
Chinese President Xi Jinping, Indian Prime Minister Narendra Modi and Pakistani PM Shehbaz Sharif
पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terrorist Attack) और उसके जवाब में भारत (India) के 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) के बाद से भारत-पाकिस्तान में तनाव काफी बढ़ गया। भारत ने सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) रद्द करते हुए पाकिस्तान (Pakistan) पर 'वॉटर स्ट्राइक' भी कर दी, जिससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा। भारत की तरफ से साफ कर दिया गया है कि अगर पाकिस्तान ने भविष्य में भारत के खिलाफ कुछ भी गलत करने की साजिश की, तो भारतीय सेना 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' से उसका करारा जवाबी देगी। इसी वजह से पाकिस्तान में डर का माहौल है। डरे हुए पाकिस्तान ने एक बार फिर मदद के लिए अपने पुराने दोस्त का दरवाज़ा खटखटाया है।
भारत से भविष्य में किसी भी तरह के सैन्य टकराव के खतरे को देखते हुए पाकिस्तान ने एक बार फिर हथियारों के लिए चीन (China) के सामने हाथ फैलाए हैं। कुछ दिन पहले पाकिस्तान के Il-78 विमान चीन के सिचुआन प्रांत स्थित एक एयरबेस पर देखे गए हैं। हालांकि ये विमान बहुत ज़्यादा समय तक चीन में नहीं रहे। बताया जा रहा है कि एयरबेसों पर लोडिंग के बाद पाकिस्तानी विमान वापस लौट आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये पाकिस्तानी विमान चीन से हथियारों की सप्लाई लेने के लिए गए थे। हालांकि दोनों देशों की तरफ से अब तक आधिकारिक तौर पर इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
गौरतलब है हथियारों के लिए पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन पर ही निर्भर है। पाकिस्तान लंबे समय से चीन से ही अपने ज़्यादातर हथियार खरीदता रहा है। हालांकि चाइनीज़ हथियारों ने पिछले साल पाकिस्तान को धोखा दे दिया था जब भारत के खिलाफ ये हथियार बुरी तरह फ्लॉप हो गए थे। चाइनीज़ मिसाइलें भारत के डिफेंस सिस्टम के सामने फेल हो गई थीं। चीन के अलावा पाकिस्तान तुर्की (Turkey) से भी हथियार खरीदता है। पिछले साल भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने तुर्की के ड्रोन्स का इस्तेमाल भी किया था, लेकिन वो भी भारत के डिफेंस सिस्टम के आगे ढेर हो गए थे।
Updated on:
27 Jan 2026 01:25 pm
Published on:
27 Jan 2026 11:57 am
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