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सर्दी की मार, गोशालाओं में बीमार पशुधन तोड़ रहे तोड़ रहे दम, इंतजाम नाकापी

लाखों का बजट और जिम्मेदारों की लापरवाही हो र ही उजागर

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लाखों का बजट और जिम्मेदारों की लापरवाही हो र ही उजागर

लाखों का बजट और जिम्मेदारों की लापरवाही हो र ही उजागर

टीकमगढ़ भीषण सर्दी और घने कोहरे के बीच जहां आमजन ठंड से बेहाल है, वहीं गोशालाओं में संरक्षित पशुधन भी सर्दी की चपेट में आकर दम तोड़ रहा है। शासन द्वारा गोशालाओं के संचालन, रखरखाव और पशुओं की देखभाल पर लाखों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कई गोशालाओं में पशु सुरक्षित नहीं है और लगातार उनकी मौतें हो रही है।

शुक्रवार दोपहर 12.24 बजे पत्रिका टीम ने जनपद पंचायत पलेरा की ग्राम पंचायत निबोरा की गोशाला का जायजा लिया। जहां हालात बेहद चिंताजनक पाए गए। यहां लापरवाही के चलते पहले कई पशुओं की मौत हो चुकी है और आज बीमार गाय मवेशियों के बीच पड़ी है। इसके बावजूद गोशाला संचालन करने वालों द्वारा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

इसी तरह ग्राम पंचायत सिमरा खुर्द की गोशाला में पशुओं को सर्दी से राहत देने के लिए तीन सेट सहित चारों ओर से बंद व्यवस्था होने का दावा किया गया है, लेकिन इसके बावजूद पशु ठंड से नहीं बच पा रहे है। वहीं टीला नरेनी और बाजीतपुरा में संचालित गोशालाओं की स्थिति भी बेहद खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला संरक्षण के नाम पर शासन द्वारा पर्याप्त बजट दिया जाता है, लेकिन सर्दी के मौसम में पशुओं को बचाने के लिए जरूरी इंतजाम, जैसे चार, भूसा, टाट पट्टी, बोरी या अलाव, नदारद है। नतीजतन पशु बीमार पड़ रहे है और कई बार दम तोड़ दे रहे है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब सर्दी के मौसम में आम आदमी तक सुरक्षित नहीं है, तो पशुधन की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने गोशाला संचालकों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों से भी मांग की है कि पशुओं के लिए टाट पट्टी, बोरी, अलाव एवं अन्य आवश्यक इंतजाम तत्काल किए जाएं। हालांकि शासन प्रशासन द्वारा गोशालाओं के सुचारु संचालन और पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए है, लेकिन उन पर जमीनी स्तर पर अमल होता नजर नहीं आ रहाए जो गंभीर जांच का विषय है।

सर्दी का सीजन है, गोशाला के अलावा गांव में भी सर्दी के मौसम में मवेशी दम तोड़ रहे है। गांव में भूख प्यास से तडपने वाले मवेशियों को गोशाला में गोपालक पहुंचा देते है। उन्हें कैसे बचाया जा सकता है।

हरगोविंद चढार, प्रतिनिधि सरपंच निबौरा।

सर्दी के मौसम में गोशाला में मवेशियों को चार भूसे के साथ ही सर्दी से बचाव के प्रयास किए गए है। हरीनेट के साथ टाट पट्टी भी उपयोग की जा रही है।

रघुवीर सभापति, सरपंच सिमरा खुर्द।

गोशालाओं में पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए लगातार निर्देश दिए जा रहे है। यदि कहीं लापरवाही सामने आती है या पशुओं की मौत हो रही है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के लोगों को भी आगे आकर सर्दी के मौसम में पशुओं को बचाने के लिए टाट पट्टी एवं अन्य साधनों की व्यवस्था में सहयोग करना चाहिए।

डॉ आरके जैन, उपसंचालक पशु चिकित्सा विभाग टीकमगढ़।