
Ambikapur-Bishrampur shabby road (Photo- Patrika)
विश्रामपुर। अंबिकापुर-बिश्रामपुर मुख्य मार्ग एनएच-43 (Ambikapur-Bishrampur road) के मजबूतीकरण कार्य के लिए सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 28 करोड़ 19 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी को जारी स्वीकृति आदेश में इसका उल्लेख किया गया है। करीब 10 किलोमीटर की यह सडक़ अत्यंत जर्जर हालत में है। इसे देखते हुए प्रस्ताव भेजा गया था।
संभाग मुख्यालय अंबिकापुर को जोडऩे वाला मार्ग बारामिल जंगल करमपुर मोड़ से कालीघाट तक पिछले कई वर्षों से अत्यंत जर्जर स्थिति में था। सडक़ (Ambikapur-Bishrampur road) की बदहाली को लेकर बीते तीन वर्षों से आम नागरिक लगातार शासन-प्रशासन से शिकायतें करते आ रहे थे। हर वर्ष बारिश के बाद पैच रिपेयर कर सडक़ को अस्थायी रूप से आवागमन योग्य बनाया जाता था, लेकिन कुछ ही समय में सडक़ की स्थिति फिर से खराब हो जाती थी।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एनएच विभाग द्वारा कुम्दा करमपुर मोड़ हनुमान मंदिर से कालीघाट तक करीब साढ़े 10 किलोमीटर लंबे जर्जर राष्ट्रीय राजमार्ग के मजबूतीकरण (Ambikapur-Bishrampur road) का प्रस्ताव तैयार कर इसे अति आवश्यक कार्य बताते हुए मंत्रालय को भेजा गया था। प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए मंत्रालय ने 28 करोड़ 19 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
गौरतलब है कि सडक़ की जर्जर स्थिति के कारण बिश्रामपुर से अंबिकापुर (Ambikapur-Bishrampur road) की यात्रा अत्यंत कष्टदायक हो गई थी। हालात ऐसे थे कि लोग मजबूरी में ही दोपहिया या चारपहिया वाहनों से सफर करते थे। अब इस स्वीकृति के बाद संभाग मुख्यालय तक की राह आसान होने की उम्मीद जगी है क्योंकि कालीघाट के आगे की सडक़ का निर्माण कार्य गत वर्ष पूरा हो चुका है।
वहीं हाल ही में अंबिकापुर रेलवे स्टेशन से गांधी चौक (Ambikapur-Bishrampur road) तक फोरलेन सडक़ निर्माण के लिए भी राज्य शासन द्वारा भी 61 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।
एनएच प्रशासन (Ambikapur-Bishrampur road) के अनुसार स्वीकृति मिलने के बाद अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 3 माह के भीतर निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो सकता है। इस परियोजना के तहत सडक़ के दोनों ओर आवश्यकतानुसार नाली, पुल-पुलिया और संकेतक बोर्ड लगाए जाएंगे।
प्रशासन ने बताया कि नाली व पुल-पुलिया निर्माण से सडक़ की ऊंचाई बढ़ेगी, जलभराव की समस्या समाप्त होगी और सडक़ की आयु भी काफी बेहतर होगी।
Published on:
27 Jan 2026 08:23 pm
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