जयपुर। राजस्थान में इस वर्ष होलिका दहन 2 और 3 मार्च की दरमियानी रात शास्त्र सम्मत मुहूर्त में किया जाएगा, जबकि 3 मार्च को धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा। फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट से प्रारंभ होकर 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। चूंकि 3 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि नहीं रहेगी, इसलिए शास्त्रों के अनुसार 2 मार्च को ही होलिका दहन करना उचित और मान्य होगा।
राजस्थान ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के महासचिव प्रो. विनोद शास्त्री ने बताया कि 2 मार्च की रात्रि भद्रा का प्रभाव रहेगा। भद्रा के मुख काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, जबकि भद्रा के पुच्छ काल में दहन शुभ फलदायी होता है। इसी आधार पर अर्धरात्रि के बाद 1:26 बजे से 2:38 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए सर्वोत्तम रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि 3 मार्च को सुबह 6:55 बजे से सूतक काल आरंभ हो जाएगा। चंद्रग्रहण का ग्रहण काल दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। जयपुर में चंद्रग्रहण शाम 6 बजे के बाद दिखाई देगा।