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बगैर आभा आईडी के जिला अस्पताल में नहीं हो रहीं जांचें

बिना प्रचार प्रसार के लागू हुआ नियम, इलाज के बिना लौट रहे मरीज

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बिना प्रचार प्रसार के लागू हुआ नियम, इलाज के बिना लौट रहे मरीज

बिना प्रचार प्रसार के लागू हुआ नियम, इलाज के बिना लौट रहे मरीज

टीकमगढ़ शासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे है। इसी क्रम में जिला अस्पताल में जांच रिपोर्टों को डिजिटल किया जा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया में आभा आईडी आयुष्मान भारत हेलथ अकांउट को अनिवार्य कर दिए जाने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कुण्डेश्वर क्षेत्र के मनोहर यादव, किशोरी अहिरवार, दिगौड़ा क्षेत्र की रामबाई वंशकार और सरोज वंशकार ने बताया कि वे बुखार की जांच कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन लैब कर्मचारियों ने आभा आईडी मांगी है। मरीजों का कहना है कि उन्हें पहले कभी यह जानकारी नहीं दी गई कि आभा आईडी के बिना जांच संभव नहीं होगी। विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं और अशिक्षित मरीज इस नई व्यवस्था से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे है, क्योंकि वे डिजिटल प्रक्रिया को समझने में असमर्थ है।

बताया गया कि जिला अस्पताल की लैब में अब बगैर आभा आईडी के जांचें नहीं की जा रही। जिसके कारण कई मरीजों को ओपीडी और अन्य विभागों में इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिन मरीजों के पास आभा आईडी नहीं है, उन्हें बिना उपचार के ही वापस लौटना पड़ रहा है।

प्रचार प्रसार के बिना लागू हुआ नियम

स्थानीय नागरिक संतोष यादव और राजेश कुशवाहा ने बताया कि यदि सरकार कोई नया नियम लागू करती है, तो पहले उसका व्यापक प्रचार प्रसार करती है, ताकि आमजन को इसकी पूरी जानकारी मिल सके। बिना सूचना के नियम लागू करना जनता के साथ अन्याय है।

यह है आभा आईडी

आभा आईडी, जिसे आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट भी कहा जाता है, भारत सरकार की डिजिटल स्वास्थ्य योजना का हिस्सा है। यह 14 अंकों की डिजिटल हेल्थ आईडी होती है। जिसके माध्यम से मरीज अपने सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उपचार विवरण को सुरक्षित डिजिटल लॉकर में रख सकता है। इसे आधार या ड्राइविंग लाइसेंस के माध्यम से ऑनलाइन बनाया जा सकता है।

नियम कुछ और हकीकत कुछ और

आभा आईडी जरूरी है, लेकिन किसी भी मरीज को इसके अभाव में इलाज से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि मरीज के पास आईडी नहीं है, तो अस्पताल कर्मचारियों को वहीं उसकी आईडी बनानी चाहिए और यदि किसी कारणवश आईडी नहीं बन पाती है, तो भी मरीज की जांच और इलाज किया जाना चाहिए।

शासन द्वारा सभी जांचों को डिजिटल किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों से यह प्रक्रिया चल रही है। आभा आईडी के माध्यम से मरीज की पुरानी और नई सभी जांचें एक साथ उपलब्ध होंगी। जिससे डॉक्टरों को इलाज में सुविधा मिलेगी।

डॉ विकास जैन, प्रभारी आभा आईडी जिला अस्पताल टीकमगढ़।


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