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नागौर, May 30, 2026

‘विधायक ज़ीरो, बातें करते हैं मुख्यमंत्री बनने की’, RLP सांसद हनुमान बेनीवाल पर BJP की ज्योति मिर्धा का ‘वार’

भैराणा धाम विवाद पर ज्योति मिर्धा का हनुमान बेनीवाल पर बड़ा हमला। कहा- विधानसभा में 0 विधायक होने के बावजूद खुद को सीएम की तरह पेश करते हैं बेनीवाल। नागौर की सियासत गरमाई।

Bhairana Dham Dispute Jyoti Mirdha Hanuman Beniwal Nagaur Politics Update

Jyoti Mirdha and Hanuman Beniwal - File PIC

राजस्थान में भैराणा धाम प्रकरण को लेकर राजनीतिक गर्माहट जारी है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिर्धा ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के मुखिया और नागौर के वर्तमान सांसद हनुमान बेनीवाल के खिलाफ बेहद आक्रामक मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के सांगठनिक प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए कुचामन पहुंचीं डॉ. ज्योति मिर्धा ने मीडिया से बातचीत के दौरान बेनीवाल की कार्यशैली, उनके बयानों और उनकी राजनीति के तौर-तरीकों पर तीखे तंज कसे। ज्योति मिर्धा ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि भैराणा धाम जैसे विशुद्ध रूप से धार्मिक और स्थानीय जन-आस्था से जुड़े संवेदनशील मुद्दे को हनुमान बेनीवाल और उनकी पार्टी आरएलपी द्वारा केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ और घटते जनाधार को वापस पाने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है। मिर्धा के इस बयान के बाद नागौर और मारवाड़ संभाग के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि यह विवाद उस पुराने राजनीतिक इतिहास से जुड़ा है जो मारवाड़ के दो सबसे बड़े जाट परिवारों और नेताओं के बीच पिछले 12 वर्षों से लगातार चला आ रहा है।

'भैराणा धाम मामले को RLP ने दिया राजनीतिक रंग'

कुचामन में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए डॉ. ज्योति मिर्धा ने भैराणा धाम विवाद की पूरी पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भैराणा धाम का मामला स्थानीय संत समाज, साधु-संतों की गरिमा और आम जनता की गहरी धार्मिक श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय और प्रादेशिक नेता इस मुद्दे की संवेदनशीलता को शुरुआत से ही समझते थे और इस विषय को लेकर बेहद गंभीर थे।

ज्योति मिर्धा ने दावा किया कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने साधु-संतों की सभी तार्किक मांगों और उनकी चिंताओं को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पूरी जिम्मेदारी के साथ पहले ही पहुंचा दिया था। प्रशासनिक स्तर पर भी जिला प्रशासन और संत समाज के बीच लगातार शांतिपूर्ण संवाद जारी था ताकि कानून सम्मत और सर्वमान्य समाधान निकाला जा सके। लेकिन इसी बीच सांसद हनुमान बेनीवाल और उनकी पार्टी आरएलपी ने पूरे शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने और इस धार्मिक आंदोलन को जबरन राजनीतिक रंग देने का प्रयास शुरू कर दिया, जो कि बेहद निंदनीय है।

'एक भी विधायक नहीं, दिखाते हैं मुख्यमंत्री की तरह'

हनुमान बेनीवाल की सांगठनिक ताकत और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर प्रहार करते हुए डॉ. ज्योति मिर्धा ने उनकी कार्यशैली को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान राजस्थान विधानसभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का एक भी विधायक (0 विधायक) नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उनके नेता हनुमान बेनीवाल हर मंच पर खुद को इस तरह प्रस्तुत करते हैं जैसे वे ही प्रदेश के मुख्यमंत्री हों या पूरी सरकार उन्हीं के इशारों पर चल रही हो।

ज्योति मिर्धा ने बेनीवाल के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह उनकी पुरानी आदत बन चुकी है कि वे चाहे किसी सामाजिक कार्यक्रम में जाएं, किसी के पारिवारिक समारोह जैसे मुंडन या जसूटन में शरीक हों, या फिर कहीं धार्मिक भागवत कथा के पंडाल में चले जाएं, वे हर पवित्र और व्यक्तिगत मंच का उपयोग केवल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने और राजनीतिक भाषण देने के लिए ही करते हैं।

