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Pravin Togadia Social Video: स्कूल में प्रवीण तोगड़िया का शपथ कार्यक्रम बना विवाद का कारण,जानिए वजह

Pravin Togadia Social: सीबीएसई से संबद्ध स्कूल में आयोजित कार्यक्रम उस समय विवादों में आ गया, जब अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक प्रवीण तोगड़िया द्वारा छात्रों को दिलाई गई शपथ में आत्मरक्षा के नाम पर शारीरिक हिंसा को लेकर कथित बयान सामने आए। इस घटना ने शिक्षा जगत में चिंता बढ़ा दी है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 20, 2026

छात्रों को आत्मरक्षा के नाम पर शारीरिक हिंसा के लिए प्रेरित करने के आरोप, शिक्षा जगत में चिंता    (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group) 

छात्रों को आत्मरक्षा के नाम पर शारीरिक हिंसा के लिए प्रेरित करने के आरोप, शिक्षा जगत में चिंता    (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group) 

Pravin Togadia School Controversy:  सीबीएसई से संबद्ध केंद्रीय पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम उस समय विवादों में आ गया, जब अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (AHP) के संस्थापक प्रवीण तोगड़िया द्वारा छात्रों को दिलाई गई एक शपथ को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे। आरोप है कि इस शपथ के दौरान छात्रों को आत्मरक्षा के नाम पर शारीरिक हिंसा-जैसे मुक्का मारना, थप्पड़ मारना और लात चलाना-जैसी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया गया। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा जगत, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में चिंता और बहस का माहौल बन गया है।

स्कूल परिसर में आयोजित हुआ कार्यक्रम

सूत्रों के अनुसार, यह कार्यक्रम दिल्ली स्थित एक सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध केंद्रीय पब्लिक स्कूल के परिसर में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान प्रवीण तोगड़िया छात्रों के बीच उपस्थित थे और उन्होंने उन्हें एक शपथ दिलाई। आरोप है कि इस शपथ में छात्रों से यह कहा गया कि वे किसी भी टकराव की स्थिति में शारीरिक बल का प्रयोग करें और स्वयं की रक्षा के लिए हिंसक कदम उठाने से पीछे न हटें।

आत्मरक्षा बनाम हिंसा की बहस

कार्यक्रम के दौरान दिए गए संदेश को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आत्मरक्षा और हिंसा के बीच की रेखा कहां खींची जानी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि आत्मरक्षा का अर्थ आत्म-संयम, सतर्कता और कानूनी दायरे में खुद को सुरक्षित रखना होता है, न कि बच्चों को शारीरिक हमला करने के लिए प्रेरित करना। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को विवाद समाधान, संवाद, सहिष्णुता और अहिंसा के मूल्यों की शिक्षा दी जानी चाहिए, न कि आक्रामक व्यवहार को सामान्य रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

अभिभावकों में नाराजगी

मामले के सामने आते ही कई अभिभावकों ने नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार सीखने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि हिंसा के पाठ पढ़ने के लिए। कुछ अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से स्पष्टीकरण की मांग भी की है कि इस तरह के कार्यक्रम की अनुमति किस आधार पर दी गई। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “अगर बच्चों को किसी तरह की आत्मरक्षा सिखानी है, तो वह प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा, नियमों के तहत होनी चाहिए। मंच से हिंसा का संदेश देना बेहद चिंताजनक है।”

स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल

इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे छात्रों के लिए सुरक्षित, संतुलित और गैर-हिंसक वातावरण सुनिश्चित करें। ऐसे में किसी बाहरी वक्ता द्वारा इस तरह का संदेश दिए जाने को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या स्कूल प्रशासन ने कार्यक्रम की विषयवस्तु की पूर्व समीक्षा की थी। शिक्षा से जुड़े नियमों के जानकारों का कहना है कि स्कूल परिसर में होने वाले किसी भी कार्यक्रम की जिम्मेदारी अंततः स्कूल प्रबंधन की होती है।

सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

घटना को लेकर कई सामाजिक और शैक्षिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में जब समाज पहले से ही तनाव और ध्रुवीकरण से गुजर रहा है, तब बच्चों को हिंसा की भाषा सिखाना भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हो सकता है। कुछ संगठनों ने इस मामले की जांच की मांग की है और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

समर्थकों की दलील

हालांकि, प्रवीण तोगड़िया से जुड़े समर्थक वर्ग का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों को कमजोर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनाना था। उनके अनुसार, शपथ का मकसद आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना था, न कि अकारण हिंसा को बढ़ावा देना। समर्थकों का यह भी कहना है कि मौजूदा समय में बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है, लेकिन आलोचक इस तर्क से सहमत नहीं दिख रहे।

कानूनी और शैक्षिक दृष्टिकोण

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिग छात्रों को शारीरिक हिंसा के लिए उकसाना गंभीर मामला हो सकता है, खासकर जब वह शैक्षणिक परिसर में किया गया हो। स्कूलों को बच्चों के सर्वांगीण विकास,मानसिक, नैतिक और सामाजिक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीबीएसई के दिशा-निर्देशों में भी छात्रों के बीच शांति, अनुशासन और अहिंसा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

शिक्षा विभाग की नजर

हालांकि अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। यदि शिकायत दर्ज होती है, तो स्कूल और कार्यक्रम से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सकती है।

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