
तारिक रहमान, अध्यक्ष, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Photo - IANS)
बांग्लादेश में संपन्न हुए 13वें संसदीय चुनाव के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने इन चुनावों में अपनी पार्टी की 'ऐतिहासिक जीत' का भरोसा जताया है। इसी क्रम में पार्टी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रूहुल कबीर रिजवी ने जनता का आभार व्यक्त करते हुए दावा किया कि बीएनपी को चुनाव में स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है, जिसे वे एक बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं।
उधर, चुनाव में जीत का दावा करते हुए बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। BNP ने अपने समर्थकों से जश्न नहीं मनाने की अपील की है। पार्टी की तरफ से कहा गया है कि समर्थक जीत का उत्सव मनाने के बजाय आज पूरे देश में शुक्रवार की नमाज में शामिल हों और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को याद करें। इतना ही नहीं, BNP नेतृत्व ने समर्थकों से शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील भी की है।
स्थानीय मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाली छात्रों की National Citizen Party (NCP) को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली है। उसने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें सिर्फ पांच पर जीत हासिल करने की खबर है।
गुरुवार को हुए मतदान के बाद सामने आ रहे शुरुआती रुझान भी इसी ओर इशारा कर रहे थे कि BNP देशभर के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में आधे से अधिक सीटों पर अपनी बढ़त बनाए हुए है।
हालांकि, जीत के इन दावों के बीच चुनावी निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। मतदान के दौरान देश के कई हिस्सों से धांधली और मतदाताओं को आर्थिक प्रलोभन देकर प्रभावित करने की खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा व्यवस्था में चूक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही तनावपूर्ण माहौल बना रहा और हिंसक झड़पों में एक राजनीतिक नेता की जान भी चली गई।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का एक स्पष्ट मामला तंगाइल जिले के मिर्जापुर उपजिला से सामने आया, जहां जमात-ए-इस्लामी के नेता जैनल अबेदीन को रणाशाल गांव में मतदान के दौरान पैसे बांटते हुए पकड़ा गया। इस घटना की पुष्टि करते हुए मोबाइल कोर्ट के मजिस्ट्रेट और सहायक आयुक्त तारेक अजीज ने आरोपी पर जुर्माना लगाया और उसे हिरासत में ले लिया।
कुल मिलाकर, जहां एक तरफ बीएनपी समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर हुई हिंसा और धांधली की घटनाओं ने देश की आंतरिक सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
Published on:
13 Feb 2026 09:21 am
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