| Kerala | 0.04 |
| Delhi | 0 |
बाल विवाह का सीधा असर लड़कियों के जीवन और सेहत पर पड़ता है। कम उम्र में मां बनने से 15-19 साल की लड़कियों में गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का खतरा 20-50 % तक बढ़ जाता है। 20-24 साल की महिलाओं के मुकाबले, 18 साल से कम उम्र की माताओं के बच्चों में नवजात मृत्यु का जोखिम भी 30-50% अधिक होता है।
MMR के रिपोर्ट, अनुसार मातृ मृत्यु दर प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 97 बनी हुई है। बाल विवाह न सिर्फ पढ़ाई और सपने छीनता है, बल्कि उसे और उसके बच्चे को एक जानलेवा खतरे में भी धकेल देता है।
एक बदलाव भी देखने को मिला है। देश में महिलाओं की औसत विवाह आयु बढ़कर 23.1 वर्ष पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में लड़कियां अब अधिक उम्र में शादी कर रही हैं। आंकड़े अनुसार शादी करने वाली महिलाओं में से करीब 73.5 % लड़कियों की शादी 21 वर्ष या उससे अधिक उम्र में हुई है और 24.5% महिलाओं की शादी 18 से 20 वर्ष के बीच हुई।
देश में बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर सोच बदल रही है, लेकिन इसे और मजबूती से बढ़ाना होगा। इसके लिए परिवारिक और समाजिक स्तर पर सोच का बदलना बेहद जरूरी है।
Updated on: 30 May 2026 05:25 pm

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