
तारिक रहमान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। ( फोटो : पत्रिका)
Bangladesh Politics: बांग्लादेश की राजनीति में एक लंबे और उथल-पुथल भरे दौर के बाद (Bangladesh Politics) आखिरकार स्थिरता की उम्मीद जागी है। साल 2024 के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन के बाद, 2026 के आम चुनाव देश के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए जा रहे ताजा आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि बांग्लादेश की जनता अब अनिश्चितता के दौर से बाहर निकलना चाहती है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन केवल ढाका तक सीमित नहीं है। इसकी गूंज नई दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में भी सुनी जा रही है। भारत के लिए बांग्लादेश केवल एक पड़ोसी नहीं (India Bangladesh Relations), बल्कि 'नेबरहुड फर्स्ट' (Neighborhood First) नीति का सबसे अहम स्तंभ है। 2026 के चुनाव नतीजों और नई सरकार के गठन के बाद भारत के लिए इसके कूटनीतिक और रणनीतिक मायने बेहद गहरे हैं।
भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। 2024 की अस्थिरता के बाद भारत की सबसे बड़ी चिंता सीमा पर घुसपैठ और उत्तर-पूर्व (North East) के उग्रवादी समूहों को बांग्लादेश में पनाह मिलने को लेकर थी।
असर: भारत चाहेगा कि नई सरकार सुरक्षा के मुद्दे पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाए और अपनी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे।
असर: अगर नई सरकार का झुकाव बीजिंग की तरफ ज्यादा होता है, तो यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Chicken's Neck) और बंगाल की खाड़ी में भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है। भारत को कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए एक्स्ट्रा प्रयास करने होंगे।
असर: नई सरकार के साथ इन प्रोजेक्ट्स की निरंतरता बनाए रखना भारत की प्राथमिकता होगी। साथ ही, प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (CEPA) पर बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
असर: भारत नई सरकार से स्पष्ट आश्वासन चाहेगा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न हो। यह द्विपक्षीय संबंधों के 'मूड' को तय करने वाला बड़ा फैक्टर होगा।
चुनाव परिणामों का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जनता ने किसी एक चेहरे पर भरोसा जताने के बजाय, मुद्दों पर वोट दिया है। रुझानों से पता चलता है कि देश में गठबंधन सरकार बनने की प्रबल संभावना है। प्रमुख विपक्षी दलों ने महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाया था, जिसका असर वोटिंग पैटर्न में साफ दिख रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई सरकार को कई दलों को साथ लेकर चलना होगा, जो बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए एक नई परीक्षा होगी।
नई सरकार के सामने फूलों की सेज नहीं, बल्कि कांटों का ताज होगा। पिछले दो वर्षों में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है। विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी को दूर करना नए प्रधानमंत्री की पहली प्राथमिकता होगी। इसके अलावा, भारत सहित अन्य पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक रिश्तों को पटरी पर लाना भी एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।
एक चुनी हुई सरकार के पास जनादेश की ताकत होती है। उम्मीद की जा रही है कि नई सरकार नई दिल्ली के साथ तीस्ता और अन्य 53 साझा नदियों के जल बंटवारे पर नए सिरे से बातचीत की मेज पर आएगी। कुल मिलाकर, भारत 'प्रतीक्षा और निगरानी' (Wait and Watch) की मुद्रा में है। नई दिल्ली का आधिकारिक रुख यही है कि वह बांग्लादेश की जनता द्वारा चुनी गई किसी भी सरकार के साथ काम करने को तैयार है, बशर्ते भारत के रणनीतिक हित सुरक्षित रहें।
Published on:
13 Feb 2026 12:36 pm
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