मिर्धा ने आरोप लगाया कि बेनीवाल लगातार हल्की, अमर्यादित और विवादित भाषा का जानबूझकर उपयोग करते हैं ताकि वे सुर्खियों में बने रहें और इसके जरिए अपना राजनीतिक कद बड़ा दिखाने का असफल प्रयास कर सकें।

'तेजाजी के जयकारों पर समर्थकों को कहा 'गांजेड़ी'

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने भैराणा धाम में आयोजित आरएलपी की हालिया जनसभा के दौरान मंच से दिए गए बयानों और घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बेनीवाल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन को आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बताया जा रहा था, उसकी वास्तविकता बेनीवाल के खुद के बयानों से जनता के सामने आ चुकी है।

ज्योति मिर्धा ने घटना का विवरण देते हुए कहा कि भैराणा धाम की धार्मिक सभा में जब एक उत्साही समर्थक द्वारा लोक देवता वीर तेजाजी के जयकारे लगाए जा रहे थे, तो नागौर सांसद ने कथित तौर पर झल्लाते हुए मंच से ही यह कह दिया कि— 'अरे गांजा पीया हुआ है क्या?' इसके साथ ही सभा की समाप्ति के दौरान भी उन्होंने मंच से ऐसे कई अनौपचारिक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया जो किसी भी धार्मिक स्थल के वातावरण और गरिमा के अनुरूप बिल्कुल नहीं थे।

मिर्धा ने कहा कि इन बयानों से स्पष्ट होता है कि बेनीवाल के मन में न तो संतों के प्रति कोई वास्तविक सम्मान है और न ही धार्मिक मर्यादाओं के प्रति, उनका एकमात्र उद्देश्य सिर्फ भीड़ जुटाकर अपनी राजनीति चमकाना था। अब नागौर और राजस्थान की समझदार जनता खुद यह तय कर सकती है कि यह मुद्दा वास्तव में धार्मिक था या इसे राजनीतिक रूप देने की कोशिश की गई थी।

'मर्यादाविहीन राजनीति, कोई हैरानी नहीं'

डॉ. ज्योति मिर्धा ने कहा कि हनुमान बेनीवाल की इस प्रकार की राजनीतिक शैली और विवादित टिप्पणियों को देखते हुए मारवाड़ के राजनीतिक विश्लेषकों और आम नागरिकों को अब कोई अचंभा या हैरानी नहीं होती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में भाषा की मर्यादा और सांगठनिक शालीनता का एक निश्चित स्तर होना अनिवार्य है, लेकिन दुर्भाग्य से राजस्थान की राजनीति में भाषा का यह स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है और बेनीवाल की राजनीति उसी नकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती दिखाई देती है।

मिर्धा ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता अब इस तरह की खोखली बयानबाजी, दिन में मुख्यमंत्री बनने के सपने देखने की राजनीति और केवल सनसनी फैलाने के तौर-तरीकों को पूरी तरह से समझ चुकी है। आने वाले समय में लोग ऐसे संवेदनशील और धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक रोटियां सेकने वाले नेताओं के प्रति और ज्यादा सजग और सतर्क रहेंगे और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगे।

मिर्धा परिवार का वर्चस्व V/S हनुमान बेनीवाल

ज्योति मिर्धा और हनुमान बेनीवाल के बीच का यह ताजा विवाद वास्तव में राजस्थान की सबसे चर्चित, हॉट और ऐतिहासिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का ही एक अगला अध्याय है। नागौर लोकसभा सीट पर इन दोनों जाट क्षत्रपों के बीच की सियासी जंग मरुधरा के इतिहास में सबसे दिलचस्प मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषक इस पूरी लड़ाई को मारवाड़ के 'नाथूराम मिर्धा परिवार के पारंपरिक राजनीतिक वर्चस्व' बनाम 'हनुमान बेनीवाल के नए तेवर वाले स्वतंत्र किसान नेतृत्व' के बीच के सीधे टकराव के रूप में देखते हैं।

नागौर की इस धरती ने पिछले एक दशक में इन दोनों नेताओं के बीच कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों ही नेता अपने-अपने वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखते हैं, जिसके कारण जब भी इनके बीच जुबानी तीर चलते हैं, तो उसका असर केवल नागौर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर और सीकर संभाग की जाट राजनीति के समीकरणों को भी पूरी तरह से प्रभावित करता है।

