
फाइल फोटो- पत्रिका
Rajasthan Weather Update: मौसम इन दिनों साफ तौर पर बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले दो दिनों से अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम 15 डिग्री बना हुआ है। यह स्थिति संकेत दे रही है कि सर्दी धीरे-धीरे विदा हो रही है और मौसम संक्रमण काल में प्रवेश कर चुका है। हालांकि अभी फाल्गुनी बयार पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई है, लेकिन उसकी आहट महसूस होने लगी है।
सुबह और रात के समय हल्की ठंडक बनी हुई है, जबकि दिन में धूप तेज होने लगी है। इन दिनों पेड़ों से पत्ते झड़ना भी नजर आ रहा है। इन दिनों की स्थिति पतझड़ का अंतिम चरण है। यह बदलाव न केवल दिख रहा है, बल्कि मौसम की अनुभूति में भी महसूस हो रहा है। मौसमी बदलाव का असर जनजीवन पर भी दिखने लगा है। दिन में गर्म कपड़े छूटने लगे हैं, जबकि रात और सुबह अब भी गर्म कपड़ों की जरूरत बनी हुई है।
हालांकि मौसमी बदलाव का दौर अभी खत्म नहीं हुआ हैँ पश्चिमी विक्षोभ के चलते बादलों की आवाजाही बनी हुई है। इसी क्रम में अगले एक सप्ताह के दरमियान दो बार बादलों का असर बना रहेगा। असर तेज रहा तो उदयपुर सहिम मेवाड़ में बूंदाबांदी संभव है। हालांकि अब तक पश्चिमी विक्षाभ के कमजोर रहते उदयपुर में मावठ नहीं हुई है।
फरवरी मध्य से मार्च मध्य के बीच फाल्गुनी बयार चलती है। इसकी पहचान दिन में अनुकूल तापमान और सुबह-शाम की नरम ठंड से होगी। अभी का मौसम फाल्गुनी बयार से ठीक पहले का है। एक-दो सप्ताह में तापमान और बढ़ने के साथ बयार सक्रिय हो जाएगी।
झीलों और हरियाली वाले उदयपुर शहर में यह समय खास माना जाता है। मौसम न बहुत ठंडा है, न बहुत गर्म। पर्यटन गतिविधियां भी धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ती है। हालांकि दोपहर की धूप अब तेज होने वाली है, जिससे आने वाले दिनों में गर्मी के संकेत भी मिलने लगे है।
एक हफ्ते में उदयपुर में मौसम साफ और शुष्क रहना संभव है। दिन का तापमान बढ़कर 28 डिग्री और रात का तापमान 17 डिग्री के आसपास रहेगा। धूप की तेजी बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल मौसम अनुकूल ही रहेगा। फाल्गुनी बयार शुरू होने पर ठंड लगभग खत्म हो जाएगी।
आगामी दिनों में अब अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी, जबकि रात की ठंडक कुछ दिन बनी रह सकती है। हवा शुष्क रहेगी, लेकिन हवा में गर्मी फिलहाल नहीं चलेंगी। अगले कुछ दिनों में तापमान में बढ़ोतरी संभव है। अरब सागरीय विक्षोभ से उदयपुर सहित दक्षिणी राजस्थान में हल्के बादल छाए हुए हैं, लेकिन कमजोर विक्षोभ के चलते मावठ नहीं हुई। बादल छाने का क्रम एक-दो दिन जारी रहेगा।
प्रो. नरपतसिंह राठौड़, मौसमविद
यह संक्रमण काल है। यह वही समय है, जब मौसम के साथ तालमेल बैठाने में सावधानी की जरूरत होती है। यह दौर सर्दी से गर्मी की ओर बढ़ने का प्राकृतिक चरण है, जिसमें तापमान में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं होता, लेकिन हवा का मिजाज बदलने लगता है। यह मौसम सर्दी-जुकाम, एलर्जी और वायरल संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील होता है, इसलिए लापरवाही से बचना जरूरी है। अब खानपान में बदलाव करना चाहिए।
डॉ. राजीव कुमार पांडे, प्रोफेसर (पंचकर्म), आयुर्वेद कॉलेज
Published on:
04 Feb 2026 11:04 am
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