विश्व दुग्ध दिवस पर विशेष : भारत की डेयरी शक्ति लगातार बढ़ रही, देश का 14.82 प्रतिशत दूध उत्पादन करता है राजस्थान, मवेशियों की उच्च आबादी के कारण नागौर जिला दूध उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में से एक
नागौर. भारत की डेयरी शक्ति लगातार मजबूत हो रही है और इस विकास में राजस्थान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश के कुल दूध उत्पादन में 14.82 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ राजस्थान देश का दूसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बनकर उभरा है। केवल उत्तर प्रदेश ही राजस्थान से आगे है, जिसकी हिस्सेदारी 15.66 प्रतिशत है।
केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र मिलकर देश के कुल दूध उत्पादन का 54.09 प्रतिशत योगदान देते हैं। इनमें राजस्थान का उत्पादन गुजरात से लगभग दोगुना है। गुजरात की हिस्सेदारी 7.78 प्रतिशत और महाराष्ट्र की 6.71 प्रतिशत है, जबकि मध्य प्रदेश 9.12 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है।
डेयरी अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है राजस्थान
विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान में दूध उत्पादन में वृद्धि के पीछे बेहतर नस्ल सुधार, पशुओं के स्वास्थ्य पर बढ़ता ध्यान, पशुपालकों को मिलने वाली सरकारी योजनाएं और डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार प्रमुख कारण हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय कृषि के साथ अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत बनकर उभरा है। विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि दर्शाती है कि राजस्थान केवल मरुस्थलीय प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की डेयरी अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ भी है। आने वाले वर्षों में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर विपणन व्यवस्था के सहारे प्रदेश के दूध उत्पादन में और वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रमुख दूध उत्पादन वाले जिलों में है जयपुर व नागौर
राजस्थान में डेयरी क्षेत्र लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार बना हुआ है। विशेषकर पश्चिमी और मध्य राजस्थान में पशुपालन प्रमुख आजीविका है। राज्य में सर्वाधिक दूध उत्पादन जयपुर जिले में होता है। राज्य के प्रमुख दुग्ध उत्पादक जिलों में जयपुर, सीकर, नागौर, जोधपुर और बाड़मेर सबसे अग्रणी हैं। मवेशियों की उच्च आबादी के कारण नागौर जिला दूध उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में पशुपालक गाय और भैंस पालन के जरिए न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि प्रदेश की दुग्ध अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहे हैं।
नस्ल सुधार से बढ़ रहा दूध उत्पादन
सरकार की ओर से नस्ल सुधार के लिए समय-समय पर चलाई जाने वाली नस्ल सुधार की योजनाओं एवं पशुपालकों में जागरुकता के परिणामस्वरूप दूध उत्पादन बढ़ा है। राजस्थान में दूध उत्पादन की मुख्य वजह यह भी है कि यहां पानी की कमी होने से ज्यादातर खेती मानसून की बारिश पर आधारित है, इसलिए किसान खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं, ताकि आय बढ़ सके। सरकार की उदारीकरण की नीति भी बड़ा फेक्टर है।
- डॉ. मूलाराम जांगू, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुपालन विभाग, नागौर