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छतों में दरारें, स्टाफ भी अधूरा…’बेटी पढ़ाओ’ का नारा कैसे हो पूरा ?

श्रीगंगानगर.‘बेटी पढ़ाओ’ के नारों के बीच जब स्कूल की छत ही भरोसेमंद ना रहे तो यह नारा बेमानी लगने लगता है। शहर के एफ ब्लॉक स्थित राजकीय बालिका उमा विद्यालय में पढ़ाई जोखिम और अभावों के बीच जारी है। कई कमरे असुरक्षित घोषित हैं, एक कमरे में दो-दो कक्षाएं लग रही हैं, वहीं महत्वपूर्ण विषयों […]

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श्रीगंगानगर.‘बेटी पढ़ाओ’ के नारों के बीच जब स्कूल की छत ही भरोसेमंद ना रहे तो यह नारा बेमानी लगने लगता है। शहर के एफ ब्लॉक स्थित राजकीय बालिका उमा विद्यालय में पढ़ाई जोखिम और अभावों के बीच जारी है। कई कमरे असुरक्षित घोषित हैं, एक कमरे में दो-दो कक्षाएं लग रही हैं, वहीं महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों पद भी रिक्त हैं। बोर्ड परीक्षाओं के दौर में यह स्थिति छात्राओं पर अतिरिक्त दबाव बन रही है। वार्षिक बजट नहीं मिलने से मूलभूत सुविधाएं भी प्रभावित हैं। इसके बावजूद बेटियां नियमित स्कूल पहुंच रही हैं और सीमित संसाधनों में अपने सपनों को आकार देने की जिद बनाए हुए हैं।

विद्यालय की छतें भरोसेमंद नहीं

सुबह प्रार्थना के बाद छात्राएं उत्साह से कक्षाओं की ओर बढ़ती हैं, लेकिन एफ ब्लॉक स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की छतें भरोसेमंद नहीं हैं। 14 कमरों में से सात असुरक्षित और दो आंशिक असुरक्षित घोषित हैं। मजबूरी में एक कमरे में दो-दो कक्षाएं संचालित हो रही हैं। कंप्यूटर लैब में विज्ञान की कक्षा लग रही है, क्योंकि कंप्यूटर अनुदेशक का पद रिक्त है।

बेटियों की पढ़ाई प्रभावित

बोर्ड परीक्षाओं के बीच छात्राओं की चिंता बढ़ी है। 10वीं व 12वीं की छात्राओं का कहना है कि शिक्षकों की कमी से पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो सका। विद्यालय में हिंदी, कला व होम साइंस के तीन प्राध्यापक पद रिक्त हैं। सेकंड ग्रेड के छह में से तीन पद खाली हैं। एल-2 हिंदी, एल-1 और कंप्यूटर अनुदेशक के पद भी रिक्त हैं। विषय विशेषज्ञों की अनुपस्थिति से पढ़ाई की गुणवत्ता और छात्राओं का आत्मविश्वास प्रभावित हो रहा है।

पानी की टंकी असुरक्षित, खेल मैदान का अभाव

विद्यालय को इस वर्ष वार्षिक बजट नहीं मिला। बिजली-पानी के बिल प्रधानाचार्य व स्टाफ सहयोग से जमा कर रहे हैं। परिसर की पानी की टंकी असुरक्षित है। पीटीआई नियुक्त है, लेकिन खेल मैदान नहीं होने से छात्राओं को मटका चौक मैदान ले जाना पड़ता है। इन अभावों के बावजूद डॉक्टर, शिक्षक, अधिकारी और खिलाड़ी बनने के सपने संजोए छात्राएं नियमित रूप से स्कूल आ रही हैं।

स्कूल एक नजर मे

  • कुल कमरे: 14
  • असुरक्षित: 7
  • आंशिक असुरक्षित: 2
  • रिक्त पद: प्राध्यापक 3, सेकंड ग्रेड 3, अन्य 3
  • खेल मैदान: नहीं
  • वार्षिक बजट: प्राप्त नहीं

वर्जन

विद्यालय भवन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कुछ कमरों की छतों की मरम्मत हुई है, लेकिन स्टाफ व कमरों की कमी से एक कमरे में दो कक्षाएं चलानी पड़ रही हैं।

-प्रसून रस्तोगी, प्रधानाचार्य, राजकीय बालिका उमा विद्यालय, श्रीगंगानगर।