3 बार हेड-टू-हेड मुकाबलों का स्कोरकार्ड

डॉ. ज्योति मिर्धा और सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच की यह राजनैतिक कड़वाहट केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों नेता चुनावी रणभूमि में कुल 3 बार आमने-सामने की बड़ी जंग लड़ चुके हैं। इन तीनों ऐतिहासिक मुकाबलों के परिणाम और उनके राजनैतिक समीकरण इस प्रकार रहे हैं:

पहला मुकाबला: लोकसभा चुनाव 2014 (त्रिकोणीय जंग का समीकरण)

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार इन दोनों बड़े नेताओं के बीच आमने-सामने की राजनीतिक टक्कर देखने को मिली थी। हालांकि, तब यह मुकाबला सीधा न होकर त्रिकोणीय हो गया था। इस चुनाव में ज्योति मिर्धा कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थीं, जबकि हनुमान बेनीवाल भाजपा से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा ने सी.आर. चौधरी को अपना टिकट दिया था। इस त्रिकोणीय मुकाबले का नतीजा यह रहा कि जाट वोटों में भारी बिखराव हो गया, जिसका सीधा नुकसान ज्योति मिर्धा को उठाना पड़ा और भाजपा के सी.आर. चौधरी चुनाव जीत गए। ज्योति मिर्धा दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि निर्दलीय लड़ रहे हनुमान बेनीवाल को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था।

दूसरा मुकाबला: लोकसभा चुनाव 2019 (गठबंधन बनाम कांग्रेस की सीधी टक्कर)

साल 2019 के लोकसभा चुनाव आते-आते नागौर के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से उलट गए। हनुमान बेनीवाल ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी' (RLP) का गठन कर लिया था और इस चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ एनडीए (NDA) गठबंधन के तहत संयुक्त चुनाव लड़ा। भाजपा ने यह सीट गठबंधन के तहत आरएलपी के लिए छोड़ दी थी। दूसरी तरफ, डॉ. ज्योति मिर्धा एक बार फिर कांग्रेस की प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में डटी हुई थीं। इस सीधी और ऐतिहासिक टक्कर में हनुमान बेनीवाल ने बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने ज्योति मिर्धा को 1 लाख 81 हजार 260 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। इस चुनाव में बेनीवाल को करीब 6.60 लाख वोट मिले थे, जबकि ज्योति मिर्धा के खाते में 4.78 लाख वोट आए थे।

तीसरा मुकाबला: लोकसभा चुनाव 2024 (उलट पाले और बदले हुए समीकरणों की जंग)

2024 का लोकसभा चुनाव नागौर के इतिहास का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला चुनाव साबित हुआ, क्योंकि दोनों ही नेताओं ने अपनी पुरानी राजनीतिक पार्टियों के पाले पूरी तरह से बदल लिए थे। ज्योति मिर्धा कांग्रेस का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आधिकारिक उम्मीदवार बन चुकी थीं। वहीं, हनुमान बेनीवाल एनडीए गठबंधन से अलग होकर कांग्रेस के साथ 'इंडी' (INDIA) गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे। इस बेहद कड़े, उतार-चढ़ाव से भरे और कांटे के मुकाबले में एक बार फिर हनुमान बेनीवाल ने बाजी मारी। उन्होंने बीजेपी की ज्योति मिर्धा को 42,225 वोटों के अंतर से पराजित किया। इस चुनाव में बेनीवाल को 5,96,955 वोट मिले, जबकि ज्योति मिर्धा को 5,54,730 वोट प्राप्त हुए थे।

कुल चुनावी मुकाबले: 3 बार

हनुमान बेनीवाल की जीत का रिकॉर्ड: 2 बार (साल 2019 और साल 2024 के लोकसभा चुनावों में विजयी)

डॉ. ज्योति मिर्धा की जीत का रिकॉर्ड: 0 बार

अन्य की जीत: 1 बार (साल 2014 में भाजपा के सी.आर. चौधरी जीते)

इस प्रकार सीधे और आमने-सामने के मुकाबलों में हनुमान बेनीवाल का पलड़ा डॉ. ज्योति मिर्धा पर तकनीकी रूप से 2-0 से भारी रहा है। यही वजह है कि जब भी ज्योति मिर्धा को बेनीवाल के खिलाफ सांगठनिक या प्रशासनिक घेराबंदी का मौका मिलता है, तो वे पूरी आक्रामकता के साथ उन पर पलटवार करती हैं, जैसा कि उन्होंने कुचामन के इस प्रशिक्षण शिविर में भैराणा धाम के मुद्दे को लेकर किया है।

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