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भारत, Jan 21, 2026

पाकिस्तानी JF-17 को नहीं मिल रहे खरीदार, बड़े-बड़े दावों के बाद भी हाथ खाली, शरीफ की शराफत पर नहीं दुनिया को यकीन

Pakistan fighter jet sales: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से लेकर कई दूसरे नेता अपने फाइटर जेट पर बड़े-बड़े दावे करते आए हैं, लेकिन अब तक एक भी विमान किसी देश ने नहीं खरीदा है। इससे पता चलता है कि 'मेड इन पाकिस्तान' पर किसी को भरोसा नहीं है।

JF-17 Thunder export failure

पाकिस्तान को अपने फाइटर जेट का कोई ऑर्डर नहीं मिला है। (PCAI)

Pakistan JF-17 fighter jet: जहां 'मेड इन पाकिस्तान' लग गया, वहां दुनिया का भरोसा आधा हो जाता है। शायद यही वजह है कि पाकिस्तान के कथित अत्याधुनिक फाइटर जेट JF-17 को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। पाकिस्तान के बड़े-बड़े दावों के इतर सच्चाई यह है कि उसे एक भी एक्सपोर्ट ऑर्डर नहीं मिला है। दुनिया की इस बेरुखी से पाकिस्तानी सरकार चिंतित है और अब इस सच्चाई को स्वीकारने भी लगी है। डिफेंस प्रोडक्शन मिनिस्टर ने माना है कि फाइटर जेट को लेकर चल रही मौजूदा बातचीत के विफल होने की आशंका ज्यादा है।

Pakistan के दावों पर शंका

पाकिस्तान अपने फ्लैगशिप JF-17 फाइटर जेट्स को लेकर बड़े-बड़े दावे करता रहा है। वह इसे पश्चिमी देशों के फाइटर विमानों का विकल्प बताता है। पाकिस्तान के एक JF-17 की कीमत 30 मिलियन डॉलर से 40 मिलियन डॉलर के बीच है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, पाक अधिकारी यह दावा करते हैं कि पिछले साल भारत से हवाई संघर्ष के दौरान चीन निर्मित J-10 विमानों के साथ ही JF-17 का भी इस्तेमाल किया गया। ऐसा इसलिए ताकि यह दर्शाया जा सके कि उसका फाइटर तेज लड़ाई में आजमाया हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों को पाक के इस दावे पर शंका है। उनका कहना है कि JF-17 का प्रचार ज्यादा किया जा रहा है, लेकिन इसमें खूबियां उतनी नहीं हैं।

JF-17 में इन खूबियों का अभाव

रिपोर्ट के अनुसार, JF-17 में टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट, वेपन इंटीग्रेशन और लॉन्ग-टर्म सपोर्ट पैकेज नहीं है, जो खरीदारों को सबसे पहले आकर्षित करता है। अधिकांश देश राष्ट्र की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केवल कीमत देखकर ही डील फाइनल नहीं करते। उन्हें एक फाइट जेट में जो खूबियां चाहिए, वह पाकिस्तान के फ्लैगशिप JF-17 में नहीं हैं। इसलिए उसे अब तक कोई एक्सपोर्ट ऑर्डर नहीं मिला है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर है, विदेशी कर्ज बढ़ रहा है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसकी साख बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में शहबाज शरीफ सरकार की एक कोशिश यह भी है कि विमानों के बदले कैश के बजाए दूसरे लाभ मिल जाएं। हालांकि, इसमें भी उसे सफलता नहीं मिल रही है।

13 देशों से बातचीत, ऑर्डर 0

एनालिस्ट चेतावनी देते हैं कि पाकिस्तान की सेल्स पिच में बढ़ा-चढ़ाकर बातें कही जा रही हैं, जबकि विश्वसनीयता कम है। पाकिस्तान ने JF-17 जेट, ड्रोन और ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट की बिक्री को लेकर 13 देशों के साथ बातचीत की है। लेकिन इसमें से एक भी बातचीत कॉन्ट्रैक्ट में नहीं बदल पाई है। पाकिस्तान के डिफेंस प्रोडक्शन मंत्री रजा हयात हरराज (Raza Hayat Harraj) का कहना है कि बातचीत जारी है, मगर अंतरराष्ट्रीय दबावों के कारण इसके विफल होने की आशंका है। वहीं, पाकिस्तान की सेना और रक्षा मंत्रालय ने ऑर्डर के बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है, इससे यह स्पष्ट होता है कि उनके पास बताने लायक कुछ है ही नहीं।

Shehbaz Sharif के बड़े दावे

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) सार्वजनिक रूप से कई बार दावा कर चुके हैं कि कई देश पाकिस्तानी फाइटर जेट खरीदने के लिए बातचीत में सक्रिय रूप से शामिल हैं। लेकिन अब तक कोई भी बातचीत ऑर्डर तक नहीं पहुंच पाई है। बताया जाता है कि सूडान, नाइजीरिया, मोरक्को, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, बांग्लादेश और लीबिया ने पाक के विमानों में दिलचस्पी दिखाई थी, मगर बात आगे नहीं बढ़ पाई। इसकी एक प्रमुख वजह इनमें से अधिकांश देशों में राजनीतिक अस्थिरता और पिछली खरीद प्रक्रिया की जांच है। इसके अलावा, चीन के बजाए पाकिस्तान से डिफेंस डील करना भी इन देशों के लिए आसान नहीं होगा। वहीं, संयुक्त राष्ट्र द्वारा हथियारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण सूडान और लीबिया में बिक्री मुश्किल है।

कर्ज चुकाने का टूल बना Fighter Jet

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान JF-17 को कमर्शियल प्रोडक्ट के बजाए फाइनेंशियल टूल के तौर पर अधिक इस्तेमाल कर रहा है। उसने लेनदारों और सहयोगियों को कैश पेमेंट के बजाए फाइटर जेट देने का प्रस्ताव सौंपा है। सऊदी अरब के साथ बातचीत में पाकिस्तान ने लोन चुकाने के बदले JF-17 जेट्स देने की पेशकश की है। इसी तरह, कुछ दूसरे सहयोगियों को भी ऐसे ही ऑफर दिए गए, क्योंकि पाकिस्तान को कर्ज चुकाने में संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बदहाल है। दूसरों से कर्ज पर पाकिस्तान जिंदा है, लेकिन समस्या ये है कि कर्ज चुकाने के भी पैसे नहीं बचे हैं। इसलिए पाक सरकार अपने हथियारों के जरिए कर्ज चुकाना चाहती है, मगर उसकी यह चाहत भी पूरी नहीं हो रही।

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