भारत, May 30, 2026

महासागर 'मंथन' में मिली 1,100 से ज़्यादा नई प्रजातियाँ
दुनिया के महासागरों में छिपी जैव विविधता को लेकर वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। ओशन सेंसस अलायंस ने मध्य-2025 से मध्य-2026 के बीच 13 समुद्री अभियानों और 9 कार्यशालाओं के दौरान 1,121 नई समुद्री प्रजातियों की पहचान की है। वैज्ञानिकों के अनुसार अब तक समुद्र तल का 0.001% से भी कम हिस्सा सीधे देखा गया है, इसलिए गहराइयों में अनगिनत अनजान जीव मौजूद हो सकते हैं। कई वैज्ञानिक तो यह भी मानते हैं कि समुद्र में अंतरिक्ष से ज़्यादा रहस्य छिपे हो सकते हैं।
नई खोजों में पूर्वी तिमोर के पास मिले रंगीन रिबन वर्म शामिल हैं, जिनमें ऐसे विषैले तत्व होने की संभावना है जो भविष्य में मानव बीमारियों के इलाज में काम आ सकते हैं। जापान के तट के पास वैज्ञानिकों को कांच जैसे सिलिका ढांचे वाले नुकीले स्पंज और उनमें रहने वाले पारदर्शी पॉलीकीट कीड़े भी मिले, जो स्पंज को पोषण देते हैं। कुछ पॉलीकीट जीव जैव-दीप्ति यानी अंधेरे में चमकने की क्षमता रखते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समुद्री दुनिया किसी जादुई संसार जैसी है।
वैज्ञानिकों के अनुसार किसी नई प्रजाति की आधिकारिक पहचान में औसतन 13 साल लग जाते हैं, जबकि समुद्री स्पंज जैसे कम अध्ययन वाले जीवों में यह समय और ज़्यादा हो सकता है। वर्ष 2011 में अनुमान लगाया गया था कि महासागरों की 91% प्रजातियाँ अब भी खोजी नहीं गई हैं। ओशन सेंसस अलायंस पिछले 3 वर्षों से दुनियाभर के टैक्सोनॉमिस्ट के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को तेज़ करने में जुटा है। उसका ओपन-एक्सेस प्लेटफॉर्म ‘ओशन सेंसस नोवा’ हज़ारों नई प्रविष्टियों का डिजिटल भंडार बन चुका है।
दिलचस्प बात यह है कि नई प्रजातियों में अधिकांश खोजें नए अभियानों से नहीं, बल्कि पहले से जमा नमूनों की दोबारा जांच से हुईं। कुल 1,121 नई प्रजातियों में से 728 संग्रहालय अभिलेखों और वैज्ञानिकों के पुराने संग्रहों से पहचानी गईं। नई प्रजाति की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक माइक्रोस्कोप, स्कैनिंग, डीएनए परीक्षण और विस्तृत चित्रण का सहारा लेते हैं। ओशन सेंसस अलायंस की विज्ञान प्रमुख मिशेल टेलर ने कहा कि इतनी बड़ी खोज वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का परिणाम है और समुद्री दुनिया लगातार चौंकाने वाले रहस्यों से भरी हुई है।
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Published on: 30 May 2026 11:11 pm

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